Sugar Price Surge: गन्ने से अब चीनी नहीं, इथेनॉल से कमाई चाहते हैं किसान! सरकार से बड़ी मांग
कर्नाटक में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच गन्ना किसानों ने गुड़ यूनिट्स को इथेनॉल बनाने की अनुमति देने की मांग उठाई है. किसानों का कहना है कि इससे अतिरिक्त गन्ने से कमाई बढ़ेगी और चीनी मिलों पर निर्भरता घटेगी. इथेनॉल की खरीद कीमत करीब 65 रुपये प्रति लीटर है.
चीनी की बढ़ती कीमतों और गन्ने के इथेनॉल उत्पादन की ओर जाने को लेकर बहस के बीच कर्नाटक में किसानों ने गुड़ बनाने वाली स्थानीय यूनिट्स को इथेनॉल उत्पादन की अनुमति देने की मांग तेज कर दी है. किसानों का कहना है कि अगर गुड़ यूनिट्स को तकनीक और जरूरी अनुमति दी जाए, तो इससे गन्ना उत्पादकों को चीनी मिलों पर निर्भरता कम करने और अतिरिक्त आमदनी का रास्ता मिल सकता है. वहीं, खाद्य उद्योग ने बढ़ती चीनी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
चीनी महंगी होने पर बढ़ी इथेनॉल नीति की चर्चा
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच ऐसी चर्चाएं सामने आई हैं कि गन्ने का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन की ओर जाने से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता पर दबाव पड़ रहा है. हालांकि, केंद्र सरकार ने इस सुझाव को खारिज किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह गन्ने का इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्जन है. इसके बावजूद किसान संगठनों और खाद्य उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का अनुपात बढ़ाने की सरकारी नीति घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है. इसी बीच किसानों ने इथेनॉल उत्पादन के मौजूदा ढांचे में स्थानीय गुड़ इकाइयों को भी शामिल करने की मांग उठाई है.
किसानों को चीनी मिलों से मिले विकल्प
कर्नाटक के गन्ना किसान लंबे समय से अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिलने की शिकायत करते रहे हैं. अब उन्हें इथेनॉल उत्पादन में एक नया अवसर दिखाई दे रहा है. राज्य के गन्ना उत्पादक संगठन के अध्यक्ष कुरुबुर शांताकुमार ने मांग की है कि बड़े चीनी कारखानों तक इथेनॉल उत्पादन का लाभ सीमित नहीं रहना चाहिए. उनका कहना है कि स्थानीय गुड़ यूनिट्स को इथेनॉल बनाने के लिए जरूरी तकनीक और अनुमति दी जानी चाहिए. इससे किसान अपनी अतिरिक्त गन्ना उपज का इस्तेमाल कर आय बढ़ा सकेंगे और चीनी मिलों पर उनकी निर्भरता भी कम हो सकती है.
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65 रुपये प्रति लीटर तक खरीद, बढ़ सकती है किसानों की आय
किसान संगठनों के मुताबिक गुड़ इकाइयों को इथेनॉल बनाने की अनुमति मिलने पर उत्पादित इथेनॉल का इस्तेमाल घरों में पर्यावरण अनुकूल ईंधन के तौर पर किया जा सकता है. इसके अलावा किसान इसे अपने वाहन और ट्रैक्टरों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं. शांताकुमार के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इथेनॉल को करीब ₹65 प्रति लीटर की खरीद कीमत पर लेती हैं. ऐसे में किसानों को अपनी अतिरिक्त उपज से बेहतर आमदनी मिल सकती है. उन्होंने चीनी मिलों द्वारा किसानों को भुगतान में देरी और विवादों का भी मुद्दा उठाया.
15 हजार से 50 हजार हो सकती हैं गुड़ यूनिट्स
कर्नाटक में हर साल करीब 600 लाख मीट्रिक टन गन्ने का उत्पादन होता है. इसमें से केवल 30 से 40 लाख मीट्रिक टन गन्ना स्थानीय गुड़ इकाइयों तक पहुंचता है, जबकि बाकी गन्ना चीनी मिलों में जाता है. किसान संगठन का दावा है कि अगर गुड़ इकाइयों को एथेनॉल उत्पादन की अनुमति मिलती है, तो राज्य में ऐसी इकाइयों की संख्या मौजूदा करीब 15,000 से बढ़कर 50,000 तक पहुंच सकती है. किसानों का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन का लाभ छोटे और स्थानीय स्तर के गन्ना उत्पादकों तक पहुंचाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है. हालांकि, चीनी की कीमतों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा और गुड़ इकाइयों को इथेनॉल उत्पादन की अनुमति देने का फैसला सरकार कब करती है, इस पर आगे की नीति महत्वपूर्ण होगी.