मक्का में घुसा खतरनाक कीड़ा! पत्तियां छलनी, फसल बचानी है तो तुरंत करें ये काम
मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप किसानों की चिंता बढ़ा रहा है. शुरुआत में पत्तियों पर छोटे छेद दिखाई देते हैं, लेकिन प्रकोप बढ़ने पर पत्तियां कट-फट जाती हैं. कृषि विभाग के अनुसार, समय रहते पहचान और सही नियंत्रण उपाय अपनाकर फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.
Maize Crop: मक्का की फसल में इन दिनों फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है. यह कीट मक्का के पौधों की पत्तियों और कोमल हिस्सों को नुकसान पहुंचाता है. शुरुआती अवस्था में इसका प्रकोप पहचानना आसान होता है, लेकिन समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो कीट तेजी से फैलकर फसल की बढ़वार और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है. कृषि विभाग के अनुसार, किसानों को खेत की नियमित निगरानी करते हुए शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही बचाव के उपाय अपनाने चाहिए.
पत्तियों पर दिखते हैं शुरुआती लक्षण
फॉल आर्मीवर्म का हमला सबसे पहले मक्का की पत्तियों पर दिखाई देता है. शुरुआत में पत्तियों पर छोटे-छोटे छेद नजर आते हैं. जैसे-जैसे कीट का प्रकोप बढ़ता है, पत्तियां कटने और फटने लगती हैं. कई बार पत्तियों पर अनियमित आकार के छेद और खुरचने जैसे निशान भी दिखाई देते हैं. पौधे के बीच के कोमल हिस्से में भी इल्ली मौजूद हो सकती है. इसलिए किसानों को केवल बाहरी पत्तियों को देखकर संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि पौधे के बीच वाले हिस्से की भी जांच करनी चाहिए.
बढ़वार रोककर उत्पादन पर डालता है असर
फॉल आर्मीवर्म की इल्ली मक्का के कोमल हिस्सों को खाती है. लगातार प्रकोप रहने पर पौधे की नई पत्तियों को नुकसान पहुंचता है और उसकी सामान्य बढ़वार प्रभावित होने लगती है. गंभीर प्रकोप की स्थिति में पौधे कमजोर हो सकते हैं, जिससे आगे चलकर भुट्टे के विकास और दाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है. कृषि विभाग के अनुसार, शुरुआती स्तर पर कीट की पहचान करना फसल को बड़े नुकसान से बचाने में सबसे महत्वपूर्ण कदम है.
खेत की नियमित निगरानी जरूरी
किसानों को मक्का के खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए. खासकर शुरुआती अवस्था में पौधों की पत्तियों और बीच के हिस्से को ध्यान से देखना जरूरी है. जिन पौधों पर फॉल आर्मीवर्म के लक्षण दिखाई दें, उनकी पहचान कर प्रभावित हिस्सों की जांच करनी चाहिए. खेत में खरपतवार की अधिकता न होने दें और फसल की उचित देखभाल करें. नियमित निगरानी से कीट के शुरुआती प्रकोप का पता लगाया जा सकता है और समय रहते नियंत्रण किया जा सकता है.
प्रकोप बढ़े तो कृषि विभाग की सलाह लें
अगर खेत में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है तो किसान बिना जानकारी के किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल न करें. कृषि विभाग के अनुसार, कीट की स्थिति और फसल की अवस्था के आधार पर अनुशंसित कीटनाशक का ही निर्धारित मात्रा में प्रयोग करना चाहिए. दवा का छिड़काव करते समय लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना जरूरी है. साथ ही, एक ही रसायन का बार-बार इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. समय पर निगरानी, सही पहचान और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार नियंत्रण उपाय अपनाकर मक्का की फसल को फॉल आर्मीवर्म से होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है.