मक्का को चौपट कर रहा खतरनाक फॉल आर्मीवर्म, फसल बचाने के लिए किसान अभी करें ये काम

मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म का खतरा बढ़ रहा है. यह कीट पौधे की गोभ और पत्तियों को नुकसान पहुंचाकर बढ़वार रोक सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने किसानों को खेत की नियमित निगरानी और समय पर नियंत्रण की सलाह दी है, ताकि पैदावार को नुकसान से बचाया जा सके.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 1 Sep, 2026 | 06:00 AM

मक्का की फसल पर इन दिनों फॉल आर्मीवर्म यानी इल्ली का खतरा बढ़ गया है. यह कीट मक्का के पौधों की बढ़वार को रोकने के साथ फसल की पैदावार पर भी असर डाल सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को इस समय खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही बचाव के उपाय शुरू कर देने चाहिए. मक्का की कई फसलें इस समय 50 दिन से ज्यादा की हो चुकी हैं. कई जगह पौधों में चौर निकलने लगे हैं और कुछ खेतों में भुट्टे भी आने लगे हैं. इसी समय फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप फसल के लिए परेशानी बढ़ा सकता है. यह इल्ली मुख्य रूप से पौधे की गोभ और नई पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है. ज्यादा प्रकोप होने पर पौधे की बढ़वार रुक सकती है और भुट्टा देर से आने के कारण उत्पादन में कमी हो सकती है.

खेत में इन जगहों पर जरूर करें निगरानी

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को मक्का के पौधों  की गोभ, नई पत्तियों और आसपास की जगह को ध्यान से देखना चाहिए. अगर पत्तियों पर इल्ली के खाने के निशान, छेद या इल्ली दिखाई दे तो इसे शुरुआती प्रकोप मानकर तुरंत कदम उठाना चाहिए. उन्होंने बताया कि फॉल आर्मीवर्म तेजी से फैलने वाला कीट है. इसलिए खेत में कुछ पौधों पर समस्या दिखने के बाद उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. नियमित निगरानी से इल्ली को शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सकता है और फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.

छोटी फसल में स्प्रे, बड़ी फसल में ड्रोन से छिड़काव

प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर मक्का की फसल  छोटी है तो किसान सामान्य स्प्रे पंप की मदद से कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं. वहीं अगर फसल काफी बड़ी हो गई है तो ड्रोन से छिड़काव करना सुविधाजनक हो सकता है. इससे बड़े खेत में कम समय में दवा का छिड़काव किया जा सकता है. अगर खेत में इल्ली की संख्या कम है और कीट छोटी अवस्था में है, तो कुछ मामलों में पौधे की गोभ में रेत डालने से भी शुरुआती नियंत्रण में मदद मिल सकती है. हालांकि ज्यादा प्रकोप होने पर उचित कीटनाशक का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है.

200 लीटर पानी में बनाएं स्प्रे का घोल

फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण  के लिए Emamectin Benzoate 5 SG का इस्तेमाल किया जाता है. दिए गए कृषि सुझाव के अनुसार इसे करीब 1 ग्राम प्रति 2.5 लीटर पानी की दर से मिलाया जा सकता है. एक एकड़ फसल के लिए लगभग 200 लीटर पानी में घोल तैयार करके छिड़काव किया जा सकता है. इसके अलावा Chlorantraniliprole 18.5 SC और Spinetoram 11.7 SC जैसे कीटनाशकों का भी फॉल आर्मीवर्म नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इनकी मात्रा उत्पाद के लेबल और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही तय करनी चाहिए.

दवा पौधे की गोभ तक पहुंचना जरूरी

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने बताया कि फॉल आर्मीवर्म अक्सर मक्का की गोभ में छिपकर नुकसान करता है. इसलिए दवा का छिड़काव करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि स्प्रे पौधे की गोभ तक अच्छी तरह पहुंचे. किसानों को बिना जानकारी के दवा की मात्रा बढ़ाकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. कीटनाशक का छिड़काव  करते समय उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना जरूरी है. खेत की नियमित निगरानी, समय पर पहचान और सही तरीके से उपचार अपनाकर फॉल आर्मीवर्म से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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Published: 1 Sep, 2026 | 06:00 AM