Weather Updates: दिल्ली-एनसीआर के लोगों को जल्द ही भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले कुछ दिनों में हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही से मौसम सुहावना होने की संभावना है. हालांकि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अभी उत्तर भारत के सभी हिस्सों में पूरी तरह नहीं पहुंचा है, लेकिन बिखरी हुई बारिश से तापमान में गिरावट आ सकती है. आईएमडी के मुताबिक, दिल्ली में 1 से 2 जुलाई के बीच हल्की बारिश हो सकती है. वहीं उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भी इस दौरान बारिश की संभावना जताई गई है.
हालांकि, राजधानी दिल्ली में इस दौरान आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है. दिन में धूप निकल सकती है, लेकिन शाम तक बादल बढ़ने और कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है. नोएडा और गाजियाबाद में भी मौसम का यही रुख देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी मौसम बदलने के संकेत हैं. वहीं राजस्थान के पश्चिमी जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. इन क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने से उत्तर भारत के लोगों को गर्मी से काफी राहत मिल सकती है.
All-India rainfall deficiency now stands at -43% as of 27 June
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During previous El Niño years, June 2014 ended with a -44% rainfall deficit, while June 2009 finished at -47% below normal. However, the lowest June rainfall on record remains 1926, with a -49% deficit.
At the… pic.twitter.com/zeq51tbF43
— Weatherman Navdeep Dahiya (@navdeepdahiya55) June 27, 2026
पश्चिमी राजस्थान में चलेंगी तेज हवाएं
उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों के दौरान तेज हवाएं, बारिश और आंधी-तूफान का असर देखने को मिल सकता है. IMD के अनुसार, राजस्थान, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में मौसम तेजी से बदलने वाला है. इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है. मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी राजस्थान में 28 जून से 2 जुलाई के बीच 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. पूर्वी राजस्थान में भी 2 जुलाई तक इसी तरह के मौसम की संभावना है. वहीं उत्तराखंड में 30 जून से 2 जुलाई के बीच गरज-चमक, बिजली गिरने और बारिश होने का अनुमान है.
मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल
आईएमडी ने कहा है कि अगले तीन से चार दिनों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं. इसके चलते गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अधिक क्षेत्रों में मॉनसून पहुंच सकता है. मौसम विभाग के अनुसार, INSAT-3DS उपग्रह से मिली ताजा तस्वीरों में मध्य भारत, बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में घने मॉनसूनी बादल दिखाई दे रहे हैं. हालांकि दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बड़े हिस्सों में अभी आसमान काफी हद तक साफ है. यही वजह है कि इन क्षेत्रों में मॉनसून ने अभी पूरी तरह दस्तक नहीं दी है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मॉनसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं और उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश बढ़ने की संभावना है.
उत्तर भारत में मॉनसून की रफ्तार फिलहाल धीमी
उत्तर भारत में मॉनसून की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मॉनसूनी हवाएं धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत में व्यापक बारिश कराने वाले मौसमीय तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी राज्य में मॉनसून के आधिकारिक प्रवेश का मतलब यह नहीं होता कि वहां के सभी जिलों में तुरंत बारिश शुरू हो जाए. मॉनसून की घोषणा हवा की दिशा, नमी और बड़े क्षेत्र में लगातार बारिश जैसी परिस्थितियों के आधार पर की जाती है. इसलिए कई बार मॉनसून पहुंचने के बाद भी कुछ शहरों में कुछ दिनों तक गर्मी और सूखा मौसम बना रह सकता है.
देश में मॉनसून की रफ्तार अभी भी कमजोर
वहीं, वेदर एक्सपर्ट नवदीप दहिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा है कि देश में मॉनसून की रफ्तार अभी भी कमजोर बनी हुई है. 27 जून तक पूरे भारत में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. मौसम के आंकड़ों के अनुसार, जून 2014 में बारिश की कमी 44 फीसदी और जून 2009 में 47 फीसदी रही थी, जबकि जून 1926 अब भी सबसे सूखा जून माना जाता है, जब बारिश सामान्य से 49 फीसदी कम हुई थी. मौजूदा स्थिति को देखते हुए और अगले कुछ दिनों में मॉनसून में बड़ी तेजी की संभावना नहीं होने के कारण, जून 2026 का समापन 45 से 49 फीसदी बारिश की कमी के साथ हो सकता है. ऐसे में यह महीना देश के सबसे सूखे जून महीनों में शामिल हो सकता है.