मखाना बोर्ड पर राहुल गांधी के सवाल पर सरकार की खुल गई पोल, दलहन-कपास के दावों पर आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

राहुल गांधी ने कहा कि बड़े शोर-शराबे से घोषित मखाना बोर्ड की हालत भी अन्य योजनाओं की तरह खराब है. वादे की रकम का लगभग 5 फीसदी ही जारी किया गया है और अब तक बोर्ड का स्थान तक तय नहीं हुआ. वहीं, कपास उत्पादन में गिरावट को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा है.

नोएडा | Updated On: 20 Mar, 2026 | 07:08 PM

बिहार के मखाना को देश के बाजारों के साथ ही दुनियाभर में पहुंचाने के लिए सरकार के तमाम दावों की हकीकत उस वक्त सामने आ गई जब राहुल गांधी ने कृषि मंत्रालय ने लिखित में जवाब मांग लिया. साल 2025 में फरवरी के बजट में केंद्र सरकार ने मखाना बोर्ड बनाने और उस पर खर्च होने वाली रकम का ऐलान किया था. हालांकि, सत्ताधारी दल के नेता इससे पहले से ही मखाना बोर्ड बनाने का कई मौकों पर ऐलान कर चुके थे. अब एक साल से ऊपर बीत गया है और अब तक केवल 5 फीसदी रकम ही अलॉट की गई है और अब तक बोर्ड के लिए जगह तक तय नहीं की जा सकी है. जबकि, खुद पीएम मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत राज्य के कई मंत्री और नेता इसे किसानों के लिए क्रांतिकारी कदम बता चुके हैं. इतना ही नहीं दलहन उत्पादन, कपास की पैदावार के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं.

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय से कृषि विकास के लिए कुछ योजनाओं और उत्पादन को लेकर सवाल पूछे. जिनके लिखित जवाब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी की ओर से दिए गए हैं. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है मैंने संसद में कृषि मंत्रालय से पूछा कि पिछले साल की खेती-बाड़ी की बड़ी-बड़ी घोषणाओं का क्या हुआ?

कपास का उत्पादन बढ़ने की बजाय घटा

राहुल गांधी ने कहा कि कपास, दलहन, मखाना को लेकर जो घोषणाएं हुई थीं उन सबकी एक ही कहानी है, न ग्रोथ, न निवेश, न कोई विजन. उन्होंने आगे कहा कि कपास का उत्पादन 2020-21 में 35.2 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) था, जो 2024-25 में बढ़ने की बजाय गिरकर 29.7 MMT रह गया है. दलहन के उत्पादन की स्थिति भी वहीं की वहीं देखी गई. 2020-21 में 25.5 MMT उत्पादन था जो 4 साल बाद भी 2024-25 में 25.7 MMT तक रह गया. जबकि, दलहन उत्पादन के लिए कई बड़ी घोषणाएं दलहन मिशन का ऐलान किया जा चुका है.

राहुल गांधी के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने दिया जवाब.

मखाना बोर्ड के लिए अब तक जगह तलाश नहीं सका केंद्र

राहुल गांधी ने कहा कि यहां तक कि बड़े शोर-शराबे से घोषित मखाना बोर्ड की भी यही हालत है. वादे की रकम का लगभग 5 फीसदी यानी 27 करोड़ रुपये ही जारी हुआ है और अब तक बोर्ड का स्थान तक तय नहीं हुआ. मखाना बोर्ड के सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि मखाना क्षेत्र के विकास के लिए 2025 से 2023 तक के लिए कुल खर्च राशि 475.03 करोड़ रुपये तय की गई है. इसमें से 26.62 करोड़ रुपये बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, असम, मणिपुर और उत्तराखंड को दिए गए हैं. मखाना बोर्ड बनाने की जगह को लेकर केंद्र ने अभी तलाश जारी होने का जवाब दिया है.

राहुल गांधी के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने दिया जवाब.

सरकार की योजनाएं सिर्फ दिखावे के लिए बनती हैं – राहुल गांधी

नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि ये उत्पादन आंकड़ों का नतीजा यह है कि भारत आयात पर निर्भर रहता है, देश के किसान को दूसरे देश के उत्पादों से मुकाबला करना पड़ता है और आम परिवारों को बढ़ती कीमतों का बोझ उठाना पड़ता है. हर बार किसानों की ऐसी उपेक्षा देख कर अब कोई दो राय नहीं है कि मोदी सरकार योजनाएं और बजट जनता के फायदे के लिए नहीं, सिर्फ दिखावे के लिए बनाती है.

Published: 20 Mar, 2026 | 06:24 PM

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