जून-जुलाई में इस तरह करें पपीते की खेती, केवल 1 लाख की लागत में हो सकती है 12 लाख की कमाई
Rural Business Ideas: जून-जुलाई के महीने में पपीते की बागवानी करना किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है. यह फसल लगभग 6 महीने में फल देना शुरू कर देती है और एक साल के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाती है. सही किस्म और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर एक एकड़ से लाखों रुपये तक की कमाई संभव है.
Papaya Farming Business: बिहार समेत देश के कई हिस्सों में पपीते की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है. खासकर पश्चिम चम्पारण जैसे क्षेत्रों में यह फल अब एक प्रमुख नकदी फसल के रूप में देखा जाने लगा है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, पपीते की खेती न केवल कम समय में तैयार होती है, बल्कि इससे सालभर के भीतर अच्छी आमदनी भी प्राप्त की जा सकती है.
जल्दी तैयार होने वाली फसल
पपीता एक ऐसी फसल है जो बहुत कम समय में फल देना शुरू कर देती है. रोपाई के करीब 6 महीने बाद पौधे फल देने लगते हैं, जबकि लगभग एक साल में यह पूरी तरह तैयार हो जाता है. इस वजह से किसान पहले ही साल में फसल की हार्वेस्टिंग कर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं. यही कारण है कि यह फसल छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है.
उन्नत किस्में और बेहतर उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पपीते की खेती के लिए 15 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है. चम्पारण क्षेत्र में किसान मुख्य रूप से ‘रेड लेडी 786’ किस्म को पसंद करते हैं, क्योंकि यह जल्दी तैयार होती है और अधिक उत्पादन देती है. इसके अलावा ‘हनी ड्यू’, ‘पूसा नन्हा’, ‘बड़वानी लाल’ और ‘बड़वानी पीला’ जैसी किस्में भी लोकप्रिय हैं.
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पौधरोपण और खेती की तकनीक
एक एकड़ खेत में लगभग 1280 पपीते के पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों को 6 फीट की दूरी और कतारों को 5 फीट की दूरी पर लगाना चाहिए, ताकि पौधों को पर्याप्त जगह और पोषण मिल सके. किसान चाहें तो इन पौधों को उद्यान विभाग से लगभग 6 रुपये प्रति पौधा की दर से प्राप्त कर सकते हैं. बेहतर उत्पादन के लिए मिट्टी में गोबर की खाद के साथ पोटाश और सिंगल सुपर फॉस्फेट का उपयोग किया जाता है.
12.75 लाख रुपये तक की आमदनी
विशेषज्ञों के अनुसार एक पपीता का पौधा साल भर में औसतन 40 किलो फल देता है. इस हिसाब से 1280 पौधों से लगभग 51,000 किलो उत्पादन संभव है. अगर बाजार में पपीते का भाव 25 रुपये प्रति किलो भी माना जाए, तो किसान एक एकड़ से लगभग 12.75 लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं. वहीं, पूरी खेती की लागत लगभग 1 लाख रुपये तक आती है, जिससे यह एक अत्यंत लाभकारी फसल साबित होती है.
कम समय, कम लागत और अधिक मुनाफे की वजह से पपीते की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन रही है. सही तकनीक, उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं.