गेहूं फसल कटाई पर सरकार का नया आदेश, उल्लंघन पर भरने पड़ेंगे 15 हजार रुपये और FIR भी होगी  

पराली प्रबंधन और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद उज्जैन, सतना, भोपाल समेत अन्य जिलों में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में किसानों और कंबाइन हार्वेस्टर मशीन संचालकों को जागरूक किया जा रहा है. इसी कड़ी में पराली प्रबंधन के लिए उज्जैन विकासखंड में हार्वेस्टर संचालकों को नियम उल्लंघन नहीं करने की चेतावनी दी गई है.

नोएडा | Updated On: 8 Mar, 2026 | 12:00 PM

रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की कटाई को लेकर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से किसानों और कृषि यंत्र संचालकों को निर्देश जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि बिना स्ट्रॉ रीपर के कंबाइन हार्वेस्टर से फसल की कटाई नहीं होगी. स्ट्रॉ रीपर से पराली का झंझट खत्म हो जाता है. लेकिन, बड़ी संख्या में किसान बिना स्ट्रॉ रीपर के फसल कटाई करा लेते या कंबाइन हार्वेस्टर संचालक ऐसा कर देते हैं. ऐसी स्थिति पाए जाने पर एफआईआर के साथ ही 15 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है.

पराली प्रबंधन और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद उज्जैन, सतना, भोपाल समेत अन्य जिलों में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में किसानों और कंबाइन हार्वेस्टर मशीन संचालकों को जागरूक किया जा रहा है. इसी कड़ी में उज्जैन नरवाई प्रबंधन (पराली प्रबंधन) के लिए उज्जैन विकासखंड में हार्वेस्टर संचालकों की बैठक आयोजित की गई.

उज्जैन विकासखंड में हार्वेस्टर संचालकों को कलेक्टर ने दिए निर्देश

रबी सीजन में गेहूं फसल की कटाई के बाद नरवाई ना जलाने के लिए उचित नरवाई प्रबंधन के लिए कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देशन में विकासखंड उज्जैन में एसडीएम कृतिका भीमावत की अध्यक्षता में उज्जैन विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सभी हार्वेस्टर संचालकों, ऑपरेटर की बैठक जनपद पंचायत के सभा कक्ष में हुई. हार्वेस्टर संचालकों को नरवाई प्रबंधन के लिए शासन की कार्य योजना से सभी को विस्तार से अवगत कराया गया और उन्हें बिना स्ट्रा रीपर के गेहूं ना काटने की चेतावनी दी गई.

हार्वेस्टर संचालकों और किसानों को चेतावनी दी

हार्वेस्टर संचालकों को बताया गया कि हार्वेस्टर मशीन के साथ स्ट्रा रीपर अनिवार्य रूप से इस्तेमाल किया जाय, साथ ही सचेत किया गया कि बगैर स्ट्रा रीपर के गेहूं कटाई करने पर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सहित कडी दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है. हार्वेस्टर संचालकों ने कहा कि उनके द्वारा अपने स्तर से भी किसानों को बताया जाएगा की नरवाई ना जलाएं इससे पर्यावरण के साथ-साथ जमीन का भी नुकसान हो रहा है.

15 हजार रुपये तक जुर्माना और एफआईआर का प्रावधान

किसान अकसर खेत में गेहूं की बाली तो कटवा लेते हैं लेकिन पौधे का तना पेड़ में ही खड़ा रहता है. इसके बाद किसान उसमें आग लगा देते हैं. इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और खेत की मिट्टी की ताकत भी कमजोर होती है. मध्य प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार नरवाई (पराली) जलने की स्थिति में किसान या हार्वेस्टर संचालक के खिलाफ 2,500 से 15,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. जबकि, एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है.
Published: 8 Mar, 2026 | 11:57 AM

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