कर्नाटक ने सूखा से बचने के लिए क्रत्रिम बारिश कराने को मंजूरी दी, फसल सिंचाई और पेयजल संकट दूर होगा

Karnataka Allow Artificial Rain Project : कर्नाटक के 101 तालुका को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है. जबकि, कई हिस्सों में बारिश पर निर्भर किसान खेती नहीं कर पाए हैं. वहीं, खरीफ फसलों को सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता के साथ ही हरे चारे का संकट भी खड़ा हो गया है.

नोएडा | Published: 4 Sep, 2026 | 08:23 PM

मॉनसूनी बारिश सामान्य से भी कम रहने से कर्नाटक सूखा का संकट झेल रहा है. कर्नाटक के 101 तालुका को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है. जबकि, कई हिस्सों में बारिश पर निर्भर किसान खेती नहीं कर पाए हैं. वहीं, खरीफ फसलों को सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता के साथ ही हरे चारे का संकट भी खड़ा हो गया है. इन मुसीबतों से किसानों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने क्रत्रिम बारिश कराने का निर्णय लिया है और इसके लिए खर्च की जाने वाली राशि को भी मंजूरी दे दी गई है.

कृत्रिम बारिश परियोजना के लिए फंड को मंजूरी

कर्नाटक सरकार ने राज्य में बारिश की कमी से निपटने और आने वाले महीनों में संभावित जल संकट और सूखे की स्थिति को टालने के लिए शुक्रवार को 28.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से कृत्रिम बारिश परियोजना की शुरुआत की. राज्य सरकार ने कहा है कि सामान्य से कम बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में किसानों, पशुपालकों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े और जलाशयों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया गया है.

विमान से बादलों में रसायन का छिड़काव होगा

जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरयास्वामी ने एक आधिकारिक बयान में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को बेंगलुरू में हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के हवाई अड्डे पर एक विशेष हल्के विमान को हरी झंडी दिखाकर की. इस विमान को आकाश में रसायनों के छिड़काव के लिए तैयार किया गया है. मंत्री ने राष्ट्रीय और राज्य के ध्वज लगे विमान को रवाना करते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से बारिश बढ़ाने और राज्य में पानी की कमी की स्थिति को कम करने में मदद मिलेगी.

क्रत्रिम बारिश की सफलता 35 फीसदी, फिर भी प्रयास तो होगा ही

मंत्री ने कहा कि सरकार ने पानी की कमी को दूर करने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए कृत्रिम बारिश कराने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि पहले के कृत्रिम बारिश प्रयासों की सफलता दर लगभग 35 फीसदी थी. चाहे नुकसान हो या फायदा हमारा एकमात्र उद्देश्य यह है कि लोगों को इस पहल से लाभ मिले. हमें सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ की चिंता नहीं है. राज्य और उसके लोगों के हितों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता है.

सामान्य से कम बारिश से सूखे जैसे हालात

जस संसाधन मंत्री ने कहा कि कर्नाटक में इस साल कम बारिश हुई है और आने वाले दिनों में राज्य को गंभीर सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि इस समय संभावित सूखे की सही सीमा का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. मॉनसून का मौसम इसी महीने खत्म हो जाएगा. अगर तब तक पीने के पानी का पर्याप्त भंडार नहीं किया गया, तो हमें अगले साल जून के आखिर तक पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है.

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि क्रत्रिम बारिश परियोजना के लिए 28.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर प्रशासनिक मंजूरी दी गई है. परियोजना को जल संसाधन विभाग के तहत कर्नाटक नीरावरी निगम लिमिटेड (केएनएनएल) और राजस्व विभाग के तहत कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसएनडीएमसी) के जरिए संयुक्त रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है.

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