गर्मी में लौकी-कद्दू की फसल पर मंडराया खतरा, कीट और रोग से बचाव के आसान उपाय जारी

गर्मी के मौसम में लौकी और कद्दू की फसल पर रोग और कीटों का खतरा बढ़ जाता है. इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बीज उपचार, संतुलित सिंचाई, साफ-सफाई और समय पर दवा छिड़काव जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी है, जिससे फसल सुरक्षित रह सके और बेहतर उत्पादन मिल सके.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 18 Apr, 2026 | 10:35 AM

Vegetable Farming: गर्मी का मौसम जहां सब्जी की खेती के लिए अच्छा माना जाता है, वहीं यही समय कई बार किसानों के लिए चुनौती भी बन जाता है. इस दौरान लौकी और कद्दू जैसी बेल वाली सब्जियों में रोग और कीटों का हमला तेजी से बढ़ जाता है. NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, ज्यादा तापमान, नमी में उतार-चढ़ाव और खेत की सही देखभाल न होने से फसल कमजोर होने लगती है और उत्पादन पर असर पड़ता है. ऐसे में किसानों को समय रहते सही सावधानी और वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है.

गर्मी में बढ़ता रोग और कीटों का खतरा

डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, गर्मियों में लौकी  और कद्दू की फसल पर कई तरह के रोग देखने को मिलते हैं. इनमें पाउडरी मिल्ड्यू, डाउनी मिल्ड्यू, पत्ती धब्बा और फल सड़न जैसे रोग शामिल हैं. इसके साथ ही सफेद मक्खी, एफिड और थ्रिप्स जैसे कीट भी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं. ये कीट पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देते हैं, जिससे पौधों की बढ़त रुक जाती है और उत्पादन कम हो जाता है. कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है.

बीज उपचार और साफ-सफाई है सबसे जरूरी

कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि फसल की सुरक्षा  की शुरुआत बीज उपचार से होती है. बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशी दवाओं से उपचारित करना जरूरी है, जिससे शुरुआती अवस्था में ही रोगों से बचाव हो सके. इसके अलावा खेत की नियमित सफाई भी बेहद जरूरी है. खेत में मौजूद खरपतवार और संक्रमित पौधों को समय-समय पर हटाते रहना चाहिए, ताकि रोग फैलने का खतरा कम हो सके. साफ-सुथरा खेत फसल को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाता है.

सिंचाई और दूरी का रखें विशेष ध्यान

फसल में सिंचाई  का संतुलन बहुत जरूरी है. अधिक पानी देने से जड़ सड़न जैसी समस्या हो सकती है, जबकि कम पानी देने से पौधों की वृद्धि रुक जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार ड्रिप सिंचाई पद्धति सबसे बेहतर विकल्प है, जिससे पानी की बचत भी होती है और रोगों का खतरा भी कम रहता है. साथ ही पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखना जरूरी है, ताकि हवा का संचार बना रहे और नमी ज्यादा देर तक न रुके.

समय पर दवा छिड़काव और निगरानी है जरूरी

फसल को रोग और कीटों से बचाने के लिए समय-समय पर दवा का छिड़काव करना बेहद जरूरी है. अगर किसी पौधे में रोग के लक्षण दिखें तो उसे तुरंत खेत से हटाकर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि संक्रमण अन्य पौधों  तक न फैले. किसानों को अपनी फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए और किसी भी समस्या पर तुरंत कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि सही समय पर बीज उपचार, संतुलित सिंचाई, साफ-सफाई और दवा छिड़काव जैसे उपाय अपनाकर किसान अपनी लौकी और कद्दू की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. इससे न केवल नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि बेहतर उत्पादन और अच्छी आय भी प्राप्त की जा सकती है.

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