आम पर बढ़ा कीट और रोगों का खतरा, अपनाएं बिहार कृषि विभाग के ये टिप्स, वरना पूरी फसल हो सकती है बर्बाद!

Mango Farming Tips: बिहार कृषि विभाग की सलाह के अनुसार, आम के बाग को मधुआ कीट, दहिया कीट और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी समस्याओं से बचाने के लिए सही समय पर छिड़काव और अनुशंसित कीटनाशक और फफूंदनाशक का उपयोग जरूरी है. यह उपाय किसानों की फसल को सुरक्षित रखते हैं और उत्पादन व बाजार मूल्य बढ़ाते हैं.

नोएडा | Published: 5 Apr, 2026 | 11:07 AM

Mango Pest Control: आम के बाग में फूलों और फलों की खुशबू तो सबको भाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही बाग कीट और रोगों के जाल में फंस सकता है? मधुआ कीट, दहिया कीट और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी समस्याएं सिर्फ आम की सुंदरता नहीं छीनतीं, बल्कि किसानों की मेहनत और आम की पैदावार को भी प्रभावित कर सकती हैं.

बिहार कृषि विभाग की सलाह के अनुसार, सही समय पर छिड़काव और उचित कीटनाशक एवं फफूंदनाशक का उपयोग करना बेहद जरूरी है. इससे न केवल आम के पेड़ सुरक्षित रहते हैं, बल्कि फसल की गुणवत्ता और बाजार में कीमत भी बेहतर होती है.

छिड़काव का सही समय

आम के पेड़ पर कीट और रोगों से सुरक्षा के लिए तीन चरणों में छिड़काव करना आवश्यक है:

पहला छिड़काव:

दूसरा छिड़काव:

तीसरा छिड़काव:

अनुशंसित कीटनाशक और फफूंदनाशक

किसानों को खेती में अलग‑अलग कीट और फफूंद (रोग) से बचाव के लिए सरकारी या विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए कीटनाशक और फफूंदनाशक दवाइयां ही इस्तेमाल करनी चाहिए. इनका उपयोग हमेशा निर्धारित मात्रा और तरीका के अनुसार करना चाहिए ताकि फसल को नुकसान न पहुंचे और दवा असरदार रहे.

कीटनाशक:

फफूंदनाशक:

पत्ती रोग निवारक: अल्फा नेफथाइल एसिटिक एसिड 4.5 प्रतिशत एसएल: 4 मिली प्रति 10 लीटर पानी

छिड़काव करते समय सावधानियां

मंजर के समय अगर पेड़ पर बुंदा‑बादी दिखाई दे, तो घुलनशील सल्फर, कार्बेन्डाजिम या हेक्साकोनाजोल का छिड़काव अवश्य करना चाहिए. कीटनाशक का घोल तैयार करते समय किसी भी स्टिकर का इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि दवा अच्छी तरह से चिपके और असरदार रहे. फलों और मंजर को गिरने से बचाने के लिए दूसरे और तीसरे छिड़काव में कीटनाशक के साथ अल्फा नेफथाइल एसिटिक एसिड 4.5 प्रतिशत को 10 लीटर पानी में मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए.

किसान के लिए लाभ

सही समय पर छिड़काव और अनुशंसित रसायनों का प्रयोग करने से:

अधिक जानकारी के लिए किसान अपने सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण अधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी या कृषि समन्वयक से संपर्क कर सकते हैं.

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