आयरन की कमी में भी नहीं झुका धान! वैज्ञानिकों ने खोजा RA23 का ‘सर्वाइवल सीक्रेट’
धान की फसल में आयरन की कमी अक्सर पत्तियों के पीलेपन और कमजोर बढ़वार की वजह बनती है. लेकिन RA23 किस्म ने इस चुनौती के सामने हार नहीं मानी. NCBS और ICAR-NISST की रिसर्च में पता चला कि RA23 कम आयरन वाली मिट्टी में भी अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर बढ़वार बनाए रखती है.
Rice Variety: धान की खेती में मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों की उपलब्धता फसल की बढ़वार के लिए बेहद अहम होती है. खासकर आयरन की कमी होने पर धान के पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उनकी बढ़वार प्रभावित हो सकती है. लेकिन अब एक शोध ने उम्मीद की नई राह दिखाई है. NCBS और ICAR-NISST के वैज्ञानिकों ने ऐसी धान की किस्म की पहचान की है, जो कम आयरन वाली मिट्टी में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती है.
आयरन की कमी में भी RA23 ने दिखाया दम
नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS) और ICAR-NISST के वैज्ञानिकों ने आयरन की कमी के प्रति धान की अलग-अलग किस्मों की प्रतिक्रिया को समझने के लिए अध्ययन किया. शोध में RA23 और LalatMas नाम की दो धान की किस्मों की तुलना की गई. अध्ययन में RA23 को आयरन की कमी सहन करने वाली किस्म के रूप में पाया गया, जबकि LalatMas इस कमी के प्रति अधिक संवेदनशील रही. यानी जब मिट्टी में पौधे के लिए उपलब्ध आयरन कम हुआ, तब RA23 ने अपनी सामान्य गतिविधियों और बढ़वार को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से बनाए रखा.
दोनों किस्मों ने अपनाया अलग ‘सर्वाइवल प्लान’
आयरन की कमी पौधों के लिए एक तरह का तनाव पैदा करती है. ऐसे हालात में पौधे अपनी जैविक प्रक्रियाओं में बदलाव करके उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं. शोध में दोनों किस्मों में ऐसी प्रतिक्रियाएं देखी गईं, लेकिन उनके तरीके में महत्वपूर्ण अंतर सामने आया. RA23 ने कम आयरन की स्थिति में अपने संसाधनों का अधिक कुशल और संतुलित इस्तेमाल किया. इसके मुकाबले LalatMas में आयरन की कमी का प्रभाव अधिक स्पष्ट दिखाई दिया और पौधे की बढ़वार प्रभावित हुई. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यही अंतर RA23 को कठिन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकता है.
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हजारों जीन की गतिविधियों पर रखी नजर
इस अध्ययन की खास बात यह रही कि वैज्ञानिकों ने दोनों धान की किस्मों में हजारों जीन की गतिविधियों का भी अध्ययन किया. इससे यह समझने में मदद मिली कि आयरन की कमी होने पर पौधे के अंदर आणविक स्तर पर किस तरह की प्रतिक्रियाएं होती हैं. शोध के अनुसार, RA23 में आयरन की कमी के दौरान बहुत तेज आणविक तनाव प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली. इसके बजाय इस किस्म ने उपलब्ध संसाधनों को संतुलित तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता दिखाई. वैज्ञानिकों के लिए यह प्रतिक्रिया आयरन की कमी सहने वाले धान की आनुवंशिक विशेषताओं को समझने में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है.
DSR खेती के लिए क्यों खास है यह खोज?
धान की खेती में डायरेक्ट सीडेड राइस यानी DSR जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ऐसी परिस्थितियों में मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता फसल की स्थापना और शुरुआती बढ़वार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है. आयरन की कमी वाली मिट्टी में ऐसी किस्मों की जरूरत और बढ़ जाती है, जो इस चुनौती को बेहतर तरीके से सहन कर सकें. RA23 और LalatMas की तुलना से मिली जानकारी भविष्य में आयरन की कमी सहने वाली धान की नई किस्में विकसित करने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकती है. शोध में पहचाने गए जीन और पौधों की प्रतिक्रियाओं को समझकर ऐसी किस्में तैयार करने की दिशा में काम किया जा सकता है, जो कम आयरन वाली मिट्टी में भी बेहतर प्रदर्शन करें. इससे कमजोर मिट्टी वाले क्षेत्रों में धान की उत्पादकता बनाए रखने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.