Natural Fertilizer: सिर्फ गोबर ही नहीं, भेड़-बकरी और मुर्गी के मल से भी बनेगी ताकतवर खाद

अब किसान सिर्फ गोबर ही नहीं बल्कि भेड़-बकरी और मुर्गी के मल से भी मजबूत जैविक खाद तैयार कर रहे हैं. यह खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, उत्पादन सुधारने और खेती की लागत घटाने में मदद करती है. सही तरीके से तैयार करने पर इसका असर जल्दी दिखाई देता है.

नोएडा | Updated On: 9 Mar, 2026 | 06:56 PM

Organic Farming: खेती की असली ताकत मिट्टी होती है. अगर मिट्टी स्वस्थ और पोषक तत्वों से भरपूर हो, तो फसल अपने-आप अच्छी होने लगती है. लंबे समय से किसान पारंपरिक तरीके से गोबर की खाद का इस्तेमाल करते आ रहे हैं, जिससे जमीन की उर्वरता बनी रहती है. लेकिन अब पशुपालन और मुर्गी पालन से निकलने वाला मल भी खेती के लिए एक मजबूत जैविक खाद बनकर सामने आ रहा है. यह खाद मिट्टी को जल्दी ताकत देती है और फसल की बढ़वार को तेज कर देती है. खास बात यह है कि इसे बनाना आसान है और लागत भी बहुत कम आती है.

भेड़-बकरी और मुर्गी के मल में ज्यादा पोषण

खेती के लिए सबसे जरूरी तीन पोषक तत्व माने जाते हैं-नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम. ये तीनों तत्व पौधों की बढ़वार, जड़ों की मजबूती और उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं. भेड़-बकरी और मुर्गी के मल में ये पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इसी वजह से यह खाद सामान्य गोबर की खाद से ज्यादा असरदार मानी जाती है. जब इस खाद को खेत में डाला जाता है, तो मिट्टी जल्दी उपजाऊ बनती है और पौधों को लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है. यह मिट्टी की जलधारण क्षमता भी बढ़ाती है, जिससे सूखे समय में भी फसल को सहारा मिलता है.

बंजर जमीन को भी बना सकती है उपजाऊ

जमीन अगर कमजोर या बंजर हो जाए, तो उसमें फसल उगाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में यह जैविक खाद मिट्टी को फिर से जीवंत बनाने में मदद कर सकती है. इस खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की बनावट सुधरती है और उसमें सूक्ष्म जीव सक्रिय हो जाते हैं. इससे मिट्टी में प्राकृतिक उर्वरता  बढ़ती है. धीरे-धीरे जमीन की उत्पादन क्षमता वापस आने लगती है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह खाद पूरी तरह प्राकृतिक होती है, इसलिए मिट्टी को नुकसान नहीं पहुंचाती और लंबे समय तक जमीन को स्वस्थ बनाए रखती है.

ऐसे तैयार करें जैविक खाद

इस खाद को तैयार करना बहुत आसान है. सबसे पहले भेड़-बकरी  या मुर्गी का मल इकट्ठा करें. फिर किसी गड्ढे या एक जगह पर इसका ढेर बना लें. इसके ऊपर सूखी पत्तियां, भूसा या खेत का कचरा डाल दें. हल्का पानी छिड़ककर इसे ढक दें ताकि सड़ने की प्रक्रिया शुरू हो सके. करीब 40 से 60 दिनों में यह मल पूरी तरह सड़कर अच्छी जैविक खाद बन जाता है. इसके बाद इसे खेत में फैलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है. अगर समय-समय पर इसमें हल्की नमी बनाए रखी जाए, तो खाद जल्दी और अच्छी तरह तैयार होती है.

लागत कम, उत्पादन ज्यादा

इस जैविक खाद का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे रासायनिक खाद की जरूरत कम हो सकती है. इससे खेती की लागत घटती है और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है. लगातार इस्तेमाल से जमीन की उर्वरता बढ़ती है और फसल की पैदावार में सुधार देखने को मिलता है. पशुपालन और मुर्गी पालन  करने वाले किसानों के लिए यह खाद अतिरिक्त लाभ देने वाली साबित हो सकती है. प्राकृतिक तरीके से तैयार यह खाद खेती को टिकाऊ बनाने में मदद करती है और आने वाले समय में जैविक खेती की दिशा में एक मजबूत कदम बन सकती है.

Published: 9 Mar, 2026 | 10:23 PM

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