किसानों ने कपास की खेती से बनाई दूरी, सब्सिडी के बावजूद 63 फीसदी घटा पंजीकरण.. जानें वजह

पंजाब में कपास खेती को बढ़ावा देने के लिए 33 फीसदी बीज सब्सिडी देने के बावजूद किसानों का रुझान घट रहा है. इस साल योजना में पंजीकरण और कपास का रकबा दोनों कम हुए हैं. बेमौसम बारिश, सिंचाई समस्याओं और पिंक बॉलवर्म के हमलों ने किसानों की चिंता बढ़ाई है. वहीं, Bollgard-III और नई किस्मों से उम्मीदें जुड़ी हैं.

नोएडा | Published: 30 Jun, 2026 | 02:04 PM

Cotton Farming: पंजाब सरकार की कपास खेती को बढ़ावा देने की कोशिशों को किसानों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है. सरकार द्वारा कपास के बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी देने के बावजूद इस योजना में किसानों का पंजीकरण पिछले साल की तुलना में 63 प्रतिशत घट गया है. राज्य कृषि विभाग के अनुसार, इस साल केवल 19,000 किसानों ने योजना के लिए पंजीकरण कराया, जबकि 2025 में यह संख्या 52,000 थी. अधिकारियों का कहना है कि 2021 से लगातार कीटों के हमले और प्रतिकूल मौसम के कारण कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों का इस फसल से भरोसा कम हुआ है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए पंजाब सरकार ने 2023 में प्रमाणित बीटी कॉटन हाइब्रिड और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा अनुशंसित देसी कपास बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी शुरू की थी. यह सब्सिडी प्रति किसान अधिकतम 5 एकड़ तक के लिए दी जाती है. पंजाब के दक्षिण मालवा क्षेत्र में कपास की खेती  को बढ़ावा देने के लिए सरकार सब्सिडी दे रही है, लेकिन किसान अब भी इस फसल से दूरी बना रहे हैं. कभी इस अर्ध-शुष्क क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली कपास की खेती का रकबा लगातार घट रहा है. कपास की बुवाई आमतौर पर अप्रैल में होती है और फसल अक्टूबर तक तैयार हो जाती है.

80,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई

पंजाब कृषि विभाग के उप निदेशक (कपास) चरणजीत सिंह के अनुसार, इस साल राज्य में करीब 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 1.19 लाख हेक्टेयर था. उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में हुई बेमौसम बारिश के कारण कपास का रकबा और कम होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि खेतों से मिले आंकड़े उत्साहजनक नहीं हैं, क्योंकि न केवल कपास का रकबा घटा है, बल्कि इसकी खेती करने वाले किसानों की संख्या में भी कमी आई है.

बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं

पंजाब के कपास उत्पादक इलाकों में अप्रैल में बुवाई के बाद हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बारिश के कारण खेतों की ऊपरी सतह पर सख्त परत (क्रैंड) बन गई, जिससे कपास के पौधे ठीक से बाहर नहीं निकल पाए और कई पौधे नष्ट हो गए. कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बुवाई की तय अवधि निकल जाने के बाद दोबारा बुवाई की लागत अधिक होने के कारण किसान दोबारा बुवाई से बच रहे हैं. इसके अलावा, नहरों की सफाई के चलते बुवाई के समय सिंचाई के लिए नहर का पानी समय पर नहीं मिल सका. बठिंडा, मानसा और मुक्तसर जिलों में छोटी सिंचाई नहरों में टूट-फूट होने से भी किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा, जिससे कपास की बुवाई प्रभावित हुई.

कृषि विभाग देसी कपास की किस्म PBD88 को बढ़ावा नहीं दे पाया

वहीं, पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि कृषि विभाग देसी कपास की किस्म  PBD88 को पर्याप्त रूप से बढ़ावा नहीं दे पाया. उन्होंने कहा कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा विकसित यह किस्म कई कीटों के प्रति प्रतिरोधी है, कम श्रम में अच्छी पैदावार देती है और कपास क्षेत्र में घटते रकबे को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि कपास की खेती का रकबा तभी बढ़ सकता है, जब गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) के खिलाफ अधिक प्रभावी नई पीढ़ी की जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) कपास बाजार में उपलब्ध होगी.

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