भीषण गर्मी में पशुओं पर खतरा! समय रहते संभलें, नहीं तो दूध उत्पादन पर पड़ेगा असर

Animal Health: देश में बढ़ती गर्मी का असर अब गाय-भैंस पर भी साफ दिख रहा है. हीट स्ट्रेस से दूध उत्पादन घट रहा है और पशु बीमार पड़ रहे हैं. सही समय पर पानी, छांव और ठंडक की व्यवस्था करके इस समस्या से बचा जा सकता है और पशुओं की सेहत बनाए रखी जा सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 23 Apr, 2026 | 02:45 PM

Heat Stress: देश में बढ़ती गर्मी अब सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए भी बड़ी परेशानी बनती जा रही है. खासकर गाय-भैंस जैसे दुग्ध पशु हीट स्ट्रेस यानी गर्मी के दबाव से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. National Dairy Development Board (NDDB) के अनुसार अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इससे दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और पशुओं की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए किसानों के लिए जरूरी है कि वे जल्दी लक्षण पहचानें और सही कदम उठाएं.

गर्मी का सीधा असर: दूध और सेहत दोनों पर खतरा

गर्मी बढ़ने के साथ ही पशुओं के शरीर का तापमान  भी बढ़ जाता है, जिससे वे तनाव में आ जाते हैं. NDDB के मुताबिक, हीट स्ट्रेस के कारण गाय-भैंस कम चारा खाने लगती हैं, ज्यादा पानी पीती हैं और तेजी से सांस लेती हैं. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है, जो धीरे-धीरे कम होने लगता है. इसके अलावा, प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है, जिससे पशु समय पर गर्भधारण नहीं कर पाते. अगर हालात ज्यादा खराब हो जाएं, तो पशुओं की मौत तक हो सकती है. इसलिए इसे नजरअंदाज करना किसानों के लिए नुकसान का सौदा बन सकता है.

इन लक्षणों को पहचानें, समय पर करें बचाव

हीट स्ट्रेस  के कुछ आसान लक्षण हैं, जिन्हें किसान आसानी से पहचान सकते हैं. जैसे-पशु का शरीर ज्यादा गर्म होना, चारा कम खाना, हांफना (तेजी से सांस लेना), और बार-बार पानी पीना. अगर पशु सुस्त दिखे या खड़ा रहने में दिक्कत महसूस करे, तो यह भी खतरे का संकेत हो सकता है. NDDB का कहना है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि शुरुआती पहचान से ही बड़ा नुकसान टाला जा सकता है.

सरल उपाय: पानी, छांव और ठंडक है सबसे जरूरी

गर्मी से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि पशुओं को साफ और ठंडा पानी  हमेशा मिलता रहे. एक गाय को गर्मियों में रोजाना करीब 80 से 100 लीटर पानी की जरूरत होती है. इसके साथ ही, पशुओं के लिए छांव की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. शेड की ऊंचाई कम से कम 9 फीट हो या पेड़ों की प्राकृतिक छाया हो. दोपहर के समय पानी का छिड़काव (स्प्रिंकलिंग) करना भी काफी फायदेमंद होता है, जिससे शरीर का तापमान कम रहता है. खाने का समय भी बदलकर सुबह-शाम ठंडे समय में देना चाहिए, ताकि पशु सही मात्रा में चारा खा सकें.

कुछ और आसान टिप्स: छोटे बदलाव से बड़ा फायदा

NDDB के अनुसार, कुछ छोटे-छोटे उपाय अपनाकर भी बड़ा फर्क लाया जा सकता है. जैसे-खलिहान या शेड के चारों तरफ टाट या घास की दीवार  लगाकर गर्म हवा को रोका जा सकता है. छत पर भूसा डालने या गीले बोरे टांगने से भी अंदर ठंडक बनी रहती है. हवा आने-जाने की सही व्यवस्था होना बहुत जरूरी है, इसके लिए पंखे भी लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा, पशुओं के लंबे बाल काटने (क्लिपिंग) और पोटैशियम युक्त मिनरल्स देने से भी शरीर का संतुलन बना रहता है और गर्मी का असर कम होता है.

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Published: 23 Apr, 2026 | 02:45 PM
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