पराली जलाने में हरियाणा से आगे निकला पंजाब तो किसान नेताओं ने कर डाली बड़ी मांग, एडवाइजरी जारी
भारतीय किसान यूनियन (एकता) मंजाइल के नेता हीरा सिंह ने 'किसान इंडिया' से कहा कि किसानों में अब काफी जागरूकता आ चुकी है और पहले के मुकाबले पराली जलाने के मामले कम हुए हैं. उनका कहना है कि जो कुछ छिटपुट घटनाएं सामने आ रही हैं, उनमें किसान पराली नहीं, बल्कि गेहूं की कटाई के बाद खेत में बची जड़ों को जला रहे हैं.
Stubble Burning: रबी सीजन के दौरान गेहूं की पराली जलाने के मामले में पंजाब, हरियाणा से आगे निकल गया है. इसी बीच पंजाब और हरियाणा के किसान नेताओं ने सरकार से सब्सिडी की मांग कर दी है. भारतीय किसान यूनियन (एकता) मंजाइल के नेता हीरा सिंह ने ‘किसान इंडिया’ से कहा कि किसानों में अब काफी जागरूकता आ चुकी है और पहले के मुकाबले पराली जलाने के मामले कम हुए हैं. उनका कहना है कि जो कुछ छिटपुट घटनाएं सामने आ रही हैं, उनमें किसान पराली नहीं, बल्कि गेहूं की कटाई के बाद खेत में बची जड़ों को जला रहे हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में ये मामले भी पूरी तरह खत्म हो जाएंगे. हीरा सिंह ने सरकार से मांग की कि पराली प्रबंधन मशीनों पर 80 फीसदी तक सब्सिडी दी जाए, ताकि छोटे किसान भी इन्हें आसानी से खरीद सकें और पराली जलाने की समस्या को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके.
वहीं, एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने ‘किसान इंडिया’ से बातचीत में कहा कि किसानों में प्रदूषण को लेकर काफी जागरूकता बढ़ी है और अब बहुत कम किसान पराली जला रहे हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि पराली जलाने के मामलों में और कमी आनी चाहिए. इसके लिए सरकार को सुझाव दिया गया है कि जिस तरह धान की पराली पर बोनस दिया जाता है, उसी तरह गेहूं की पराली पर भी किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जाए.
- पराली जलाने के मामले में 157 फीसदी की बढ़ोतरी, जानें किस जिले में आए कितने केस
- आग लगाने से 700 एकड़ गेहूं की फसल जलकर खाक, पूर्व CM ने की मुआवजे की मांग
- प्याज पैदावार में 29 फीसदी गिरावट की आशंका, रकबा भी हुआ कम.. बारिश से फसल चौपट
- UP में किसानों से होगी 20 लाख टन आलू की खरीद, सरकार से मिली मंजूरी.. इतने रुपये क्विंटल होगा रेट
एक दिन में आए 644 केस
दरअसल, पंजाब में शनिवार को एक ही दिन में पराली जलाने की 644 घटनाएं दर्ज की गईं, जो अब तक का सबसे बड़ा उछाल है. इसके साथ ही 15 अप्रैल से 2 मई के बीच कुल मामलों की संख्या बढ़कर 2,403 हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है. 2025 में इसी समय तक 1,044 और 2024 में 437 मामले सामने आए थे.
हरियाणा में 24 घंटे में 476 मामले आए
अगर जिलों की बात करें तो संगरूर में सबसे ज्यादा 285 और फिरोजपुर में 275 घटनाएं दर्ज हुई हैं. वहीं, हरियाणा में पिछले 24 घंटे में 476 मामले आए और पूरे सीजन में अब तक 2,185 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे पंजाब इस मामले में हरियाणा से आगे निकल गया है. पिछले साल अप्रैल और मई के दौरान पंजाब में कुल 10,207 पराली जलाने के मामले दर्ज हुए थे. इससे पहले 2020 में 13,420, 2021 में 10,100, 2022 में 14,511, 2023 में 11,353 और 2024 में 11,900 मामले सामने आए थे. ये आंकड़े सैटेलाइट से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किए जाते हैं, जिन्हें IARI जारी करता है.
15 अप्रैल से निगरानी शुरू
पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB) हर साल 15 अप्रैल से निगरानी शुरू करता है, जब गेहूं की कटाई शुरू होती है और 30 मई तक इसे जारी रखता है, जब किसान धान की बुवाई की तैयारी करते हैं. अधिकारियों के मुताबिक, इस साल कुल 2,403 मामलों में से 2,000 से ज्यादा घटनाएं सिर्फ पिछले 6 दिनों में हुई हैं, जिससे साफ है कि अचानक तेजी से मामले बढ़े हैं.
पराली जलाने के मामलों में भी बढ़ोतरी
गेहूं की कटाई तेज होने के साथ ही पराली जलाने के मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है और आने वाले दिनों में ये संख्या और बढ़ सकती है. PPCB के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, उनकी टीमें जिला प्रशासन के साथ मिलकर इन घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं. उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने के बजाय खेत में ही उसे निपटाने के तरीके (इन-सीटू मैनेजमेंट) अपनाएं.
मिट्टी की सेहत पर पड़ रहा बुरा असर
वहीं, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना के वाइस-चांसलर एस.एस. गोसल ने चेतावनी दी है कि पराली जलाने से मिट्टी की सेहत पर बुरा असर पड़ता है और उसमें मौजूद छोटे जीव (माइक्रोफौना) नष्ट हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और सल्फर खत्म हो जाते हैं, जिससे जमीन की उर्वरता (फर्टिलिटी) कम हो जाती है. इसलिए किसानों को पराली जलाने से बचना चाहिए.
चारे की मांग में कमी आने से बढ़े मामले
पराली जलाने के बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह चारे (तूड़ी) की कम मांग भी है. एस.एस. गोसल के मुताबिक, अब किसान गेहूं के अवशेष से चारा कम बना रहे हैं. इसकी वजह पशुपालन पर कम निर्भरता, पराली को चारे में बदलने की बढ़ती लागत और बाजार में इसके कम दाम हैं. उन्होंने कहा कि जब चारे की जरूरत कम हो गई है, तो किसान पराली को जलाने लगे हैं, जबकि कुछ साल पहले ऐसा कम देखने को मिलता था.