Maize Cultivation Tips: किसान भाई धान की कटाई के बाद करें मक्का की खेती, एक मल्टीपरपज फसल होने के नाते इसका उपयोग पशुओं के चारे, पोल्ट्री फीड और मानव भोजन में किया जाता है. इस फसल को किसान साल में तीन बार बो सकते है. किसान हाई यील्ड की किस्मों का उपयोग करके 30-40 क्विंटल प्रति एकड उपज और आय में इज़ाफा कर सकते है.
Maize Cultivation: सर्दियों के साथ रबी सीजन की शुरूआत हो गई है. अब किसान रबी सीजन की फसल के लिए खेतों की तैयारी में जुट गए है. एक्सपर्ट्स ने बताया कि, धान की कटाई के बाद मक्का की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. मक्का एक मल्टीपरपज फसल है, जिसका इस्तेमाल पशुओं के चारे, पोल्ट्री फीड और खाने-पीने से संबंधी कई उत्पाद जैसे कॉर्न फ्लेक्स, स्टार्च, तेल और स्वीटनर आदि बनाने में किया जाता है. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. उन्होंने कहा कि मक्का शुगर के मरीजों के लिए भी अच्छा विकल्प है क्योंकि इसमें फाइबर ज्यादा होती है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है.
मिट्टी और जलवायु
एक्सपर्ट्स ने बताया कि मक्का की खेती साल में तीन बार कर सकते हैं. इसकी बुवाई फरवरी-मार्च, जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर के महीने में की जाती है. मक्का उगाने के लिए बलुई दोमट या जलोढ़ मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसमें जलनिकासी अच्छे से हो और पीएच मान 5.5-7.5 के बीच होना चाहिए. मक्के की खेती के लिए गर्म और धूप वाला मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस मौसम के लिए बायो-9544, पीपी-333, अंकुर भास्कर और बादशाह-81 जैसी किस्में बेहतर मानी जाती हैं. एक एकड़ खेत में 8 से 10 किलो बीज काफी होता है.
खाद प्रबंधन से पैदावार होगी दोगुनी
मक्के के खेत में खाद प्रबंधन भी आवश्यक होता है. एक एकड़ खेत के लिए 3–5 टन कम्पोस्ट, 75 किलो यूरिया, 10 किलो पोटाश और 10 किलो जिंक सल्फेट डालना चाहिए. अगर किसान डीएपी का इस्तेमाल करते हैं तो 45 किलो डीएपी प्रति एकड़ डाल सकते हैं. पैदावार में बढ़ोतरी के लिए सही समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और रोग नियंत्रण करके अच्छी उपज पाप्त कर सकते हैं और पैदावार को दोगुना बढ़ा सकते हैं.
बढ़ी बाजार में खूब डिमांड
मक्के की खेती से किसान लगभग 30–40 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज ले सकते हैं. इससे घरेलू जरूरत के साथ-साथ बाजार में बेचकर अच्छी कमाई भी हो सकती है. मक्का की मांग स्थानीय बाजारों से लेकर बड़ी-बड़ी मंडियों तक बनी रहती है, क्योंकि इसका उपयोग पशुपालन और पोल्ट्री उद्योग में किया जाता है. इसलिए किसानों को इसके अच्छे दाम मिल जाते हैं.
फसल चक्र अपनाने से मिट्टी बनेगी उपजाऊ
कृषि विभाग का कहना है कि अगर किसान धान-मक्का फसल चक्र अपनाते हैं, तो मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ रहती है और खेत का सही उपयोग होता है. विभाग का अनुमान है कि आने वाले सालों में मक्का की खेती का क्षेत्र और उत्पादन दोनों बढ़ेंगे. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है, कि वे मक्का की खेती वैज्ञानिक तरीके से करें ताकि कम खर्च में ज्यादा उत्पादन और लाभ मिल सके.