मौसम की मार से पंजाब के किसान बेहाल, लाखों हेक्टेयर रबी फसलें प्रभावित, केंद्र से सर्वे टीम भेजने की मांग

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पंजाब सरकार ने विशेष ‘गिरदावरी’ यानी फसल नुकसान का सर्वे कराने के आदेश दे दिए हैं. इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किस किसान की कितनी फसल खराब हुई है, ताकि उसी हिसाब से मुआवजा दिया जा सके.

नई दिल्ली | Published: 9 Apr, 2026 | 03:26 PM

Punjab wheat crop damage: पंजाब में इस समय मौसम की मार ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. लगातार बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है. खासकर गेहूं की फसल, जो रबी सीजन की सबसे अहम फसल होती है, इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से तुरंत मदद की मांग की है, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द राहत मिल सके.

मौसम की मार से किसान संकट में

इस साल पंजाब में करीब 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई थी. यह राज्य की मुख्य फसल है और लाखों किसानों की आय का प्रमुख स्रोत भी है. लेकिन लगातार बारिश और ओलावृष्टि ने इस मेहनत पर पानी फेर दिया है.

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 1.3 लाख एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचा है. खेतों में खड़ी फसल गिर गई है, वहीं कई जगहों पर कटाई के लिए तैयार फसल भी खराब हो गई है. इससे किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है.

केंद्र से मदद की मांग

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि एक उच्च स्तरीय टीम पंजाब भेजी जाए, जो नुकसान का सही आकलन कर सके. मंत्री ने अपने पत्र में साफ कहा कि यह नुकसान सिर्फ गेहूं तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य रबी फसलें, सब्जियां और पशुओं के चारे की फसलें भी प्रभावित हुई हैं.

कई जिलों में भारी नुकसान

राज्य के कई जिलों में इस आपदा का असर साफ देखा जा रहा है. फाजिल्का, फिरोजपुर, श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, अमृतसर, मोगा और मानसा जैसे जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. इन इलाकों में तेज बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने फसलों को गिरा दिया है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा.

किसानों की आजीविका पर खतरा

फसल खराब होने का मतलब सिर्फ उत्पादन में कमी नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय पर भी बड़ा असर डालता है. कई किसान पहले ही कर्ज और बढ़ती लागत से परेशान हैं. ऐसे में फसल का नुकसान उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है.

राज्य सरकार ने शुरू की गिरदावरी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पंजाब सरकार ने विशेष ‘गिरदावरी’ यानी फसल नुकसान का सर्वे कराने के आदेश दे दिए हैं. इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किस किसान की कितनी फसल खराब हुई है, ताकि उसी हिसाब से मुआवजा दिया जा सके.

विपक्ष ने भी उठाई आवाज

इस मुद्दे पर राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने कहा कि नुकसान का सही और समयबद्ध आकलन होना चाहिए और किसानों को वास्तविक नुकसान के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए. साथ ही उन्होंने सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए अलग राहत व्यवस्था की भी मांग की है, क्योंकि उनकी फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है.

जल्द राहत की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते किसानों को राहत नहीं मिली, तो इसका असर आने वाले समय में कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. किसानों को मुआवजा, बीमा क्लेम और अन्य सहायता जल्दी मिलना बेहद जरूरी है, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें.

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