हरियाणा में तेज हुई गेहूं कटाई पर पैदावार में गिरावट, नए खरीदी नियम से किसान परेशान

हरियाणा के करनाल में बेमौसम बारिश से गेहूं की पैदावार घटी है, जबकि खेती की लागत बढ़ती जा रही है. नए खरीद नियमों और बायोमेट्रिक प्रक्रियाओं से किसान परेशान हैं. नुकसान की भरपाई के लिए किसान सरकार से मुआवजा और बोनस की मांग कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुधर सके.

Kisan India
नोएडा | Published: 14 Apr, 2026 | 10:24 PM

Wheat Procurement: हरियाणा के करनाल में बेमौसम बारिश के बाद अब राज्य में गेहूं की कटाई तेजी से शुरू हो गई है. इसके साथ फसल खरीद भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. लेकिन किसान घटती पैदावार और बढ़ती लागत को लेकर चिंता में हैं. किसानों का कहना है कि इस बार उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम है, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान हो रहा है. किसानों ने नई खरीद शर्तों का भी विरोध किया है. किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर की फोटो और नंबर प्लेट अनिवार्य करना, गेट पास के लिए बायोमेट्रिक जांच और किसानों या उनके प्रतिनिधियों की पहचान प्रक्रिया से परेशानी हो रही है.

कई मंडियों में किसान कम पैदावार की शिकायत कर रहे हैं, जबकि बीज, खाद, कीटनाशक और कटाई की लागत लगातार बढ़ रही है. इससे उनकी कमाई बहुत कम रह गई है. किसानों ने हाल की बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से बोनस देने की मांग की है. करनाल के कछवा गांव के किसान आमिर सिंह ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि उन्होंने छह एकड़ की गेहूं की फसल लाई है. उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में प्रति एकड़ 24-25 क्विंटल उत्पादन होता था, लेकिन इस बार यह घटकर 18-19 क्विंटल रह गया है.

बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान

उन्होंने बताया कि खेती की लागत तेजी से बढ़ रही है, जबकि उत्पादन कम हो रहा है. कटाई से पहले और दौरान हुई बारिश और ओलावृष्टि  से फसलें गिर गईं, जिससे पैदावार पर असर पड़ा है. उन्होंने सरकार से नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग की है. वहीं, शेखपुरा गांव के एक अन्य किसान ने भी यही स्थिति बताई. उन्होंने कहा कि उन्होंने चार एकड़ की फसल मंडी में लाई है, लेकिन इस बार औसत उत्पादन 20 क्विंटल रहा, जबकि पिछले साल यह 26 क्विंटल था.

खेती पर लागत बढ़ गई है

किसान गुरपाल ने कहा कि पैदावार कम होने के बावजूद खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि हर सीजन में कीटनाशक, खाद और कटाई की लागत बढ़ जाती है, लेकिन उत्पादन उस हिसाब से नहीं मिल रहा. इसलिए सरकार को नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा और बोनस देना चाहिए. करनाल और कैथल जिलों में किए गए फसल कटाई प्रयोग (CCE) में इस बार पिछले साल की तुलना में उत्पादन कम पाया गया है. अधिकारियों के अनुसार ये प्रयोग औसत पैदावार तय करने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत नुकसान का आकलन करने के लिए जरूरी होते हैं.

गेहूं खरीद को लेकर नए नियम लागू

हरियाणा में 2026-27 रबी सीजन के लिए गेहूं खरीद को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं, जिससे किसानों में मतभेद देखने को मिल रहा है. सरकार का कहना है कि ये नियम पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन कई किसान इन्हें अतिरिक्त परेशानियां बता रहे हैं. नए नियमों के तहत ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ में रजिस्ट्रेशन, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, ट्रैक्टर के साथ किसान की फोटो और नंबर प्लेट की अनिवार्यता, और गेट पास के लिए जरूरी प्रक्रिया शामिल है. इसके अलावा सभी मंडियों और गोदामों को जीओ-फेंसिंग से जोड़ा गया है ताकि रियल टाइम निगरानी हो सके.

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ये कदम व्यवस्था को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए हैं, जबकि किसानों का कहना है कि इससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं, खासकर ऐसे समय में जब फसल उत्पादन पहले ही कम है. पिछले धान खरीद सीजन  में फर्जी गेट पास और ‘घोस्ट खरीद’ के मामले सामने आने के बाद सरकार ने तीन-स्तरीय जांच प्रणाली लागू की है, ताकि मंडी में आने वाली फसल का मिलान सही रिकॉर्ड से किया जा सके.

बायोमेट्रिक सत्यापन एक अच्छा कदम है

कुराली के किसान जगरूप सिंह ने सरकार के नए नियमों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक सत्यापन एक अच्छा कदम है, इससे सिर्फ असली किसानों को ही फसल बेचने का लाभ मिलेगा और धोखाधड़ी कम होगी. वहीं, कुछ अन्य किसानों ने नाराजगी जताई है. किसान राजिंदर सिंह ने कहा कि पहले ही पैदावार कम होने से नुकसान हो रहा है और अब बायोमेट्रिक जांच के लिए लंबी कतारों में लगने से समय की बर्बादी और परेशानी बढ़ रही है.

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Published: 14 Apr, 2026 | 10:24 PM
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