आटा-मैदा निर्यात पर सरकार का बड़ा फैसला, 5 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त कोटा मंजूर… नियम जल्द होंगे जारी

सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस अतिरिक्त निर्यात के लिए कुछ विशेष नियम और प्रक्रियाएं तय की जाएंगी. DGFT द्वारा जल्द ही एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें यह बताया जाएगा कि निर्यातक किस तरह आवेदन करेंगे, किन शर्तों का पालन करना होगा.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 9 Apr, 2026 | 01:07 PM

Wheat flour export policy: भारत सरकार ने गेहूं के आटा, मैदा और सूजी जैसे उत्पादों के निर्यात को लेकर एक अहम फैसला लिया है. लंबे समय से इन चीजों के निर्यात पर सख्ती बनी हुई थी, लेकिन अब सरकार ने थोड़ी राहत देते हुए सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति दी है. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश में खाद्य सुरक्षा बनाए रखना भी जरूरी है और निर्यातकों की मांग को भी ध्यान में रखना है.

क्या है सरकार का नया फैसला

सरकार ने 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के अतिरिक्त निर्यात की अनुमति दी है. यह अनुमति पहले से दी गई 5 लाख मीट्रिक टन की छूट के अलावा है. इसका मतलब यह हुआ कि अब कुल 10 लाख मीट्रिक टन तक गेहूं से बने उत्पाद विदेश भेजे जा सकेंगे. यह फैसला विदेश व्यापार महानिदेशालय ((DGFT) की बुधवार को अधिसूचना के जरिए लागू किया गया है.

पाबंदी अभी भी पूरी तरह नहीं हटी

यह समझना जरूरी है कि गेहूं के उत्पादों का निर्यात अभी भी पूरी तरह से खुला नहीं है. सरकार ने सिर्फ सीमित मात्रा में छूट दी है. यानी सामान्य तौर पर निर्यात पर रोक जारी रहेगी, लेकिन तय सीमा के अंदर ही निर्यात किया जा सकेगा.

किन चीजों का होगा निर्यात

यह नई व्यवस्था HS कोड 1101 के अंतर्गत आने वाले उत्पादों पर लागू होगी. इसमें गेहूं का आटा, मैदा, सूजी (रवा), होलमील आटा और अन्य संबंधित उत्पाद शामिल हैं. इन उत्पादों की घरेलू मांग और कीमतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला काफी सोच-समझकर लिया है, ताकि देश में किसी तरह की कमी न हो

कैसे होगा निर्यात

सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस अतिरिक्त निर्यात के लिए कुछ विशेष नियम और प्रक्रियाएं तय की जाएंगी. DGFT द्वारा जल्द ही एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें यह बताया जाएगा कि निर्यातक किस तरह आवेदन करेंगे, किन शर्तों का पालन करना होगा और किस प्रक्रिया के तहत निर्यात किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि निर्यात की अनुमति तो मिल गई है, लेकिन अंतिम प्रक्रिया तय होने के बाद ही इसका पूरा लाभ मिल सकेगा

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया

सरकार ने 2022 से गेहूं के निर्यात पर नियंत्रण रखा हुआ है. उस समय देश में कीमतें बढ़ रही थीं और सरकार चाहती थी कि देश में अनाज की कमी न हो. अब स्थिति थोड़ी बेहतर होने पर सरकार ने संतुलन बनाते हुए यह फैसला लिया है.

एक तरफ देश के लोगों के लिए अनाज की उपलब्धता बनी रहे, वहीं दूसरी तरफ निर्यातकों को भी थोड़ा फायदा मिल सके इसी सोच के साथ यह कदम उठाया गया है.

निर्यातकों को क्या फायदा होगा

इस फैसले से निर्यातकों को काफी राहत मिलेगी. काफी समय से उनके कारोबार पर असर पड़ रहा था, क्योंकि वे विदेशों में ज्यादा माल नहीं भेज पा रहे थे. अब अतिरिक्त कोटा मिलने से उन्हें नए ऑर्डर लेने का मौका मिलेगा.

किसानों के लिए क्या मतलब है

इस फैसले का असर किसानों पर भी पड़ सकता है. अगर निर्यात बढ़ता है, तो बाजार में मांग भी बढ़ेगी. इससे गेहूं के दाम स्थिर रहने या थोड़ा बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे किसानों को फायदा मिल सकता है.

सरकार का संतुलित कदम

सरकार ने पूरी तरह निर्यात खोलने के बजाय सीमित छूट दी है, ताकि देश में कीमतें न बढ़ें और आम लोगों पर बोझ न पड़े. यह एक संतुलित फैसला है, जिसमें सरकार ने दोनों पक्षों किसान और उपभोक्ता का ध्यान रखा है.

अब सबकी नजर DGFT के अगले नोटिस पर है, जिसमें निर्यात से जुड़े नियम बताए जाएंगे. उसके बाद ही यह साफ होगा कि यह फैसला जमीन पर कैसे लागू होगा और इससे बाजार पर क्या असर पड़ेगा.

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Published: 9 Apr, 2026 | 12:55 PM
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