Space Farming: चांद पर खेती की तैयारी! वैज्ञानिकों ने चंद्रमा जैसी मिट्टी में उगाए चने

Moon farming experiment: इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने “माइल्स” नाम की चने की किस्म को चुना. बीज बोने से पहले उन पर एक खास तरह के लाभकारी फंगस की परत चढ़ाई गई. यह फंगस पौधों को मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व बेहतर तरीके से लेने में मदद करता है

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 7 Mar, 2026 | 07:59 AM

Moon farming experiment: मानव सभ्यता लगातार अंतरिक्ष की ओर नए कदम बढ़ा रही है. पहले जहां अंतरिक्ष मिशनों का मकसद केवल ग्रहों और उपग्रहों की खोज करना था, वहीं अब वैज्ञानिक वहां लंबे समय तक रहने की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं. इसी दिशा में एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण प्रयोग सामने आया है. वैज्ञानिकों ने चंद्रमा जैसी मिट्टी में चने उगाने में सफलता हासिल की है. माना जा रहा है कि यह प्रयोग भविष्य में चांद पर खेती करने और वहां रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है.

चंद्रमा जैसी मिट्टी में किया गया खास प्रयोग

रॉयटर्स की खबर के अनुसार, यह अनोखा प्रयोग अमेरिका की टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया. शोधकर्ताओं ने एक खास तरह के नियंत्रित वातावरण वाले चैंबर में चने के पौधे उगाने की कोशिश की. इस प्रयोग के लिए उन्होंने ऐसी कृत्रिम मिट्टी का इस्तेमाल किया, जो चंद्रमा की मिट्टी से काफी हद तक मिलती-जुलती है.

इस मिट्टी को वैज्ञानिक भाषा में लूनर रेजोलिथ सिमुलेंट कहा जाता है. इसे फ्लोरिडा स्थित कंपनी स्पेस रिसोर्स टेक्नोलॉजीज ने तैयार किया था. इस मिट्टी में चंद्रमा की सतह पर पाए जाने वाले खनिजों और संरचना की नकल की गई थी ताकि वैज्ञानिक वास्तविक परिस्थितियों के करीब प्रयोग कर सकें.

“माइल्स” किस्म के चने का किया गया इस्तेमाल

इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने “माइल्स” नाम की चने की किस्म को चुना. बीज बोने से पहले उन पर एक खास तरह के लाभकारी फंगस की परत चढ़ाई गई. यह फंगस पौधों को मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व बेहतर तरीके से लेने में मदद करता है और साथ ही भारी धातुओं के प्रभाव को भी कम करता है.

इसके बाद इन बीजों को चंद्रमा जैसी मिट्टी और वर्मी कम्पोस्ट के मिश्रण में लगाया गया. वर्मी कम्पोस्ट एक जैविक खाद होती है, जिसे केंचुए जैविक कचरे को तोड़कर बनाते हैं. इससे मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ जाते हैं और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है.

75 प्रतिशत चंद्र मिट्टी में भी उगे पौधे

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने अलग-अलग अनुपात में मिट्टी के मिश्रण तैयार किए. कहीं चंद्रमा जैसी मिट्टी की मात्रा कम रखी गई और कहीं ज्यादा. परिणाम काफी दिलचस्प रहे. वैज्ञानिकों ने पाया कि 75 प्रतिशत तक चंद्रमा जैसी मिट्टी वाले मिश्रण में भी चने के पौधे उग गए और उनमें दाने भी बने. हालांकि जैसे-जैसे चंद्र मिट्टी की मात्रा बढ़ती गई, पौधों की संख्या कम होती गई. जब पौधों को पूरी तरह यानी 100 प्रतिशत चंद्र मिट्टी में लगाया गया, तो वे ठीक से विकसित नहीं हो पाए. उनमें न तो फूल आए और न ही दाने बने.

Scientists Successfully Grow Chickpeas in Simulated Moon Soil, A Step Toward Future Lunar Farming

टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी में नियंत्रित वातावरण वाले ग्रोथ चैंबर के अंदर चंद्रमा जैसी मिट्टी के मिश्रण में उगता हुआ चने का पौधा, फोटो क्रेडिट: जेसिका एटकिन / रॉयटर्स

चांद पर खेती की उम्मीद

वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन जैसे देश फिर से चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की तैयारी कर रहे हैं. भविष्य में वहां स्थायी बेस बनाने की भी योजना है. ऐसे में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पृथ्वी से हर समय भोजन भेजना आसान नहीं होगा. इसलिए वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या चंद्रमा पर ही भोजन उगाया जा सकता है.

इस शोध की प्रमुख वैज्ञानिक जेसिका एटकिन, जो नासा की फेलो भी हैं, मीडिया को बताती हैं कि चना एक बेहद पौष्टिक फसल है. इसमें प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, इसलिए इसे अंतरिक्ष खेती के लिए एक अच्छा विकल्प माना जा रहा है.

पौधे देंगे भोजन के साथ ऑक्सीजन भी

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिक्ष में पौधे केवल भोजन का स्रोत ही नहीं बनेंगे, बल्कि वे ऑक्सीजन पैदा करने और जीवन-समर्थन प्रणालियों को बेहतर बनाने में भी मदद करेंगे.

इस अध्ययन से जुड़ी एक अन्य वैज्ञानिक सारा ओलिवेरा सैंटोस ने अपनी रिसर्च में बताया कि अगर भविष्य में चंद्रमा या मंगल पर मानव बस्तियां बसती हैं, तो वहां स्थानीय स्तर पर भोजन उगाना बेहद जरूरी होगा. पृथ्वी से लगातार भोजन और संसाधन भेजना महंगा और मुश्किल काम है.

चंद्र मिट्टी की चुनौती

चंद्रमा की मिट्टी पृथ्वी की मिट्टी से काफी अलग होती है. यह मुख्य रूप से पत्थरों और धूल के बेहद बारीक कणों से बनी होती है, जो करोड़ों वर्षों से उल्कापिंडों के टकराने से बने हैं. इसमें कुछ खनिज जरूर मौजूद होते हैं, लेकिन इसमें जैविक तत्व लगभग नहीं होते. इसके अलावा इसमें एल्यूमिनियम और आयरन जैसे धातु तत्व भी काफी मात्रा में पाए जाते हैं. आयरन पौधों के लिए जरूरी होता है, लेकिन एल्यूमिनियम ज्यादा होने पर पौधों और इंसानों दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है.

खाने से पहले होगी जांच

हालांकि वैज्ञानिकों ने चने उगाने में सफलता हासिल कर ली है, लेकिन अभी इन चनों को खाने की अनुमति नहीं दी गई है. वैज्ञानिक फिलहाल यह जांच कर रहे हैं कि इन चनों में भारी धातुओं की मात्रा कितनी है और क्या ये मानव सेवन के लिए सुरक्षित हैं. इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट इसी साल प्रकाशित होने की संभावना है.

अंतरिक्ष खेती की दिशा में अहम शुरुआत

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह प्रयोग अंतरिक्ष में खेती की दिशा में एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है. अगर भविष्य में चंद्रमा या मंगल ग्रह पर खेती संभव हो जाती है, तो इससे अंतरिक्ष मिशनों की सफलता और वहां मानव बस्तियां बसाने के प्रयासों को बड़ी मदद मिल सकती है.

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Published: 7 Mar, 2026 | 07:55 AM

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