UP में AI खेती की शुरुआत, किसानों को मिलेगी ट्रेनिंग.. अब बढ़ेगी कमाई

उत्तर प्रदेश के रामपुर और सीतापुर में AI आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा. किसानों को ई-टोकन से बीज-खाद, ड्रोन तकनीक, जैविक खेती और आधुनिक कृषि प्रशिक्षण दिया जाएगा. परियोजना का उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना, खेती में पारदर्शिता लाना और छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है.

नोएडा | Updated On: 31 May, 2026 | 10:35 AM

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में किसानों को जल्द ही आधुनिक और AI आधारित खेती की तकनीकों से जोड़ा जाएगा. किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार यहां एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है. इस कृषि आधारित पायलट प्रोजेक्ट के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने रामपुर और सीतापुर जिलों का चयन किया है. इससे पहले सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा और पंचायती राज जैसे विभागों में भी ऐसे पायलट प्रोजेक्ट चला चुकी है, ताकि योजनाओं में पारदर्शिता बढ़े और लाभ सीधे लोगों तक पहुंच सके.

अधिकारियों के मुताबिक अब इस पायलट मॉडल को कृषि क्षेत्र में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है. कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत किसानों को ई-टोकन सिस्टम के जरिए बीज और खाद उपलब्ध  कराई जाएगी, जिससे वितरण व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और आसान बनेगी. इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती अपनाने और रासायनिक खादों का कम इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. यह कार्यक्रम किसानों को आधुनिक और बेहतर खेती तकनीकों की जानकारी भी देगा. इस हफ्ते लखनऊ में हुई कृषि विभाग की बैठक में अधिकारियों को इस परियोजना को लेकर जरूरी निर्देश दिए गए.

94 फीसदी किसानों का पंजीकरण पूरा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रामपुर जिले को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां किसान पंजीकरण  का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है. अधिकारियों के अनुसार किसान रजिस्ट्री कवरेज के मामले में रामपुर इस समय पूरे उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर है. जिले में लक्ष्य के मुकाबले करीब 94 फीसदी किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है. कृषि विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में लगभग 2.30 लाख किसान पंजीकृत हैं.

नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा

इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत खेती में कई नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें खेती और जमीन से जुड़ी जानकारी का डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे फसल पैटर्न और कृषि गतिविधियों की बेहतर निगरानी हो सकेगी. इस पायलट प्रोजेक्ट  के तहत खेती में ड्रोन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. ड्रोन की मदद से फसलों की निगरानी और जीवामृत जैसे जैविक कीटनाशकों का सटीक छिड़काव किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि इसी तरह की AI आधारित खेती तकनीकों से पहले गन्ने की पैदावार में अच्छा सुधार देखने को मिला है.

आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेगा यह प्रोजेक्ट

इसके अलावा योजना में फसल अवशेष प्रबंधन पर भी खास ध्यान दिया जाएगा. कटाई के बाद बचने वाली पराली और अवशेषों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके तहत बायोचार यूनिट लगाने की योजना है, जहां पराली को जैविक खाद में बदला जाएगा. इसके अलावा इस परियोजना का उद्देश्य छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को आत्मनिर्भर बनाना भी है. इसके लिए किसानों को मोटे अनाज (मिलेट्स), मशरूम और हल्दी की आधुनिक खेती की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकें. जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा ने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट कृषि सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ किसानों को आधुनिक खेती के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेगा.

Published: 31 May, 2026 | 11:12 AM

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