सरसों के उत्पादन में 3.64 फीसदी की बढ़ोतरी, राजस्थान पहले स्थान पर.. जानें MP, यूपी, हरियाणा का हाल
देश में इस साल सरसों उत्पादन को लेकर मिश्रित तस्वीर सामने आई है. राजस्थान अब भी सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य बना हुआ है. अन्य राज्यों में पश्चिम बंगाल और गुजरात में भी बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन असम में उत्पादन कम होकर 2.1 लाख टन पर आ गया है.
Mustard Production: केंद्र सरकार के तिलहन मिशन का असर जमीन पर दिखने लगा है. सरसों की खेती के प्रति किसानों का रूझान बढ़ता जा रहा है. इसके चलते सरसों के रकबे में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार 2025-26 रबी सीजन में सरसों की स्थिति अच्छी रही. पूरे देश में इसका रकबा बढ़कर 93.91 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले साल 92.15 लाख हेक्टेयर था. खास बात यह है कि उत्पादन भी बढ़कर 119.4 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले सीजन के 115.2 लाख टन से करीब 3.64 फीसदी ज्यादा है. वहीं, राजस्थान सहित कई राज्यों में सरसों उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है.
खास बात यह है कि रकबा बढ़ने के साथ-साथ सरसों की पैदावार में भी बढ़ोतरी हुई है. पहले सरसों की पैदावार 1,250 किलो प्रते हेक्टेयर थी, जो अब बढ़कर 1,271 किलो हो गई है. कहा जा रहा है कि सरसों के उत्पादन में बढ़ोतरी का मुख्य कारण खेती का रकबा बढ़ना और उत्पादन क्षमता में हल्का सुधार है. ऐसे अभी राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा सहित देश की कई मंडियों में सरसों का रेट एमएसपी से ज्यादा है. ऐसे में किसानों की बंपर कमाई हो रही है.
सरसों का रेट एमएसपी से ज्यादा
Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान के बेहरोर APMC में सरसों का रेट एमएसपी से ज्यादा है. 27 मार्च को मंडी में FAQ सरसों की 176.50 मीट्रिक टन आवक हुई और इसकी कीमत 6,400 रुपये प्रति क्विंटल रही. ऐसे में राजस्थान के सरसों किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं. वहीं, भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष और एमएसपी कमेटी के सदस्य गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से कहा कि मक्का और बाजरे का रेट कई मंडियों में अभी MSP से कम है, लेकिन सरसों का रेट ज्यादा है. ऐसे में सरसों किसानों के पास कमाई करने का अच्छा मौका है.
फोटो क्रेडिट- AI
किस राज्य में कितनी हुई पैदावार
देश में इस साल सरसों उत्पादन को लेकर मिश्रित तस्वीर सामने आई है. राजस्थान अब भी सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य बना हुआ है, जहां उत्पादन बढ़कर 53.9 लाख टन पहुंच गया है. उत्तर प्रदेश में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और उत्पादन 18.1 लाख टन हो गया है. हरियाणा में भी सरसों की पैदावार बढ़कर 12.7 लाख टन तक पहुंची है. वहीं, मध्य प्रदेश में इस बार उत्पादन घटकर 13.9 लाख टन रह गया है. अन्य राज्यों में पश्चिम बंगाल और गुजरात में भी बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन असम में उत्पादन कम होकर 2.1 लाख टन पर आ गया है. बिहार में सरसों उत्पादन लगभग स्थिर बना हुआ है. कुल मिलाकर, कुछ राज्यों में बढ़ोतरी और कुछ में गिरावट के साथ इस साल सरसों उत्पादन का मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है.
इस वजह से बढ़ी सरसों की पैदावार
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना के मुताबिक, देश में सरसों उत्पादन 2019-20 के 86 लाख टन से बढ़कर अब करीब 120 लाख टन तक पहुंच गया है. उन्होंने बिजनेसलाइन से कहा कि यह बढ़ोतरी बेहतर खेती तकनीक, किसानों की बढ़ती जागरूकता और सरकार की अच्छी नीतियों का परिणाम है. SEA का मानना है कि सरसों की मजबूत फसल से देश में खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी. वहीं, SEA-Agriwatch सर्वे के अनुसार भारत का तिलहन क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है, हालांकि अलग-अलग राज्यों में उत्पादन और पैदावार में अभी भी अंतर बना हुआ है.