पेड़ की जड़ में डालें बोरोन के साथ ये चीज, मीठे-मीठे आएंगे बेर.. नहीं फटेगा फल
फरवरी में धूप तेज हो जाती है, जिससे मिट्टी की नमी जल्दी सूखने लगती है. ऐसे में बेर के पौधों को पानी देना जरूरी है, लेकिन सिंचाई संतुलित होनी चाहिए. ज्यादा पानी देने से फल फट सकते हैं और मिठास कम हो सकती है, जबकि कम पानी से फल छोटे और सख्त रह जाते हैं.
Plum cultivation: फरवरी महीने के आगमन के साथ ही मार्केट में बेर की आवक बढ़ जाती है. क्योंकि सरस्वती पूजा और महाशिवरात्रि के लिए बेर की मांग बढ़ जाती है. लेकिन कई लोगों का कहना है कि उन्हें बेर खाना अच्छा नहीं लगता है. क्योंकि अधिकांश बेर स्वाद में खट्टे होते हैं. लेकिन बेर की खेती करने वाले किसानों को आज मैं कुछ ऐसे देसी टिप्स बताने जा रहा हूं, जिसे अपनाने पर मीठे-मीठे बेर मिलेंगे. साथ ही पेड़ की जड़ में बोरोन डालने से बेर नहीं फटेंगे.
कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, फरवरी की धूप के साथ ही बेर की फसल पकने और मीठी होने लगती है. लेकिन इस समय थोड़ी सी लापरवाही से फल छोटे, खट्टे या बेस्वाद रह सकते हैं. इसलिए फरवरी में संतुलित सिंचाई और पोटैशियम का सही मात्रा में उपयोग बेर का आकार और मिठास बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है. दरअसल, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और फल मक्खी का हमला फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. फल फटने से बचाने और उन्हें रसीला बनाने के लिए समय पर देखभाल जरूरी है. ऐसे में किसान सही पोषण और कीट नियंत्रण अपनाकर अपने बेरों को ज्यादा मीठा, चमकदार और बेहतर गुणवत्ता वाला बना सकते हैं.
कम पानी से फल छोटे और सख्त रह जाते हैं
फरवरी में धूप तेज हो जाती है, जिससे मिट्टी की नमी जल्दी सूखने लगती है. ऐसे में बेर के पौधों को पानी देना जरूरी है, लेकिन सिंचाई संतुलित होनी चाहिए. ज्यादा पानी देने से फल फट सकते हैं और मिठास कम हो सकती है, जबकि कम पानी से फल छोटे और सख्त रह जाते हैं. विशेषज्ञ शाम के समय हल्की सिंचाई करने की सलाह देते हैं, ताकि रात भर जड़ों में नमी बनी रहे.
मिठास बढ़ाने में पोटैशियम की अहम भूमिका
एक्सपर्ट के अनुसार, बेर की मिठास बढ़ाने में पोटैशियम की अहम भूमिका होती है. फरवरी के पहले हफ्ते में पौधे के आसपास हल्की गुड़ाई कर सल्फेट ऑफ पोटाश की थोड़ी मात्रा डालनी चाहिए. इससे फल का आकार बढ़ता है और उनमें शुगर की मात्रा भी बढ़ती है. जरूरत हो तो पत्तियों पर पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव भी किया जा सकता है.
फरवरी में बोरोन और जिंक का हल्का छिड़काव करें
साथ ही जरूरी पोषक तत्वों की कमी से बेर का स्वाद खराब हो सकता है. फरवरी में बोरोन और जिंक का हल्का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है. बोरोन फल फटने से बचाता है और उनकी बाहरी सतह को चमकदार बनाता है. बाजार में मिलने वाला माइक्रोन्यूट्रिएंट मिक्सचर इस्तेमाल करने से फल ज्यादा रसीले, सुंदर और बेहतर गुणवत्ता वाले बनते हैं. वहीं, जैसे ही बेर पकने लगते हैं और खुशबू फैलाते हैं, पक्षी उन्हें खाने आने लगते हैं. इससे कुतरे हुए फल जल्दी खराब होते हैं और फंगस लग जाती है. इसका सबसे अच्छा उपाय है पौधों पर नायलॉन की बारीक जाली लगाना. साथ ही, ध्यान रखें कि पौधों के बीच हवा अच्छी तरह घूमती रहे, ताकि फल तेज धूप से झुलसे नहीं और चारों तरफ से बराबर पकें.