किसान कैसे करें फसल की सिंचाई, सूख गए 137 जलाशय.. भूजल स्तर गिरने से अन्नदाता बेहाल
तमिलनाडु के मदुरै जिले में सिंचाई संकट गहराने से किसान खेती का रकबा घटा रहे हैं. 210 में से 137 सिंचाई टैंक पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि भूजल स्तर भी लगातार गिर रहा है. पानी की कमी के कारण किसानों ने सब्जियों और ज्यादा पानी वाली फसलों की खेती कम कर दी है. अब किसानों को समय पर बारिश की उम्मीद है.
Tamil Nadu News: तमिलनाडु के मदुरै जिले में सिंचाई संकट गहराने के कारण किसान खेती का रकबा घटा रहे हैं. जल संसाधन विभाग (WRD) की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के 210 कृत्रिम जलाशयों में से 137 पूरी तरह सूख चुके हैं. वहीं, भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ 3 कृत्रिम जलाशयों में 76 से 99 फीसदी तक पानी है, जबकि 69 कृत्रिम जलाशयों में 1 से 25 फीसदी ही पानी बचा है. अधिकारियों के मुताबिक, सतही जल की कमी से भूजल रिचार्ज भी प्रभावित हो रहा है. ऐसे में किसानों की निर्भरता अब अनिश्चित बारिश पर बढ़ गई है.
मदुरै जिले में कृत्रिम जलाशयों के सूखने से हालात और गंभीर हो गए हैं. वरिष्ठ WRD अधिकारियों के मुताबिक, करीब दो-तिहाई कृत्रिम जलाशय सूख चुके हैं. इससे भूजल रिचार्ज भी प्रभावित हो रहा है और किसानों की निर्भरता बारिश पर बढ़ गई है. किसान नेता एमपी रमन ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि 50-60 फीसदी से ज्यादा कृत्रिम जलाशय सूखने से कई इलाकों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है. उन्होंने बताया कि सिंचाई कुओं पर निर्भर किसान पानी की कमी से परेशान हैं. कभी भरोसेमंद माने जाने वाले कुओं में भी अब खेती के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचा है.
अब खेतों में पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया
मदुरै के वडिपट्टी ब्लॉक के किसान एन. सेंथिल कुमार ने कहा कि उन्होंने सिंचाई कुओं के पानी से कुछ खेतों में कुरुवई धान की खेती शुरू की थी. लेकिन अब कुओं में पानी तेजी से कम हो रहा है. सिंचाई के बाद दोबारा पानी भरने में कई घंटे लग रहे हैं, जिससे खेतों में पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया है. उसिलमपट्टी तालुक के चेल्लमपट्टी के पारंपरिक चमेली और सब्जी किसान एम. मरुधुपांडियन ने भी पानी की कमी की चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पानी की कमी के कारण किसानों को ज्यादा पानी वाली फसलों का रकबा कम करना पड़ रहा है.
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सिंचाई के अभाव में किसान कम रकबे में कर रहे खेती
किसान ने कहा कि वे चमेली के साथ टमाटर और भिंडी जैसी सब्जियों की खेती करते हैं. पानी की कमी के कारण उन्होंने सब्जियों की खेती का रकबा करीब 50 फीसदी कम कर दिया है, ताकि उपलब्ध पानी का सही इस्तेमाल हो सके और मौजूदा फसलों को बचाया जा सके. किसानों को अब आने वाले हफ्तों में समय पर बारिश होने की उम्मीद है. उनका कहना है कि अच्छी बारिश से जलस्रोतों में पानी भर सकता है और खेती के मौसम में होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है.