लीची पर मौसम का कहर, फलों के फटने से 60 फीसदी तक नुकसान का खतरा, अभी करें एक्सपर्ट के बताए ये उपाय
Litchi Farming Tips: धूप-बारिश के लगातार बदलते मौसम के कारण लीची के फलों में क्रैकिंग की समस्या बढ़ रही है, जिससे 20-60 फीसदी तक नुकसान हो सकता है. सही सिंचाई, बोरॉन-कैल्शियम का उपयोग, मल्चिंग और बैगिंग जैसी तकनीकों से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है.
Litchi Fruit Cracking: देश में बदलते मौसम का असर अब फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है. खासकर लीची की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण बन गया है. कभी तेज धूप तो कभी अचानक बारिश, इस तरह के मौसम के उतार-चढ़ाव से लीची के फलों में फटने (क्रैकिंग) की समस्या तेजी से बढ़ रही है. अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, लीची में फल फटने के कई कारण होते हैं. उन्होंने बताया कि, अगर ऐसे में किसान समय रहते सही प्रबंधन नहीं करते हैं तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
लीची में क्रैकिंग क्या है और क्यों होती है?
लीची के फलों का फटना कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक तरह की प्राकृतिक समस्या है, जो आमतौर पर तब होती है जब फल पूरी तरह पकने के आखिरी चरण में होते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण मौसम का अचानक बदलना या असंतुलन होना होता है.
प्रमुख कारण:
- दिन में तेज गर्मी और रात में ठंडक
- अचानक बारिश या मौसम में बदलाव
- लंबे समय तक सूखा और फिर अचानक ज्यादा पानी
- फल की बाहरी त्वचा और अंदरूनी ग्रोथ में असंतुलन
इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी, खासकर बोरॉन और कैल्शियम, भी इस समस्या को बढ़ावा देती है. इनकी कमी से फल की त्वचा कमजोर हो जाती है और वह आसानी से फटने लगती है.
किसानों को कितना होता है नुकसान?
लीची के फटने की समस्या किसानों के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित होती है. इससे उत्पादन में करीब 20 फीसदी से 60 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है, वहीं फलों की क्वालिटी भी खराब हो जाती है, जिसके कारण बाजार में उन्हें सही दाम नहीं मिल पाता. इतना ही नहीं, जब क्वालिटी प्रभावित होती है तो लीची का निर्यात भी घट जाता है, जिससे किसानों की आमदनी पर सीधा और गंभीर असर पड़ता है.
सही सिंचाई प्रबंधन है सबसे जरूरी
लीची की फसल में नमी का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है.
- हर 5-7 दिन में हल्की सिंचाई करें
- मिट्टी को पूरी तरह सूखने न दें
- लंबे सूखे के बाद अचानक ज्यादा पानी न दें
इससे फलों के फटने की समस्या काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती है.
पोषण प्रबंधन से मिलेगा बेहतर परिणाम
वैज्ञानिकों के अनुसार, सही पोषण देने से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है.
- बोरॉन का छिड़काव (0.2-0.4 फीसदी) फल की त्वचा को मजबूत बनाता है
- कैल्शियम की पूर्ति से फल का विकास संतुलित रहता है
समय पर पोषक तत्व देने से न केवल क्रैकिंग कम होती है, बल्कि उत्पादन भी बेहतर मिलता है.
मल्चिंग और बैगिंग तकनीक का करें उपयोग
आधुनिक खेती में कुछ तकनीकें किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो रही हैं. मल्चिंग करने से मिट्टी की नमी बनी रहती है और तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे पौधों पर मौसम का असर कम पड़ता है.
वहीं बैगिंग तकनीक अपनाने से फलों को सीधे धूप से बचाया जा सकता है और तेज गर्मी का असर भी कम होता है. इन तरीकों को सही तरीके से अपनाने पर फलों के फटने की समस्या को करीब 30-40 फीसदी तक कम किया जा सकता है.
आधुनिक तकनीक से होगा फायदा
आज के समय में किसान नई तकनीकों का सहारा लेकर अपने नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं. ड्रोन के जरिए खेतों में आसानी से और सही तरीके से छिड़काव किया जा सकता है, वहीं मौसम ऐप की मदद से समय-समय पर मौसम की सटीक जानकारी मिलती रहती है. इसके अलावा स्मार्ट सिंचाई प्रणाली अपनाने से पानी का सही उपयोग होता है और फसल को जरूरत के अनुसार सिंचाई मिलती है. इन सभी उपायों से किसानों के लिए समय पर सही निर्णय लेना आसान हो जाता है और फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.