आम पर बढ़ा कीट और रोगों का खतरा, अपनाएं बिहार कृषि विभाग के ये टिप्स, वरना पूरी फसल हो सकती है बर्बाद!
Mango Farming Tips: बिहार कृषि विभाग की सलाह के अनुसार, आम के बाग को मधुआ कीट, दहिया कीट और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी समस्याओं से बचाने के लिए सही समय पर छिड़काव और अनुशंसित कीटनाशक और फफूंदनाशक का उपयोग जरूरी है. यह उपाय किसानों की फसल को सुरक्षित रखते हैं और उत्पादन व बाजार मूल्य बढ़ाते हैं.
Mango Pest Control: आम के बाग में फूलों और फलों की खुशबू तो सबको भाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही बाग कीट और रोगों के जाल में फंस सकता है? मधुआ कीट, दहिया कीट और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी समस्याएं सिर्फ आम की सुंदरता नहीं छीनतीं, बल्कि किसानों की मेहनत और आम की पैदावार को भी प्रभावित कर सकती हैं.
बिहार कृषि विभाग की सलाह के अनुसार, सही समय पर छिड़काव और उचित कीटनाशक एवं फफूंदनाशक का उपयोग करना बेहद जरूरी है. इससे न केवल आम के पेड़ सुरक्षित रहते हैं, बल्कि फसल की गुणवत्ता और बाजार में कीमत भी बेहतर होती है.
छिड़काव का सही समय
आम के पेड़ पर कीट और रोगों से सुरक्षा के लिए तीन चरणों में छिड़काव करना आवश्यक है:
पहला छिड़काव:
- यह आम के मंजर आने से पहले किया जाता है.
- इसका उद्देश्य पेड़ को प्रारंभिक स्तर पर ही कीटों और रोगों से सुरक्षित करना है.
दूसरा छिड़काव:
- यह छिड़काव मंजरों में सरसों के बराबर फूल आने पर किया जाता है.
- इस समय कीटनाशक के साथ किसी एक फफूंदनाशक का मिश्रण उपयोग किया जा सकता है.
तीसरा छिड़काव:
- यह आम के टिकले या मटर के दाने के बराबर फूल आने पर किया जाता है.
- इसमें कीटनाशक और आवश्यक फफूंदनाशक का मिश्रण डालकर प्रभावी सुरक्षा की जाती है.
#आम के कीट/व्याधि से सुरक्षा के उपाय।@ramkripalmp @AgriGoI @HorticultureBih @BametiBihar @IPRDBihar pic.twitter.com/vZ0cIq8t4R
— Agriculture Department, Govt. of Bihar (@Agribih) April 5, 2026
अनुशंसित कीटनाशक और फफूंदनाशक
किसानों को खेती में अलग‑अलग कीट और फफूंद (रोग) से बचाव के लिए सरकारी या विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए कीटनाशक और फफूंदनाशक दवाइयां ही इस्तेमाल करनी चाहिए. इनका उपयोग हमेशा निर्धारित मात्रा और तरीका के अनुसार करना चाहिए ताकि फसल को नुकसान न पहुंचे और दवा असरदार रहे.
कीटनाशक:
- इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल: 3 मिली प्रति 3 लीटर पानी
- डाइमिथोएट 30 प्रतिशत ईसी: 1 मिली प्रति 1 लीटर पानी
- थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी: 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी
फफूंदनाशक:
- सल्फर 80 प्रतिशत धुल: 3 ग्राम प्रति लीटर पानी
- कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत धुल: 3 ग्राम प्रति लीटर पानी
- कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत धुल: 1 ग्राम प्रति लीटर पानी
- हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत एससी: 2 मिली प्रति लीटर पानी
पत्ती रोग निवारक: अल्फा नेफथाइल एसिटिक एसिड 4.5 प्रतिशत एसएल: 4 मिली प्रति 10 लीटर पानी
छिड़काव करते समय सावधानियां
मंजर के समय अगर पेड़ पर बुंदा‑बादी दिखाई दे, तो घुलनशील सल्फर, कार्बेन्डाजिम या हेक्साकोनाजोल का छिड़काव अवश्य करना चाहिए. कीटनाशक का घोल तैयार करते समय किसी भी स्टिकर का इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि दवा अच्छी तरह से चिपके और असरदार रहे. फलों और मंजर को गिरने से बचाने के लिए दूसरे और तीसरे छिड़काव में कीटनाशक के साथ अल्फा नेफथाइल एसिटिक एसिड 4.5 प्रतिशत को 10 लीटर पानी में मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए.
किसान के लिए लाभ
सही समय पर छिड़काव और अनुशंसित रसायनों का प्रयोग करने से:
- आम के पेड़ को कीट और रोगों से सुरक्षा मिलती है.
- फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर होता है.
- बाजार में बेचे जाने वाले आम की कीमत भी बढ़ जाती है.
अधिक जानकारी के लिए किसान अपने सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण अधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी या कृषि समन्वयक से संपर्क कर सकते हैं.