महिला किसानों ने जीता खेती के मालिकाना हक का मामला, महाराष्ट्र सरकार ने ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी 

महाराष्ट्र कैबिनेट ने महिला किसानों को मान्यता देने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाने के लिए एक ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है. अब इस बिल को लागू कराने के लिए विधानसभा में पास कराया जाएगा.

नई दिल्ली | Updated On: 26 Jun, 2026 | 03:24 PM

खेती की जमीन के मालिकाना हक और खुद को किसान के रूप में पहचान पाने के लिए लड़ाई लड़ रही महिलाओं को जीत हासिल हुई है. महाराष्ट्र सरकार ने  महाराष्ट्र महिला किसानों को मान्यता देने वाले ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही राजस्व दस्तावेजों में महिला किसानों को मालिकाना हक मिलेगा और उन्हें किसान कल्याणकारी योजना का लाभ और सब्सिडी भी मिलेगी. अभी तक राज्य में पुरुषों को ही जमीन या कृषि भूमि का मालिकाना हक था और महिलाओं को इससे दूर रखा गया था.

कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में पेश होगा बिल

महाराष्ट्र कैबिनेट ने महिला किसानों को मान्यता देने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाने के लिए एक ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है. इसके तहत जमीन की मिल्कियत चाहे किसी के भी पास हो, महिला किसानों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा. महिलाओं को खेत का मालिक और खेतिहर मजदूर के रूप में पहचान मिलेगी. अभी तक महिलाओं को न किसान माना जा रहा था और न ही उन्हें खेतिहर मजदूर की श्रेणी में रखा गया था. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को राज्य विधानसभा के चल रहे मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा.

पहचान का प्रमाण बनेगा महिला किसान सर्टिफिकेट

महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक 2026 के ड्राफ्ट में महिला किसान प्रमाण पत्र का प्रस्ताव है. यह एक आधिकारिक पहचान दस्तावेज के तौर पर काम करेगा, जिससे लाभार्थी सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, संस्थागत वित्त और बाजार सहायता का लाभ उठा सकेंगे. इससे खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों जैसे डेयरी और मछली पालन करने वाली जमीन विहीन महिलाओं को संस्थागत लोन, सब्सिडी और कृषि विस्तार सेवाओं का लाभ मिल सकेगा. कृषि भूमि दस्तावेजों में मालिक के रूप में महिलाओं का नाम दर्ज होगा और भूमि मालिक नहीं होने पर उन्हें खेतिहर मजदूर की श्रेणी में रखा जाएगा. इससे किसानों के लिए चलाई जा रहीं तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाएं ले सकेंगी.

कृषि और किसान की परिभाषा का विस्तार

ड्राफ्ट में कृषि और किसान की परिभाषा का विस्तार किया गया है. इसमें खेती और उससे जुड़ी कई तरह की गतिविधियों के साथ-साथ किराए पर खेती करने वाले, बटाईदार, खेतिहर मजदूर और खेती से जुड़े मौसमी प्रवासी मजदूरों को भी शामिल किया गया है. इस बिल का मकसद खेती में काम करने वाली महिलाओं, खासकर जमीन-विहीन किसानों और डेयरी, मछली पालन, पोल्ट्री, पशुपालन, रेशम पालन, मधुमक्खी पालन और छोटे वन उत्पादों के संग्रह जैसे क्षेत्रों में लगी महिलाओं को लंबे समय से मिल रही अनदेखी को दूर करना है.

ये बिल महिला किसानों को उनका हक और सम्मान देगा- चित्रा किशोर वाघ

महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य (MLC) और भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष चित्रा किशोर वाघ ने विधानसभा में कहा कि महिला किसान विधेयक उन महिलाओं को सम्मान देगा, जो खेती-बाड़ी में अहम भूमिका निभाती हैं. ‘महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक’ के जरिए लाखों महिलाओं को किसान का कानूनी दर्जा मिलेगा और उन्हें लोन, सब्सिडी, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा. महिला सशक्तिकरण की दिशा में महाराष्ट्र का यह ऐतिहासिक कदम एक मील का पत्थर साबित होगा,

Published: 26 Jun, 2026 | 03:11 PM

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