केमिकल फ्री खेती से बदल सकता है किसानों का जीवन! जानें कैसे NMNF दे रहा सुपरप्रोडक्टिव और स्वस्थ फसल
National Mission on Natural Farming: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NFSM) किसानों को केमिकल फ्री, टिकाऊ और कम खर्चीली खेती अपनाने में मदद करता है. इससे मिट्टी, जल और पर्यावरण सुरक्षित रहते हैं और किसानों की आय बढ़ती है. प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान स्वस्थ और सुरक्षित फसल उगा सकते हैं.
Natural Farming: भारत में किसानों की मदद और खेती को केमिकल फ्री और टिकाऊ बनाने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NFSM) एक अहम पहल के रूप में सामने आया है. इस योजना का मकसद सिर्फ किसानों की लागत कम करना नहीं है, बल्कि मिट्टी की सेहत सुधारना, जल और हवा को साफ रखना और पर्यावरण की सुरक्षा भी है.
प्राकृतिक खेती में किसान रसायन या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि गोबर, नीम, हल्दी जैसी प्राकृतिक चीजों का उपयोग करके जमीन को उपजाऊ बनाते हैं. इससे ना सिर्फ फसल स्वस्थ और सुरक्षित होती है, बल्कि किसान को बाहरी इनपुट पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
क्या है प्राकृतिक खेती?
प्राकृतिक खेती वह तरीका है जिसमें किसान रसायन वाले खाद और कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करते. इसके बजाय वे गोबर, गीली पत्तियां, हल्दी, नीम और अन्य प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करके जमीन को उपजाऊ बनाते हैं.
इसमें मुख्य ध्यान होता है:
खर्च कम करना – बाहर से महंगे रसायन या बीज खरीदने की जरूरत नहीं.
मिट्टी की सेहत बढ़ाना – जमीन लंबे समय तक उपजाऊ रहती है.
पर्यावरण की सुरक्षा – रसायन नहीं इस्तेमाल होने से पानी और हवा साफ रहती है.
प्राकृतिक खेती किसान को अपने खेत और पर्यावरण दोनों का दोस्त बनाती है, और उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और सस्ता उत्पादन देती है.
योजना का मुख्य उद्देश्य
इस मिशन का लक्ष्य किसानों को प्रकृति आधारित टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना है. इसके तहत खेतों में स्थानीय संसाधनों से तैयार खाद और जैविक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है. इससे न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन
राज्य में कैसे हो रहा है क्रियान्वयन?
मिशन के तहत राजस्थान के सभी जिलों में 2000 कलस्टर (प्रति कलस्टर 50 हेक्टेयर क्षेत्र) में लगभग 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्राकृतिक खेती को लागू किया जा रहा है. प्रत्येक कलस्टर में लगभग 125 किसान शामिल हैं, और प्रत्येक किसान को 0.4 हेक्टेयर क्षेत्र पर प्राकृतिक खेती के लिए चयनित किया गया है.
किसानों को क्या मिल रहा है फायदा?
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जा रही है.
- प्रति एकड़ अनुदान राशि ₹4000 प्रति एकड़ सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है.
- जैविक उर्वरक और अन्य आवश्यक संसाधनों के लिए स्थानीय स्तर पर केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं.
- किसानों को प्रमाणन (Certification) की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे उनकी फसल की बाजार में बेहतर कीमत मिल सके.
- आपूर्ति के लिए स्थानीय जैव-इनपुट संसाधन केंद्र (BRC) स्थापित किए गए हैं.
इससे खेती का दायरा बढ़ रहा है और अधिक किसान इस मॉडल को अपना रहे हैं.
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव
प्राकृतिक खेती में शामिल किसानों को कृषि सखी या सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRP) के माध्यम से क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाता है. साथ ही, किसानों के लिए प्राकृतिक खेती प्रमाणन प्रणाली (NFCS) लागू की जाती है, जिससे उनकी फसलों को प्रमाणित किया जा सके और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो. यह खेती का ऐसा मॉडल है जो मानव और प्रकृति दोनों के लिए सुरक्षित है.
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन किसानों के लिए एक नई दिशा लेकर आया है. यह योजना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की ओर भी प्रेरित करती है. यदि किसान इस पद्धति को अपनाते हैं, तो वे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.