धान में कल्ले निकलने का ये सही वक्त! किसान अपनाएं ये तरीका तो बंपर मिलेगा उत्पादन

धान की फसल में कल्ले निकलने का समय उत्पादन तय करने में अहम भूमिका निभाता है. इस दौरान संतुलित पोषण और सही खाद प्रबंधन से पौधों की मजबूती बढ़ सकती है. पोटाश और यूरिया का इस्तेमाल फसल की जरूरत और मौसम देखकर करने से बेहतर विकास में मदद मिल सकती है.

नोएडा | Published: 6 Sep, 2026 | 12:36 PM

Paddy Crop Cultivation: धान की फसल में कल्ले निकलने की अवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस समय पौधों को सही मात्रा में पोषक तत्व मिलना जरूरी है, क्योंकि इसी चरण में फसल की आगे की बढ़वार और उत्पादन की नींव मजबूत होती है. खेत में नमी, मौसम और फसल की स्थिति को देखते हुए खाद का संतुलित इस्तेमाल करने से पौधों का विकास बेहतर हो सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को इस अवस्था में बिना जरूरत खाद डालने के बजाय फसल की वास्तविक जरूरत को देखकर पोषण प्रबंधन करना चाहिए.

कल्ले निकलते समय फसल पर दें खास ध्यान

धान की फसल  में कल्ले निकलने का समय उत्पादन के लिहाज से बेहद अहम होता है. इस अवस्था में पौधों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और खेत में नमी की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए. यदि फसल कमजोर दिखाई दे रही है तो मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों की पूर्ति की जा सकती है. संतुलित पोषण मिलने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और ज्यादा स्वस्थ कल्ले विकसित होने में मदद मिल सकती है. इससे आगे चलकर बालियों के विकास और दाना भरने पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.

पोटाश से पौधों को मिल सकती है मजबूती

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान की फसल में जरूरत के अनुसार पोटाश का इस्तेमाल  किया जा सकता है. पोटाश पौधों को मजबूत बनाने में मदद करता है और प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता बढ़ा सकता है. इसके साथ ही यह दानों की गुणवत्ता, चमक और वजन को बेहतर करने में भी सहायक माना जाता है. हालांकि, पोटाश की मात्रा खेत की मिट्टी, फसल की अवस्था और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर ही तय करनी चाहिए. जरूरत से ज्यादा खाद का इस्तेमाल फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

रोग और कीट से बचाव में भी मददगार संतुलित पोषण

धान की फसल को स्वस्थ रखने के लिए केवल एक पोषक तत्व पर निर्भर  रहना सही नहीं है. संतुलित पोषण से पौधों की समग्र वृद्धि बेहतर हो सकती है और उनमें रोग एवं कीटों से मुकाबला करने की क्षमता भी बढ़ सकती है. किसानों को खेत में पत्तियों का रंग, पौधों की बढ़वार और किसी तरह के रोग या कीट के लक्षणों पर लगातार नजर रखनी चाहिए. समस्या दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही किसी दवा या खाद का इस्तेमाल करें.

साफ मौसम देखकर करें यूरिया का इस्तेमाल

विशेषज्ञ के अनुसार, धान में यूरिया का इस्तेमाल  भी फसल की जरूरत और मौसम को देखकर करना चाहिए. साफ मौसम में उचित समय पर यूरिया देने से पौधों में हरापन और कल्ले का विकास बेहतर हो सकता है. बारिश की संभावना के दौरान जल्दबाजी में यूरिया डालने से पोषक तत्वों का नुकसान हो सकता है. इसलिए किसान खेत की स्थिति और मौसम का आकलन करने के बाद ही इसका प्रयोग करें. धान में बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित खाद प्रबंधन अपनाना जरूरी है. केवल यूरिया या किसी एक खाद पर निर्भर रहने के बजाय फसल की अवस्था के अनुसार सभी जरूरी पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करनी चाहिए.

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