खरीफ 2026 में अब ‘पहले आओ पहले पाओ’ नहीं, ऑनलाइन बुकिंग और ई-लॉटरी से दिए जाएंगे बीज

यूपी में पहले बीज वितरण ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर होता था, जिससे कई बार छोटे और दूरदराज के किसान पीछे रह जाते थे. जो किसान जल्दी पहुंच जाते थे, उन्हें लाभ मिल जाता था, जबकि कई जरूरतमंद किसान समय पर जानकारी या साधनों की कमी के कारण वंचित रह जाते थे. इसी समस्या को दूर करने के लिए कृषि विभाग ने यह डिजिटल और निष्पक्ष प्रणाली लागू की है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 29 Apr, 2026 | 12:32 PM

Kharif 2026 seed distribution: खरीफ सीजन 2026 को ध्यान में रखते हुए यूपी कृषि विभाग ने बीज वितरण व्यवस्था में एक बड़ा और अहम बदलाव किया है. अब तक वर्षों से चल रही ‘पहले आओ, पहले पाओ’ प्रणाली को खत्म कर दिया गया है. इसकी जगह अब किसानों को ऑनलाइन बुकिंग और ई-लॉटरी के जरिए बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी किसानों को समान अवसर मिलेगा.

क्यों बदली गई पुरानी व्यवस्था?

यूपी में पहले बीज वितरण ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर होता था, जिससे कई बार छोटे और दूरदराज के किसान पीछे रह जाते थे. जो किसान जल्दी पहुंच जाते थे, उन्हें लाभ मिल जाता था, जबकि कई जरूरतमंद किसान समय पर जानकारी या साधनों की कमी के कारण वंचित रह जाते थे. इसी समस्या को दूर करने के लिए कृषि विभाग ने यह डिजिटल और निष्पक्ष प्रणाली लागू की है. नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी किसान अपने घर से ही आवेदन कर सकता है, जिससे उसे लाइन में लगने या बार-बार दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

ऑनलाइन बुकिंग कब से शुरू और कब तक?

कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए बीजों की ऑनलाइन बुकिंग 22 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है. किसान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण कर सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार बीजों के लिए आवेदन कर सकते हैं.

ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 10 मई 2026 तय की गई है. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन कर लें, ताकि किसी तरह की तकनीकी परेशानी से बचा जा सके.

पूरी प्रक्रिया हुई डिजिटल

इस बार बीज वितरण की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है. किसान ऑनलाइन पोर्टल http://agridarshan.up.gov.in पर जाकर आसानी से आवेदन कर सकते हैं. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

जिन किसानों को ऑनलाइन आवेदन करने में कठिनाई हो रही है, वे अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर मदद ले सकते हैं. विभागीय कर्मचारी भी किसानों की सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगे.

ई-लॉटरी से होगा चयन

नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि अब बीज वितरण के लिए चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा. यदि किसी बीज के लिए निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन आते हैं, तो सभी पात्र किसानों के बीच लॉटरी निकाली जाएगी. इसका फायदा यह होगा कि हर किसान को बराबर का मौका मिलेगा और किसी को भी सिर्फ इसलिए वंचित नहीं रहना पड़ेगा क्योंकि वह समय पर आवेदन नहीं कर पाया.

किन फसलों के बीज मिलेंगे?

इस योजना के तहत किसानों को कई तरह की फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. इनमें दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की प्रमुख फसलें शामिल हैं.

दलहन फसलों में उड़द, मूंग और अरहर के बीज दिए जाएंगे. वहीं तिलहन में तिल और मोटे अनाजों में बाजरा, ज्वार, मक्का और धान शामिल हैं. इसके अलावा सरकार श्रीअन्न यानी पोषक अनाजों को बढ़ावा देने के लिए रागी, सांवा और कोदो जैसे बीज भी उपलब्ध करा रही है. इससे किसानों को फसल विविधीकरण का अवसर मिलेगा और वे बेहतर उत्पादन के साथ-साथ पोषणयुक्त खेती भी कर सकेंगे.

किसानों के लिए क्या फायदे होंगे?

नई व्यवस्था से किसानों को कई तरह के फायदे मिलेंगे. सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब सभी किसानों को समान अवसर मिलेगा. इसके अलावा उन्हें लंबी कतारों में खड़े होने या अधिकारियों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. डिजिटल प्रक्रिया होने के कारण भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावना भी कम होगी. साथ ही, दूर-दराज के किसानों को भी योजना का पूरा लाभ मिल सकेगा.

आवेदन करते समय रखें ये बातें ध्यान में

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे आवेदन करते समय अपनी सभी जानकारी सही-सही भरें. अगर किसी प्रकार की गलती होती है, तो चयन प्रक्रिया में दिक्कत आ सकती है. समय सीमा का भी खास ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि अंतिम तिथि के बाद कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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