हरियाणा में यूरिया की रिकॉर्ड खपत! अनुमान से 21 फीसदी ज्यादा बिक्री, वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता

हरियाणा में खरीफ सीजन के दौरान यूरिया की बिक्री अनुमानित जरूरत से 21 फीसदी अधिक रही है. कुल उर्वरक खपत में यूरिया की हिस्सेदारी 83 फीसदी से ज्यादा है. वैज्ञानिकों ने संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर दिया है. वहीं, सरकार रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रति एकड़ यूरिया और डीएपी की सीमा तय करने पर विचार कर रही है.

नोएडा | Published: 31 Jul, 2026 | 02:19 PM

Haryana News: हरियाणा के किसान अब भी सबसे ज्यादा सब्सिडी वाले यूरिया पर निर्भर हैं. खरीफ सीजन में इसकी खपत सरकार के अनुमान से भी अधिक हो गई है. लोकसभा में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से पेश आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 19 जुलाई के बीच हरियाणा में 7.17 लाख मीट्रिक टन (LMT) यूरिया की बिक्री हुई, जबकि पूरे सीजन के लिए इसकी अनुमानित जरूरत 5.93 लाख मीट्रिक टन थी. यानी अब तक अनुमानित मांग से करीब 21 फीसदी अधिक यूरिया की बिक्री हो चुकी है.

हालांकि, इसी अवधि में हरियाणा में सभी प्रकार के उर्वरकों की कुल बिक्री 8.61 लाख मीट्रिक टन रही. खरीफ 2026 में यूरिया की जरूरत के मामले में हरियाणा देश में पांचवें स्थान पर रहा, जबकि 11.93 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के साथ पंजाब दूसरे स्थान पर है. सबसे अधिक जरूरत उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई. आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में कुल उर्वरक खपत में यूरिया की हिस्सेदारी 83 फीसदी से अधिक रही. वहीं, अन्य उर्वरकों की खपत  अनुमान से कम रही. डीएपी की बिक्री 1.15 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि जरूरत 1.23 लाख मीट्रिक टन थी. इसी तरह एमओपी की बिक्री 0.13 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि अनुमान 0.37 लाख मीट्रिक टन था. वहीं एनपीके उर्वरकों की बिक्री 0.16 लाख मीट्रिक टन रही, जो अनुमानित 0.29 लाख मीट्रिक टन से कम है.

हरियाणा की हिस्सेदारी करीब 5.3 फीसदी

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि हरियाणा में किसान अब भी संतुलित उर्वरकों की बजाय सब्सिडी वाले यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे फसलों को संतुलित पोषण नहीं मिल पा रहा है और मिट्टी की सेहत पर भी असर पड़ सकता है. आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल उर्वरक बिक्री में हरियाणा की हिस्सेदारी करीब 5.3 फीसदी रही, जबकि राष्ट्रीय जरूरत में राज्य की हिस्सेदारी केवल 3.9 फीसदी है. वहीं, हरियाणा में यूरिया उत्पादन में पिछले एक दशक में बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं हुई है. वर्ष 2025-26 में राज्य ने 5.51 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन किया, जबकि 2014-15 में यह 5.12 लाख मीट्रिक टन था.

1,26,938 मीट्रिक टन उर्वरकों की बचत

हरियाणा सरकार रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल  को कम करने के लिए कई कदम उठा रही है. राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को बताया है कि सख्त निगरानी और नई नीतियों की बदौलत उर्वरकों का उपयोग कम करने में सफलता मिली है. विभाग ने एनजीटी में दायर हलफनामे में कहा कि 8 अक्टूबर 2025 से 17 अप्रैल 2026 के रबी सीजन के दौरान पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1,26,938 मीट्रिक टन उर्वरकों की बचत हुई है. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार अब किसानों के लिए प्रति एकड़ यूरिया और डीएपी की अधिकतम पात्रता तय करने पर भी विचार कर रही है, ताकि रासायनिक उर्वरकों के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सके.

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