नासिक में खरीफ प्याज की रोपाई पिछड़ी, अब तक सिर्फ 500 हेक्टेयर में बुवाई.. क्या बढ़ेंगे दाम?
महाराष्ट्र के नासिक में मॉनसून की देरी से खरीफ प्याज की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. अब तक सिर्फ 500 हेक्टेयर में रोपाई हुई है, जबकि सामान्य क्षेत्र 30,000 हेक्टेयर है. देरी से अक्टूबर में नई आवक प्रभावित होगी. बड़ी मात्रा में प्याज नवंबर मध्य से मंडियों में आने की उम्मीद है, जबकि नियमित सप्लाई दिसंबर से शुरू होने की संभावना है.
मॉनसून की देरी से महाराष्ट्र के नासिक में खरीफ प्याज की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. इससे आने वाले महीनों में प्याज की सप्लाई में अस्थायी कमी की आशंका बढ़ गई है. ऐसे में कीमतों में और इजाफा हो सकता है. कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, नासिक में अब तक सिर्फ करीब 500 हेक्टेयर में खरीफ प्याज की रोपाई हो पाई है, जबकि आमतौर पर जिले में करीब 30,000 हेक्टेयर में इसकी खेती होती है. इस समय तक करीब आधी रोपाई पूरी हो जाती है, लेकिन कम बारिश के कारण अब तक सिर्फ 2 फीसदी क्षेत्र में ही काम हो पाया है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रोपाई में देरी का असर फसल की कटाई और मंडियों में नई आवक पर पड़ेगा. आमतौर पर खरीफ प्याज की आवक अक्टूबर के मध्य से शुरू हो जाती है, लेकिन इस साल बड़ी मात्रा में प्याज नवंबर के मध्य से आने की उम्मीद है. नियमित सप्लाई दिसंबर की शुरुआत से ही शुरू होने की संभावना है.
अक्टूबर में प्याज की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है
कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खरीफ प्याज की फसल देर से आने पर अक्टूबर में प्याज की अस्थायी कमी हो सकती है. अगर तब तक भंडारण किए गए गर्मी के प्याज का स्टॉक खत्म हो गया और नई खरीफ फसल पर्याप्त मात्रा में बाजार में नहीं पहुंची, तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है. एपीएमसी के एक अधिकारी के मुताबिक, आमतौर पर मई से अक्टूबर के मध्य तक बाजार में नई प्याज की फसल नहीं आती है. इस दौरान मांग पूरी करने के लिए स्टॉक किए गए गर्मी के प्याज का इस्तेमाल होता है. इस साल खरीफ प्याज की आवक करीब एक महीने देर से होने की उम्मीद है. ऐसे में अक्टूबर में प्याज की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है.
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बेमौसम बारिश से फसल की गुणवत्ता प्रभावित
नासिक में प्याज की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. गर्मियों की प्याज की कटाई के दौरान हुई बेमौसम बारिश से फसल की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता प्रभावित हुई थी. बाजार अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, नासिक में रखे गए गर्मी के प्याज का करीब 65 फीसदी स्टॉक पहले ही खत्म हो चुका है. अब केवल 7-8 लाख टन प्याज का स्टॉक बचा है. अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा स्टॉक सितंबर के अंत या अक्टूबर के मध्य तक ही चल सकता है. अगर तब तक खरीफ प्याज बाजार में पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचा, तो 3-4 हफ्ते तक सप्लाई में कमी हो सकती है. इससे प्याज की कीमतों पर भी बढ़ने का दबाव बन सकता है.
नासिक देश के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में शामिल
नासिक देश के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और घरेलू बाजार में इसकी सप्लाई में बड़ी भूमिका है. हाल की बारिश के बाद अब यह देखना अहम होगा कि प्याज की रोपाई कितनी तेजी से बढ़ती है. हालांकि, अधिकारियों को अक्टूबर में नई खरीफ फसल की पर्याप्त आवक से पहले सप्लाई की कमी की चिंता बनी हुई है.