जीआई टैग हासिल सोजत मेहंदी की दो नई किस्में विकसित, 19 तरह के पौधों पर शोध के बाद मिली सफलता
Sojat Mehandi GI Tag: विश्व विख्यात सोजत की मेंहदी का रंग अब और अधिक गहरा हो सकेगा. जोधपुर स्थित काजरी अनुसंधान केन्द्र ने मेंहदी के पौधों की दो किस्में विकसित की हैं. जिनमें रंग गहरा होने और पत्तियों का उत्पादन सामान्य पौधों की तुलना में काफी अधिक है.
राजस्थान की सोजत मेहंदी की दो नई किस्मों को कृषि वैज्ञानिकों ने विकसित करने में सफलता पाई है. सोजत मेहंदी को जीआई टैग भी हासिल हो चुका है और इसे दुनियाभर में निर्यात भी किया जाता है. जोधपुर स्थित काजरी अनुसंधान केन्द्र ने मेंहदी के पौधों की दो किस्में विकसित की हैं. जिनमें रंग गहरा होने और पत्तियों का उत्पादन सामान्य पौधों की तुलना में काफी अधिक है. संस्थान की ओर से अब नई किस्म के पौधे किसानों को दिए जा रहे है.
काजरी केंद्र ने तैयार की मेंहदी के पौधों की दो नई किस्में
विश्व विख्यात सोजत की मेंहदी का रंग अब और अधिक गहरा हो सकेगा. जोधपुर स्थित काजरी अनुसंधान केन्द्र ने मेंहदी के पौधों की दो किस्में विकसित की हैं. जिनमें रंग गहरा होने और पत्तियों का उत्पादन सामान्य पौधों की तुलना में काफी अधिक है. इन पौधों में लासोन की मात्रा अधिक पाई गई है. यही तत्व मेहंदी को रंग देता है. इन पौधों में फूल देरी से आते हैं. ऐसे में पत्तियां अधिक समय तक रहती हैं.
ज्यादा पत्तियों के साथ ही 1200 किलो उत्पादन मिलेगा
जोधपुर स्थित काजरी अनुसंधान केन्द्र के बयान में गया है कि दोनों नई किस्मों के पौधों में आने वाली पत्तियों की संख्या ज्यादा रहती है. जबकि, इन पत्तियों की कटाई 3 बार तक की जा सकेगी. जबकि, सामान्य मेहंदी किस्मों में दो बार ही पत्तियों की कटाई की जा सकती है. दोनों नई किस्मों से प्रति हेक्टेयर 1200 किलो से अधिक उत्पादन दर्ज किया गया है.
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19 तरह के पौधों पर शोध के बाद मिली कामयाबी
काजरी केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों ने दोनों नई किस्मों को विकसित करने में कई पौधों पर शोध किए जिसके बाद सफलता मिली है. मेहंदी का रंग अधिक गहरा करने और पत्तियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने 19 तरह के पौधों पर शोध किए हैं. इन पौधों की क्लोनल इवेल्यूएशन का सर्वे किया गया. इस पर दो पौधों में लोसन व पत्तियां अधिक मिलीं. अब ये पौधे काजरी की ओर से किसानों को दिए जा रहे है.
कैसे और कब की जाती है सोजत मेहंदी की खेती
सोजत मेहंदी की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसके लिए हल्की दोमट या रेतीली मिट्टी अच्छी रहती है, जिसमें पानी का जमाव न हो. मेहंदी की बुवाई आमतौर पर जून-जुलाई में मानसून की शुरुआत के साथ की जाती है. इसके पौधे बीज या कटिंग दोनों तरीकों से लगाए जाते हैं, लेकिन अधिकतर किसान नर्सरी में पौधे तैयार करके खेत में रोपाई करते हैं. पौधों के बीच लगभग 1–1.5 मीटर की दूरी रखी जाती है. रोपाई के लगभग 8–10 महीने बाद पौधे की पहली कटाई की जाती है. कटाई के बाद पत्तियों को सुखाकर पीस लिया जाता है और यही मेहंदी पाउडर के रूप में बाजार में बिकती है.