कम समय में तैयार होने वाली मक्का की ये किस्में बढ़ाएंगी किसानों की कमाई, मिलेगी शानदार पैदावार

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पूसा मक्का की उन्नत और हाइब्रिड किस्में किसानों को कम समय में ज्यादा उत्पादन देने में मदद कर रही हैं. इन किस्मों में बेहतर पोषण गुणवत्ता भी पाई जाती है. सही खेती तकनीक अपनाकर किसान शानदार पैदावार और बेहतर कमाई हासिल कर सकते हैं, जिससे मक्का खेती की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.

नोएडा | Updated On: 29 May, 2026 | 10:14 PM

Hybrid Corn: देश में मक्का की खेती तेजी से बढ़ रही है. पशु चारा, खाद्य उद्योग और प्रोसेसिंग सेक्टर में मांग बढ़ने के कारण किसान अब उन्नत और हाइब्रिड किस्मों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पूसा मक्का की नई किस्में किसानों को कम समय में ज्यादा उत्पादन देने में मदद कर रही हैं. इन किस्मों की खास बात यह है कि इनमें बेहतर पोषण गुणवत्ता भी पाई जाती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नई तकनीक से तैयार इन किस्मों में उत्पादन क्षमता अधिक है और कई किस्में गुणवत्ता वाले प्रोटीन और प्रोविटामिन-ए से भरपूर हैं. यही कारण है कि किसान इन किस्मों को अपनाकर बेहतर कमाई कर सकते हैं.

पूसा एचएम 8 उन्नत और सुपर स्वीट कॉर्न की बढ़ी मांग

पूसा एचएम 8 उन्नत एक हाइब्रिड मक्का किस्म  है, जिसे दक्षिण भारत के कई राज्यों के लिए उपयुक्त माना गया है. यह किस्म लगभग 95 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी औसत उपज 62.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिलती है, जबकि अच्छी देखभाल करने पर उत्पादन 92 क्विंटल से अधिक पहुंच सकता है.इस किस्म की खासियत यह है कि इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन पाया जाता है. इसमें लाइसिन और ट्रिप्टोफैन जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो इसे पोषण की दृष्टि से बेहतर बनाते हैं. वहीं पूसा सुपर स्वीट कॉर्न 1 भी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह किस्म देश के अधिकांश कृषि क्षेत्रों में उगाई जा सकती है. यह केवल 74 से 81 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी संभावित पैदावार 126.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है. इस स्वीट कॉर्न की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिठास है.

अलग-अलग क्षेत्रों के लिए तैयार की गई खास किस्में

कृषि वैज्ञानिकों ने देश के अलग-अलग मौसम और क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए कई विशेष मक्का किस्में विकसित की हैं. पूसा एचएम 4 उन्नत को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माना गया है. यह किस्म लगभग 87 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी संभावित उपज 85 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है. इसी तरह पूसा एचएम 9 उन्नत को बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है. यह किस्म करीब 89 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन पाया जाता है, जिससे यह पोषण के लिहाज से काफी लाभकारी मानी जाती है. पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों  के लिए पूसा विवेक क्यूपीएम 9 उन्नत किस्म बेहतर विकल्प मानी जा रही है. यह देश की पहली ऐसी मक्का किस्म है, जिसमें प्रोविटामिन-ए की मात्रा अधिक पाई जाती है. यह किस्म जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए उपयुक्त मानी जाती है.

अच्छी पैदावार के लिए जरूरी हैं ये वैज्ञानिक तरीके

कृषि जानकारों के अनुसार, केवल अच्छी किस्म चुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही खेती तकनीक अपनाना  भी जरूरी है. मक्का की खेती में प्रति हेक्टेयर करीब 20 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना जाता है. बुवाई के समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 18 से 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. अच्छी पैदावार के लिए संतुलित उर्वरकों का उपयोग बेहद जरूरी है. विशेषज्ञ 100:60:40:25 किलोग्राम एनपीके और जिंक प्रति हेक्टेयर देने की सलाह देते हैं. इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ता है. सिंचाई के दौरान विशेष ध्यान रखना चाहिए कि फूल आने और दाना बनने के समय खेत में नमी बनी रहे. इस अवस्था में पानी की कमी होने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है. खरपतवार नियंत्रण  के लिए बुवाई के तुरंत बाद एट्राजिन का छिड़काव लाभकारी माना जाता है. वहीं यदि फसल में रोग दिखाई दें, तो समय पर दवा का प्रयोग करना जरूरी है.

Published: 29 May, 2026 | 11:30 PM

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