तेलंगाना में धान खरीद की होगी जांच, राइस मिलों का पूरा रिकॉर्ड खंगालेगी सरकार
तेलंगाना सरकार ने कस्टम मिल्ड राइस (CMR) में कथित अनियमितताओं के बीच राज्य गठन से अब तक हुई धान खरीद का ऑडिट कराने का फैसला किया है. ऑडिट में राइस मिलों की मिलिंग, चावल की आपूर्ति, लंबित वसूली और डिफॉल्ट की जांच होगी. दोषी मिलों पर आपराधिक कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी की जा रही है.
Telangana News: तेलंगाना में राइस मिलों द्वारा सरकार को कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं के बढ़ते मामलों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने अधिकारियों को राज्य गठन के बाद से अब तक हुई धान खरीद का ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं. कस्टम मिल्ड राइस (CMR) व्यवस्था की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि इस ऑडिट में धान खरीद, राइस मिलों में मिलिंग प्रक्रिया, सरकार को मिलनी वाली चावल की मात्रा और वास्तव में जमा कराई गई मात्रा की जांच की जाएगी. इसके अलावा जिला और राइस मिलवार डिफॉल्ट, लंबित वसूली, कानूनी कार्रवाई और नियमों के पालन की भी समीक्षा होगी, ताकि धान खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने अधिकारियों को सरकारी बकाया राशि की वसूली तेज करने, व्यवस्था की कमियों की पहचान करने और सुधार लागू करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सरकारी धन और खाद्यान्न की पूरी तरह से वसूली सुनिश्चित करना है. मंत्री ने बताया कि सरकार ने डिफॉल्टर राइस मिलों को बकाया चुकाने का सीमित समय दिया था, जिसके बाद अच्छी मात्रा में वसूली भी हुई है. अब अधिकारियों को हर राइस मिल के लिए समयबद्ध रिकवरी योजना तैयार करने को कहा गया है, ताकि सभी लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जा सके.
MSP पर खरीदे धान की हर बोरी का होगा हिसाब
मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा गया धान जनता के पैसे से किसानों के लिए खरीदा जाता है, इसलिए इसका सही उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन यह धान पंजीकृत राइस मिलों को मिलिंग के लिए देता है. इन मिलों की जिम्मेदारी होती है कि वे तय गुणवत्ता और मात्रा में चावल तैयार कर उसे भारतीय खाद्य निगम (FCI) को सौंपें, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत जरूरतमंद लोगों तक अनाज पहुंचाया जा सके.
धान-चावल की हेराफेरी पर होगी सख्त कार्रवाई
मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि राइस मिलों को दिया गया धान सरकार की संपत्ति है, जिसे जनता के पैसे से खरीदा जाता है. ऐसे में धान या चावल की एक-एक किलो की हेराफेरी राज्य के लोगों का नुकसान है और इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भी प्रभावित होती है. समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जहां भी धोखाधड़ी, धान या चावल की हेराफेरी और विश्वासघात के सबूत मिलेंगे, वहां संबंधित राइस मिलों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे. डिफॉल्टर राइस मिलों को ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा.