कम बारिश का दिखने लगा असर, धान की बुवाई करने से हिचक रहे किसान.. घट गया रकबा

औसत से कम बारिश और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में देरी का असर तमिलनाडु के धर्मपुरी में धान की खेती पर दिखने लगा है. पानी की कमी के कारण किसान बुवाई टाल रहे हैं. तालाब और कुएं सूखने से सिंचाई संकट गहरा गया है. किसानों का कहना है कि इस साल धान का रकबा 50 फीसदी तक घट सकता है.

नोएडा | Updated On: 27 Jul, 2026 | 08:22 AM

Tamil Nadu News: औसत से कम बारिश का असर अभी से ही धान की खेती पर दिखने लगा है. इस साल कम बारिश होने के चलते तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में किसानों ने धान की खेती से दूरी बना ली. इससे धान के रकबे में गिरावट आई है. कहा जा रहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के देर से आने से सिंचाई के लिए पानी की  किल्लत हो गई है. इसके कारण किसान धान की बुवाई करने से हिचक रहे हैं.

हर साल धर्मपुरी में करीब 22,000 हेक्टेयर में धान की खेती होती है, लेकिन इस बार इसका रकबा काफी घट सकता है. किसानों का कहना है कि जिले के ज्यादातर तालाब सूख चुके हैं और बांध में भी केवल करीब 25 फीसदी पानी बचा है. कुओं का पानी भी खत्म होने लगा है और जल्द ही बोरवेल भी जवाब दे सकते हैं. मारंदहल्ली के किसान एस. शिवकुमार ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि नवंबर 2025 के बाद से इलाके में अच्छी बारिश नहीं  हुई है. गर्मियों में कुओं का अधिकांश पानी भी खत्म हो गया. इस समय स्थानीय स्तर पर सिंचाई के लिए कोई भरोसेमंद जल स्रोत नहीं बचा है.

भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है

उन्होंने कहा कि अब तक धान की नर्सरी तैयार हो जानी चाहिए थी, लेकिन बिना बारिश के खेती शुरू करना बड़ा जोखिम है. धान की खेती पर हर महीने करीब 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर खर्च आता है. अगर अगले महीने भी बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए फिलहाल किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

8,200 हेक्टेयर में धान की खेती

हरूर के किसान पी. मणिकम का कहना है कि धर्मपुरी में रबी सीजन के दौरान आमतौर पर करीब 8,200 हेक्टेयर में धान की खेती  होती है. लेकिन इस साल नवंबर 2025 से बारिश नहीं होने के कारण किसानों को केवल कुओं के पानी पर निर्भर रहना पड़ा. गर्मी की शुरुआत तक अधिकांश कुएं भी सूख गए. उन्होंने कहा कि बोरवेल का पानी उपलब्ध है, लेकिन उसे मवेशियों के लिए बचाकर रखना जरूरी है. ऐसे में धान जैसी अधिक पानी वाली फसल की खेती करना बड़ा जोखिम है. मणिकम का अनुमान है कि इस साल जिले में धान की खेती का रकबा कम से कम 50 फीसदी घट सकता है.

करीब 380 मिमी बारिश होनी चाहिए थी

उन्होंने यह भी कहा कि जनवरी से अब तक जिले में करीब 380 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक सिर्फ 200 मिमी बारिश हुई है. बारिश की इस बड़ी कमी के कारण किसान इस बार धान की बुवाई करने से बच रहे हैं. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर जून और जुलाई तक जिले में करीब 1,000 हेक्टेयर धान की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. लेकिन शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार 600 हेक्टेयर से भी कम क्षेत्र की फसल तैयार है.

आने वाले दिनों में मॉनसून सक्रिय होगा

अधिकारियों के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह बारिश की कमी है. हालांकि, अगर आने वाले दिनों में मॉनसून सक्रिय  होता है तो धान की बुवाई का रकबा बढ़ सकता है. फिलहाल किसानों ने खेती पूरी तरह छोड़ी नहीं है, बल्कि बारिश का इंतजार करते हुए बुवाई टाल दी है. अधिकारियों का कहना है कि इस साल धान की फसल की वास्तविक स्थिति सितंबर के आखिर तक ही साफ हो पाएगी.

Published: 27 Jul, 2026 | 08:17 AM

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