Goat Farming: गर्मी और बारिश के मौसम में बकरियों में अफरा (ब्लोट) या पेट फूलने की समस्या तेजी से देखने को मिलती है. पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार, गीला और नया हरा चारा खाने, अत्यधिक दलहनी चारा देने या अचानक आहार बदलने से बकरियों के पेट में गैस बनने लगती है. पशुपालन विभाग के अनुसार, समय पर ध्यान नहीं देने पर ये समस्या गंभीर रूप ले सकती है और कई मामलों में पशु की जान भी जा सकती है. ऐसे में पशुपालकों को इसके कारण, बचाव और प्राथमिक उपचार की सही जानकारी होना जरूरी है.
गीला चारा और अचानक आहार बदलाव बन रहा बड़ी वजह
पशुपालन विभाग के मुताबिक बारिश के मौसम में बकरियां अक्सर गीली घास और कोमल हरा चारा अधिक मात्रा में खा लेती हैं. इससे पेट में गैस बनने लगती है और अफरा की समस्या पैदा हो सकती है. दलहनी चारे का अत्यधिक सेवन भी इस समस्या का प्रमुख कारण माना जाता है. पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि हरे चारे को कुछ समय सुखाकर ही खिलाएं. इसके अलावा बकरियों के आहार में अचानक बदलाव करने से बचें और संतुलित मात्रा में ही नया चारा शामिल करें. इससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और गैस बनने की संभावना कम रहती है.
घरेलू उपायों से मिल सकती है शुरुआती राहत
अफरा की शुरुआती स्थिति में कुछ घरेलू उपाय राहत पहुंचा सकते हैं. पशु विशेषज्ञों के अनुसार 100 से 150 मिलीलीटर सरसों या अलसी के तेल में एक छोटा चम्मच मीठा सोडा मिलाकर बकरी को पिलाया जा सकता है. इसके अलावा 50 ग्राम हींग और 20 ग्राम काला नमक को एक लीटर छाछ में मिलाकर देने से भी गैस की समस्या में राहत मिलती है. वहीं अजवाइन, काली जीरी और गुड़ का मिश्रण भी पाचन सुधारने में मददगार माना जाता है. हालांकि ये उपाय केवल प्राथमिक सहायता के रूप में अपनाए जाने चाहिए.
आपात स्थिति में तुरंत करें ये काम
ऐसे में बकरी का पेट फूलने लगे तो उसे एक जगह बैठने न दें. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पशु को धीरे-धीरे टहलाते रहें ताकि गैस बाहर निकलने में मदद मिल सके. पेट के बाईं ओर हल्की मालिश करने से भी राहत मिल सकती है. गंभीर स्थिति में बकरी के अगले पैरों को थोड़ा ऊंचा रखने से डकार के माध्यम से गैस निकलने की संभावना बढ़ जाती है. पशुपालकों को लगातार पशु की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए.
एक घंटे में आराम न मिले तो पशु चिकित्सक से संपर्क करें
पशुपालन विभाग के अनुसार, यदि घरेलू उपाय करने के बाद भी एक घंटे के भीतर स्थिति में सुधार नहीं होता है तो तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाना चाहिए. अफरा बढ़ने पर बाईं कोख में अत्यधिक सूजन दिखाई देती है और फेफड़ों पर दबाव बढ़ सकता है. आपातकालीन स्थिति में पशु चिकित्सक विशेष उपकरणों की मदद से पेट से गैस निकालते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मामलों में पशु को बचाया जा सकता है. इसलिए बदलते मौसम में पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.