पराली जलाने पर ब्रेक! सरकार ने तैयार किया एक्शन प्लान, हरियाणा में 80 लाख टन पराली पैदा होने का अनुमान

हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने एक्शन प्लान तैयार किया है. इस साल करीब 80 लाख मीट्रिक टन पराली पैदा होने का अनुमान है. इसमें 25 लाख टन पराली को खेतों से बाहर निकालकर उद्योगों, CBG और बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल किया जाएगा. वहीं, 45 लाख टन पराली को खेत में ही मैनेज करने की योजना है.

नोएडा | Updated On: 20 Aug, 2026 | 10:00 AM

Haryana News: हरियाणा में धान की कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने एक्शन प्लान तैयार किया है. इसके तहत इस साल करीब 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) धान की पराली को खेतों से बाहर निकालकर दूसरे कामों में इस्तेमाल करने की योजना है. राज्य में इस साल करीब 80 लाख मीट्रिक टन पराली पैदा होने का अनुमान है. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से पराली जलाने की घटनाओं पर ब्रेक लगेगा और किसानों की कमाई में भी बढ़ोतरी होगी.

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की योजना के मुताबिक, करीब 45 लाख मीट्रिक टन पराली को खेत में ही मैनेज किया जाएगा, जबकि 10 लाख मीट्रिक टन पराली का इस्तेमाल पशुओं के चारे के रूप में किया जाएगा. वहीं, 25 लाख मीट्रिक टन पराली को खेतों से बाहर निकालकर एक्स-सिटू मैनेजमेंट के तहत इस्तेमाल किया जाएगा. ऐसे  हरियाणा में 2025 में करीब 85 लाख मीट्रिक टन फसल अवशेष पैदा हुआ था. इसमें से 44 लाख मीट्रिक टन पराली को खेत में ही मैनेज किया गया था. करीब 19 लाख मीट्रिक टन पराली को खेतों से बाहर निकालकर इस्तेमाल किया गया, जबकि 22 लाख मीट्रिक टन का इस्तेमाल पशुओं के चारे के लिए हुआ.

पराली का ऐसे होगा इस्तेमाल

इन-सिटू मैनेजमेंट में पराली को खेत से बाहर नहीं निकाला जाता. मशीनों की मदद से पराली को छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है. वहीं, एक्स-सिटू मैनेजमेंट में पराली को खेत से बाहर निकालकर दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जाता है. इसका इस्तेमाल बायोमास पावर प्लांट, बॉयलर में ईंधन, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट, एथेनॉल प्लांट और पैकेजिंग व कार्डबोर्ड उद्योग में किया जा सकता है.

16 लाख हेक्टेयर में धान की खेती

सरकार का मकसद पराली को जलाने के बजाय उसके दूसरे उपयोग को बढ़ावा देना है. इससे खेतों में आग लगाने की घटनाओं को कम करने और पराली से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. हरियाणा में खरीफ सीजन 2026  में करीब 16 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होने का अनुमान है. इससे करीब 80 लाख मीट्रिक टन लाख मीट्रिक टन धान की पराली निकल सकती है. कृषि विभाग के महानिदेशक राजनारायण कौशिक के मुताबिक, इसमें 4.26 लाख हेक्टेयर में बासमती और 11.66 लाख हेक्टेयर में गैर-बासमती धान की खेती होगी. वहीं, बासमती धान से 21 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा और गैर-बासमती धान से करीब 58 LMT से ज्यादा पराली निकलने का अनुमान है.

पराली जलाने के बजाय इन-सिटू मैनेजमेंट अपनाने पर जोर

राज्य के एक्शन प्लान के मुताबिक, किसान पराली जलाने का सबसे बड़ा कारण धान की कटाई  और अगली फसल की बुवाई के बीच कम समय होना है. आमतौर पर धान की कटाई अक्टूबर-नवंबर में होती है और इसके तुरंत बाद किसानों को अगली फसल की बुवाई करनी होती है. ऐसे में किसान जल्दी खेत खाली करने के लिए पराली जला देते हैं. अधिकारियों के मुताबिक, जो किसान पिछले वर्षों में पराली को खेत से बाहर निकालकर उसका निपटारा करते थे, उन्हें अब इन-सिटू मैनेजमेंट अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इसमें पराली को खेत में ही काटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है.

पराली मैनेजमेंट के लिए 52,850 कृषि मशीनें उपलब्ध

अधिकारी का कहना है कि पराली का औद्योगिक इस्तेमाल किसानों को इसे जलाने के बजाय दूसरा विकल्प देता है. इससे पराली का सही प्रबंधन होने के साथ मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन भी बढ़ाने में मदद मिल सकती है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना शुरू होने के बाद से राज्य में अब तक 52,850 कृषि मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं. इनमें हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, जीरो-टिल सीड ड्रिल और सुपर सीडर जैसी मशीनें शामिल हैं. इन मशीनों की मदद से पराली को खेत में ही मैनेज करने में किसानों को मदद मिलती है.

 

Published: 20 Aug, 2026 | 09:59 AM

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