अप्रैल–जून में जुताई करते समय किसान गांठ बांध लें 5 बातें, वरना घट सकती है पैदावार

Deep Ploughing Benefits: अप्रैल-जून के दौरान की गई गहरी जुताई खेती के लिए बेहद फायदेमंद होती है. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, कीट और खरपतवार नष्ट होते हैं और पानी धारण क्षमता बेहतर होती है. सही समय और तरीके से जुताई करने पर फसल की पैदावार में लगभग 25 फीसदी तक बढ़ोतरी संभव है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलता है.

नोएडा | Updated On: 18 Apr, 2026 | 10:59 AM

Tips For Farmers: अप्रैल से जून के बीच पड़ने वाली तेज गर्मी को किसान अक्सर परेशानी मानते हैं, लेकिन सच यह है कि यही समय खेती के लिए एक बड़ा अवसर भी लेकर आता है. इस दौरान अगर खेत की गहरी जुताई (करीब 9-12 इंच तक) की जाए, तो मिट्टी अंदर तक पलट जाती है और उसकी बनावट बेहतर हो जाती है. गहरी जुताई से मिट्टी में छिपे कीट, रोग और खरपतवार भी काफी हद तक नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि तेज धूप उन्हें खत्म कर देती है.

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगली फसल के लिए जमीन पहले से तैयार हो जाती है और बीजों को अच्छी ग्रोथ के लिए सही माहौल मिलता है. अगर किसान सही समय पर यह जुताई करते हैं, तो उत्पादन में करीब 20-25 फीसदी तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है.

कीट और रोगों पर नियंत्रण

गहरी जुताई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मिट्टी के अंदर छिपे हानिकारक कीट, उनके अंडे और लार्वा सतह पर आ जाते हैं. तेज धूप के संपर्क में आने से ये नष्ट हो जाते हैं. इससे फसलों में रोगों का खतरा कम होता है और कीटनाशकों की जरूरत भी घटती है. खेतों में उगने वाले जिद्दी खरपतवार अक्सर फसलों की पोषक तत्वों पर कब्जा कर लेते हैं. गहरी जुताई के दौरान इन खरपतवारों की जड़ें बाहर आकर सूख जाती हैं. इससे अगली फसल में खरपतवार की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है.

मिट्टी की उर्वरता और जल धारण में सुधार

पुरानी फसलों के अवशेष जब मिट्टी में मिलते हैं, तो वे धीरे-धीरे सड़कर ह्यूमस (Humus) में बदल जाते हैं. यह ह्यूमस मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. गहरी जुताई से यह प्रक्रिया तेज होती है और मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है. गहरी जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे वर्षा का पानी आसानी से जमीन के अंदर तक पहुंचता है. इससे पानी का संचयन बेहतर होता है और सूखे के समय फसल को नमी मिलती रहती है.

मिट्टी में हवा का बेहतर संचार

जब खेत की मिट्टी को पलटा जाता है, तो नीचे की सख्त और दबाई हुई परत ऊपर आ जाती है. इससे मिट्टी में हवा आसानी से अंदर-बाहर हो पाती है, यानी मिट्टी को सांस लेने का मौका मिलता है. हवा के इस बेहतर संचार से मिट्टी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है, जो पौधों की जड़ों के लिए बेहद जरूरी होती है. अधिक ऑक्सीजन मिलने से जड़ें तेजी से फैलती हैं और मजबूत बनती हैं. साथ ही, जड़ें मिट्टी से पानी और जरूरी पोषक तत्व (न्यूट्रिएंट्स) भी आसानी से सोख पाती हैं. इसका सीधा असर पौधों की अच्छी ग्रोथ और बेहतर पैदावार पर पड़ता है.

गहरी जुताई के लिए जरूरी सुझाव

कितनी बार करें जुताई?

बेहतर परिणामों के लिए हर 2-3 साल में कम से कम एक बार गहरी जुताई जरूर करनी चाहिए. गर्मी के मौसम में की गई गहरी जुताई खेती की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है बल्कि आने वाली फसलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करती है. सही समय, सही उपकरण और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अपनी पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं.

Published: 18 Apr, 2026 | 10:59 AM

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