ज्यादा कीटनाशक बना रहे हैं जहर जैसी फसलें, कृषि मंत्री ने दी किसानों को सावधानी बरतने की सलाह

कृषि मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे नीम तेल, जैविक फफूंदनाशी और जीवाणुनाशी जैसे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाएं. ये उपाय न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि लंबे समय तक खेती के लिए लाभकारी भी साबित होते हैं. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करना जरूरी हो, तो केवल अंतिम विकल्प के रूप में ही करें.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 4 Apr, 2026 | 01:27 PM

Agriculture advice: आज के समय में खेती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से भी जुड़ गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने किसानों से अपील की है कि वे रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग सोच-समझकर और सीमित मात्रा में ही करें. उनका कहना है कि सुरक्षित खेती ही स्वस्थ समाज की नींव बन सकती है.

बढ़ता कीटनाशक उपयोग बना चिंता का विषय

कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में किसानों द्वारा रासायनिक कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग तेजी से बढ़ा है. इससे फसलों की गुणवत्ता पर तो असर पड़ ही रहा है, साथ ही यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनता जा रहा है.

उन्होंने बताया कि जब कीटनाशकों का इस्तेमाल तय मात्रा से ज्यादा किया जाता है, तो इनके अवशेष (रेजिड्यू) खाद्य पदार्थों में रह जाते हैं. ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से कैंसर, हार्मोन असंतुलन और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.

पर्यावरण और पशु उत्पादों पर भी असर

कीटनाशकों का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है. मिट्टी की उर्वरता कम होती है और जल स्रोत भी प्रदूषित होते हैं.

इसके अलावा, यह असर पशुओं तक भी पहुंचता है. जब पशु ऐसे चारे या पानी का सेवन करते हैं, जिसमें कीटनाशक अवशेष मौजूद होते हैं, तो दूध, दही और मांस जैसे उत्पादों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है. इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है.

खेती के सुरक्षित और वैज्ञानिक विकल्प

कृषि मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीकों का संतुलित उपयोग करें. उन्होंने फसल चक्र अपनाने, कीट-प्रतिरोधी किस्मों का चयन करने और खेत में मौजूद लाभकारी कीटों को बचाने पर जोर दिया.

उन्होंने यह भी कहा कि एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) जैसे तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी है. इसमें रासायनिक दवाओं के बजाय प्राकृतिक और वैज्ञानिक उपायों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे कीटों पर नियंत्रण भी होता है और पर्यावरण को नुकसान भी कम होता है.

जैविक उपायों को दें प्राथमिकता

कृषि मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे नीम तेल, जैविक फफूंदनाशी और जीवाणुनाशी जैसे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाएं. ये उपाय न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि लंबे समय तक खेती के लिए लाभकारी भी साबित होते हैं. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करना जरूरी हो, तो केवल अंतिम विकल्प के रूप में ही करें. साथ ही, कम विषैले और सुरक्षित लेबल वाले उत्पादों का ही चयन करें.

आधुनिक तकनीकों से मिलेगा फायदा

खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए फेरोमोन ट्रैप, लाइट ट्रैप और अवरोधक फसल जैसी तकनीकों का उपयोग भी काफी कारगर माना जाता है. इनसे बिना ज्यादा रसायन इस्तेमाल किए कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है.

स्वस्थ समाज की दिशा में बड़ा कदम

कृषि मंत्री ने कहा कि किसान अगर सुरक्षित और संतुलित खेती अपनाते हैं, तो इससे न केवल उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित भोजन मिलेगा. उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसी खेती अपनाएं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण मिल सके.

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