Telangana Paddy Farming: रिकॉर्ड 147 लाख टन धान खरीदने वाले तेलंगाना में इस खरीफ सीजन धान का रकबा घट सकता है. क्योंकि करीमनगर जिले में किसान धान की खेती से दूरी बना रहे हैं. मौसम वैज्ञानिकों द्वारा अल नीनो के प्रभाव के कारण इस मॉनसून में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बताई गई है, जिससे किसान धान की बुवाई को लेकर असमंजस में हैं. किसानों का कहना है कि यदि जून और जुलाई में पर्याप्त बारिश होती है तो धान की खेती सामान्य रूप से की जा सकती है. लेकिन कम बारिश की आशंका के चलते कई किसान धान की जगह दूसरी फसलों की ओर रुख करने पर विचार कर रहे हैं. इससे इस सीजन में धान के रकबे में कमी आ सकती है.
तेलंगाना टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के कारण कम बारिश की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार और कृषि विभाग किसानों को धान की बजाय आईडी (इरिगेटेड ड्राई) फसलों की खेती करने की सलाह दे रहे हैं, ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके. हालांकि, किसान अभी भी असमंजस में हैं और उन्होंने फसल चयन को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. पूर्ववर्ती करीमनगर जिला धान उत्पादन के लिए जाना जाता है, जहां हर सीजन में 9 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में धान की खेती की जाती है. कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना पूरी होने के बाद जिले में धान का रकबा और बढ़ा है. नहरों, तालाबों और सिंचाई परियोजनाओं से पर्याप्त पानी मिलने के साथ-साथ सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद किए जाने से किसान धान की खेती को प्राथमिकता देते हैं. इसके अलावा, अन्य फसलों की तुलना में धान की खेती में प्रबंधन और देखभाल की जरूरत भी अपेक्षाकृत कम होती है.
500 रुपये क्विंटल मिलता है बोनस
करीमनगर क्षेत्र में अधिकांश किसान अब भी सामान्य किस्म के धान की खेती कर रहे हैं. हालांकि, सरकार द्वारा महीन (फाइन) किस्म के धान पर 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिए जाने के बाद इसकी खेती का रकबा कुछ हद तक बढ़ा है. इसके बावजूद अल नीनो के प्रभाव के कारण इस सीजन में धान की खेती का क्षेत्र घटने की आशंका जताई जा रही है. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि धान की फसल को काफी अधिक पानी की जरूरत होती है, जबकि इस वर्ष कम बारिश की संभावना है. ऐसे में किसानों को नुकसान से बचाने के लिए मक्का, मूंग, उड़द, अरहर, टमाटर, पत्तेदार सब्जियां और अन्य सिंचित सूखी (आईडी) फसलों की खेती करने की सलाह दी जा रही है. इससे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त की जा सकती है.
फसल को पकने में करीब 140 दिन लगते हैं
कृषि विभाग किसानों को यह भी सलाह दे रहा है कि यदि वे धान की ही खेती करना चाहते हैं, तो कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों को अपनाएं. अधिकारियों के अनुसार, सामान्य धान की फसल लगभग 120 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि महीन (फाइन) किस्म की फसल को पकने में करीब 140 दिन लगते हैं. अधिक समय और ज्यादा पानी की जरूरत होने के कारण इस बार फाइन किस्म के धान का रकबा घट सकता है.
धान की खेती में ज्यादा पानी की जरूरत
गोपालपुर गांव के किसान मंडा राजामल्लैया ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव और कम बारिश की आशंका के कारण किसान धान की खेती को लेकर दुविधा में हैं. उन्होंने कहा कि हाल ही में किसान अपनी पिछली फसल बेचने में व्यस्त थे और अब तक वानाकालम (खरीफ) सीजन की खेती की तैयारी शुरू नहीं कर पाए हैं. उनका मानना है कि इस बार अधिकतर किसान कम समय में तैयार होने वाली सामान्य धान किस्म को प्राथमिकता दे सकते हैं, क्योंकि फाइन किस्म को ज्यादा समय और पानी की आवश्यकता होती है.