Mushroom Farming: कम खर्च और कम जगह में अच्छी कमाई देने वाली खेती में मशरूम उत्पादन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यही कारण है कि सरकार भी विभिन्न योजनाओं के जरिए मशरूम की खेती को बढ़ावा दे रही है. लेकिन मशरूम की अच्छी पैदावार सिर्फ अच्छे बीज या तकनीक से नहीं मिलती. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, इसके लिए अच्छी क्वालिटी वाला कंपोस्ट तैयार करना भी बहुत जरूरी होता है. अगर कंपोस्ट सही तरीके से नहीं बनाया गया, तो उत्पादन कम हो सकता है और किसानों को नुकसान भी हो सकता है.
मशरूम उत्पादन में कंपोस्ट की भूमिका
मशरूम ऐसी फसल है, जिसे सही तापमान, पर्याप्त नमी और पोषक तत्वों से भरपूर माध्यम की जरूरत होती है. कंपोस्ट वही माध्यम है, जिसमें मशरूम उगता और विकसित होता है. अगर कंपोस्ट अच्छी क्वालिटी का होगा, तो मशरूम की बढ़वार भी अच्छी होगी और उत्पादन ज्यादा मिलेगा. विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार खराब भूसे या गलत तरीके से तैयार किए गए कंपोस्ट के कारण किसानों को उम्मीद के मुताबिक पैदावार नहीं मिल पाती.
कंपोस्ट तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री
हाई क्वालिटी वाला कंपोस्ट तैयार करने के लिए कुछ मुख्य सामग्री की आवश्यकता होती है.
- अच्छी गुणवत्ता का भूसा
- गेहूं का चोकर
- यूरिया
- जिप्सम
इन सभी सामग्री को सही अनुपात में मिलाकर कंपोस्ट तैयार किया जाता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भूसा साफ और अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए, क्योंकि कंपोस्ट की गुणवत्ता काफी हद तक इसी पर निर्भर करती है.
कंपोस्ट तैयार करने की शुरुआत कैसे करें?
कंपोस्ट तैयार करने के लिए सबसे पहले भूसे को अच्छी तरह पानी में भिगोया जाता है. इसमें इतनी नमी होनी चाहिए कि भूसा न ज्यादा सूखा रहे और न ही उसमें जरूरत से ज्यादा पानी हो. इसके बाद भीगे हुए भूसे में यूरिया और गेहूं का चोकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. फिर इस मिश्रण का करीब 4 से 5 फीट ऊंचा ढेर बनाकर उसे प्लास्टिक शीट या जूट के बोरे से ढक दिया जाता है. ऐसा करने से ढेर के अंदर गर्मी बढ़ती है और कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो जाती है.
पलटाई की प्रक्रिया क्यों है जरूरी?
कंपोस्ट बनाते समय उसकी नियमित पलटाई करना बहुत जरूरी होता है. कंपोस्ट के अंदर बनने वाली गैसों को बाहर निकालने और पूरे मिश्रण को अच्छी तरह तैयार करने के लिए हर 3 से 4 दिन में ढेर को पलटना चाहिए. पूरी प्रक्रिया के दौरान करीब 8 से 10 बार पलटाई की जाती है. पांचवीं बार पलटाई करने के बाद इसमें जिप्सम मिलाया जाता है. जिप्सम कंपोस्ट को मुलायम और भुरभुरा बनाता है, साथ ही नमी को संतुलित रखने में भी मदद करता है.
कब समझें कि कंपोस्ट तैयार हो चुका है?
लगातार देखभाल और पलटाई के बाद लगभग 22 से 25 दिनों में कंपोस्ट पूरी तरह तैयार हो जाता है. तैयार कंपोस्ट का रंग गहरा भूरा हो जाता है और उसमें से अमोनिया की गंध खत्म हो जाती है. इसके बजाय मिट्टी जैसी प्राकृतिक खुशबू आने लगती है. यह संकेत है कि कंपोस्ट अब मशरूम उत्पादन के लिए तैयार है.