15 साल की रिसर्च के बाद केले की 2 नई किस्में लॉन्च, किसानों को मिलेगा ज्यादा उत्पादन..बढ़ेगी कमाई

राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र ने 15 साल की रिसर्च के बाद केले की दो नई किस्में कावेरी थंगम और कावेरी नादन जारी की हैं. कावेरी थंगम में कैरोटीन की मात्रा ज्यादा है और इसे 15 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. वहीं कावेरी नादन पाचा नादन से करीब दोगुना उत्पादन दे सकती है, जिससे किसानों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है.

नोएडा | Published: 22 Aug, 2026 | 12:53 PM

राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (NRCB) ने 15 साल की रिसर्च और ट्रायल के बाद केले की दो नई प्रीमियम किस्में ‘कावेरी थंगम’ और ‘कावेरी नादन’ जारी की हैं. इन दोनों किस्मों को किसानों के लिए पेश कर दिया गया है. यानी अब किसान इन दो किस्मों की खेती कर सकते हैं. कावेरी थंगम का रंग सुनहरा होता है. इसी खास रंग की वजह से इसका नाम ‘थंगम’ रखा गया है. वहीं कावेरी नादन ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म है. उम्मीद की जा रही है कि इन दोनों किस्मों की खेती से केले का उत्पादन बढ़ेगा. साथ ही किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी.

इन दोनों किस्मों के पौधे देश के 112 किसानों को पहले ही दिए जा चुके हैं. इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे प्रमुख केला उत्पादक राज्यों के किसान शामिल हैं. तमिलनाडु के डेल्टा  क्षेत्र के किसानों को भी इन किस्मों के पौधे दिए गए हैं. NRCB के निदेशक डॉ. आर. सेल्वराजन ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि इन किस्मों पर 15 साल तक देश के अलग-अलग हिस्सों में रिसर्च और ट्रायल किए गए. अकेले तमिलनाडु में 82 जगहों पर परीक्षण किया गया. किसानों को 20,000 से ज्यादा पौधे देकर इनके उत्पादन और गुणवत्ता का आकलन किया गया, जिसके नतीजे सकारात्मक रहे.

रसथाली की जगह ले सकती है नई किस्म

डॉ. सेल्वराजन के मुताबिक, कावेरी नादन काफी हद तक रसथाली केले जैसी है. विल्ट बीमारी  के कारण रसथाली की खेती और उपलब्धता में कमी आई है. ऐसे में नई किस्म किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है और रसथाली की तुलना में ज्यादा उत्पादन दे सकती है. उनका कहना है कि अगले 10 साल में इस किस्म की बड़े पैमाने पर खेती होने की उम्मीद है.

15 दिन तक सुरक्षित रहेगा कावेरी थंगम

NRCB के निदेशक डॉ. सेल्वराजन ने कहा कि कावेरी थंगम अपनी लंबी शेल्फ लाइफ और कैरोटीन की मात्रा के मामले में बेहतर किस्म है. यह घुन के हमले के प्रति भी काफी हद तक प्रतिरोधी है. कटाई के बाद इसे करीब 15 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. वहीं, इसे 7 दिनों तक सामान्य तापमान पर रखकर भी खाया जा सकता है. इसकी खासियत यह है कि इसका सुनहरा पीला रंग बाहर और अंदर दोनों तरफ बना रहता है.

कावेरी नादन देगी पाचा नादन से दोगुनी पैदावार

उन्होंने कहा कि कावेरी नादन, पाचा नादन किस्म का बेहतर विकसित रूप है. यह सामान्य पाचा नादन की तुलना में करीब 100 फीसदी ज्यादा उत्पादन देती है, यानी इसकी पैदावार लगभग दोगुनी हो सकती है. राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (NRCB) के निदेशक डॉ. आर. सेल्वराजन ने शुक्रवार को संस्थान के 33वें स्थापना दिवस और किसान मेले के दौरान नई केले की किस्म कावेरी थंगम की खासियत बताई. उन्होंने कहा कि इस केले का गूदा सुनहरे पीले रंग का होता है और इसमें प्रति 100 ग्राम गूदे में करीब 1000 माइक्रोग्राम कैरोटीन पाया जाता है.

ट्रांसजेनिक नहीं है कावेरी थंगम

डॉ. सेल्वराजन के मुताबिक, कावेरी थंगम के सिर्फ पांच फल एक वयस्क व्यक्ति की रोजाना जरूरी Vitamin A की मात्रा पूरी करने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि कैरोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए दुनिया में ट्रांसजेनिक  केले विकसित करने पर काम चल रहा है. लेकिन कावेरी थंगम ट्रांसजेनिक किस्म नहीं है. इसे प्राकृतिक रूप से पौधों के चयन के जरिए विकसित किया गया है. उन्होंने कहा कि जब कावेरी थंगम जैसी प्राकृतिक किस्म उपलब्ध है, तो कैरोटीन बढ़ाने के लिए ट्रांसजेनिक रिसर्च पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है.

 

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