कश्मीर में ओलावृष्टि का कहर, सेब की फसल को भारी नुकसान, किसानों ने मांगी मदद
यह पहली बार नहीं है जब किसानों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है. इससे पहले 18 अप्रैल को भी इसी तरह की ओलावृष्टि हुई थी, जिसने कई बागों को नुकसान पहुंचाया था. उस समय पेड़ों पर फूल थे, जिससे नुकसान और ज्यादा हुआ था. अब फिर से ऐसी घटना होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है.
south kashmir hailstorm: दक्षिण कश्मीर में एक बार फिर मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सेब की खेती के लिए मशहूर शोपियां और कुलगाम जिलों में हाल ही में हुई ओलावृष्टि ने बागवानों को चिंता में डाल दिया है. पहले से ही बदलते मौसम का सामना कर रहे किसान अब इस नई आफत से परेशान नजर आ रहे हैं.
ग्रेटर कश्मीर की खबर के अनुसार, शनिवार को अचानक हुई इस ओलावृष्टि ने कई गांवों को प्रभावित किया. भले ही कुछ जगहों पर नुकसान ज्यादा नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने किसानों के मन में डर जरूर बैठा दिया है कि कहीं आने वाले दिनों में फसल को बड़ा नुकसान न हो जाए.
अचानक बदला मौसम, कुछ ही मिनटों में बढ़ी चिंता
जानकारी के अनुसार शनिवार शाम करीब 5 बजे अचानक ओले गिरने शुरू हो गए. यह ओलावृष्टि करीब 3 से 5 मिनट तक चली, लेकिन इतने कम समय में भी इसने किसानों को परेशान कर दिया. रामनगरी, चेक रामनगरी, हीरपोरा और शोपियां कस्बे जैसे इलाकों में ओले गिरे. इन क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि फिलहाल नुकसान ज्यादा नहीं हुआ है, लेकिन मौसम की यह अनिश्चितता उन्हें लगातार डर में रख रही है. रामनगरी के किसान फारूक अहमद बताते हैं कि ओलावृष्टि भले ही थोड़ी देर के लिए हुई, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि मौसम अब भरोसेमंद नहीं रहा.
कुलगाम में ज्यादा असर, बागों को नुकसान
जहां शोपियां के कई इलाकों में स्थिति सामान्य रही, वहीं कुलगाम जिले के कुंड इलाके में ओलावृष्टि का असर ज्यादा देखने को मिला. यहां ओले करीब 5 से 7 मिनट तक गिरते रहे, जिससे कई बागों को नुकसान पहुंचा है. किसानों का कहना है कि इस समय पेड़ों पर फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. ऐसे में ओले गिरने से फल झड़ जाते हैं या खराब हो जाते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.
बार-बार बदल रहा मौसम, बढ़ रही चिंता
यह पहली बार नहीं है जब किसानों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है. इससे पहले 18 अप्रैल को भी इसी तरह की ओलावृष्टि हुई थी, जिसने कई बागों को नुकसान पहुंचाया था. उस समय पेड़ों पर फूल थे, जिससे नुकसान और ज्यादा हुआ था. अब फिर से ऐसी घटना होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि इस साल मौसम पूरी तरह बदलता हुआ नजर आ रहा है. कभी तेज गर्मी पड़ती है, तो कभी अचानक बारिश या ओलावृष्टि हो जाती है.
किसानों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
लगातार मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों को असुरक्षित महसूस करा दिया है. कुलगाम के एक किसान का कहना है कि ऐसी घटनाएं उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं. जब फसल तैयार होने के करीब होती है, तभी अगर ओले गिर जाएं या बारिश हो जाए, तो पूरा नुकसान हो सकता है. इससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ता है.
बीमा की कमी बनी बड़ी समस्या
खबर के अनुसार, किसानों का कहना है कि सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उनके पास फसल बीमा की मजबूत व्यवस्था नहीं है. अगर फसल खराब हो जाती है, तो उन्हें खुद ही नुकसान उठाना पड़ता है. उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय तुरंत कोई राहत नहीं मिलती, जिससे आर्थिक संकट और गहरा जाता है. इसलिए किसान चाहते हैं कि सरकार फसल बीमा योजनाओं को मजबूत करे, ताकि उन्हें ऐसे समय में सहारा मिल सके.
कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब का बड़ा योगदान
कश्मीर में सेब की खेती सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का मुख्य जरिया है. खासकर शोपियां और कुलगाम जैसे जिलों में बड़ी संख्या में लोग इसी पर निर्भर हैं. अगर इस तरह की प्राकृतिक घटनाएं बार-बार होती हैं, तो इसका असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
प्रशासन से राहत की उम्मीद
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित इलाकों का जल्द सर्वे किया जाए और नुकसान का सही आकलन किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने सरकार से यह भी अपील की है कि ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे भविष्य में इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को बचाया जा सके.