अब तोतापुरी आम का जूस होगा ज्यादा ‘आम वाला’, बीज से बनेगा ‘मैंगो बटर’! जानिए क्या है प्लान

आम आधारित पेयों में 22 से 25 फीसदी वास्तविक पल्प अनिवार्य करने और आम की गुठली से मैंगो बटर बनाने जैसे बड़े सुझावों पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन कदमों से तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने और पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

नई दिल्ली | Published: 22 Jul, 2026 | 03:33 PM

आम के स्वाद वाले पेय पीने वाले उपभोक्ताओं और तोतापुरी आम उगाने वाले किसानों, दोनों के लिए अच्छी खबर है. केंद्र सरकार आम आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत वास्तविक आम का गूदा (पल्प) अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है. इसके साथ ही तोतापुरी आम के बीज से ‘मैंगो बटर’ जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की योजना पर भी काम तेज किया जाएगा, ताकि किसानों को केवल फल बेचने तक सीमित न रहना पड़े और उन्हें अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिल सके.

इन्हीं दो बड़े सुझावों के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की समस्याओं पर गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की समीक्षा की. बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को मजबूत कर किसानों की आय बढ़ाने पर काम होगा.

22 से 25 फीसदी पल्प अनिवार्य हुआ तो किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को होगा फायदा

विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि बाजार में बिकने वाले आम आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत वास्तविक प्राकृतिक आम का पल्प अनिवार्य किया जाए. फिलहाल कई पेयों में आम का स्वाद तो होता है, लेकिन उनमें वास्तविक पल्प की मात्रा काफी कम रहती है.

समिति का मानना है कि यदि पेयों में अधिक पल्प का उपयोग अनिवार्य किया जाता है तो प्रोसेसिंग उद्योग को अधिक मात्रा में तोतापुरी आम खरीदना पड़ेगा. इससे किसानों की उपज की मांग बढ़ेगी, बाजार में कीमतों को सहारा मिलेगा और उपभोक्ताओं को भी अधिक प्राकृतिक एवं पौष्टिक पेय उपलब्ध होंगे.

समिति ने यह भी सुझाव दिया कि केवल उन्हीं उत्पादों को 5 प्रतिशत जीएसटी का लाभ मिले, जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक वास्तविक पल्प हो. कम पल्प वाले उत्पादों पर अधिक जीएसटी लगाने का भी सुझाव दिया गया है. इस प्रस्ताव पर विचार के लिए कृषि मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, एफएसएसएआई और जीएसटी परिषद के बीच अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं.

क्या है मैंगो बटर और किसानों को इससे कैसे होगा फायदा?

बैठक में एक और महत्वपूर्ण सुझाव सामने आया. विशेषज्ञों ने बताया कि आम के बीज को अब केवल कचरा मानने के बजाय उससे मैंगो बटर और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं.

मैंगो बटर आम की गुठली के भीतर मौजूद सीड कर्नेल (Seed Kernel) से निकाला जाने वाला प्राकृतिक वसा (Natural Fat) है. इसका उपयोग कॉस्मेटिक्स, स्किनकेयर उत्पादों, साबुन, बॉडी लोशन, लिप बाम और कुछ खाद्य एवं औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है. इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग है.

ICAR-CISH और ICAR-IIHR द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से यदि बड़े स्तर पर इसका उत्पादन शुरू होता है तो आम के बीज भी किसानों और प्रोसेसिंग उद्योग के लिए आय का नया स्रोत बन सकते हैं. इससे फल के लगभग हर हिस्से का आर्थिक उपयोग संभव होगा और वेस्टेज भी कम होगी.

किसानों की शिकायत पर बनाई गई थी समिति

आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों द्वारा लगातार गिरती कीमतों की शिकायत के बाद 2 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था. समिति में ICAR-CISH, ICAR-IIHR, डॉ. वाईएसआर उद्यानिकी विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश तथा राज्य उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे.

केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर समिति ने 8 से 10 जुलाई के बीच तिरुपति और चित्तूर जिलों का दौरा किया. इस दौरान किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), मंडी प्रतिनिधियों, पल्प उद्योग, निर्यातकों और जिला प्रशासन से बातचीत कर पूरी मूल्य श्रृंखला का अध्ययन किया.

कीमतें गिरने की वजहें भी सामने आईं

समिति ने पाया कि इस वर्ष तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट के पीछे प्रोसेसिंग इकाइयों द्वारा समय पर खरीद नहीं होना, घरेलू बाजार में पल्प की कम खपत और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव जैसे कारण जिम्मेदार रहे.

रिपोर्ट के अनुसार, सीजन की शुरुआत में बड़ी मात्रा में फल एक साथ बाजार में पहुंच जाता है, जबकि प्रोसेसिंग इकाइयों की खरीद क्षमता सीमित रहती है. इससे किसानों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है.

बनेगी मूल्य स्थिरीकरण समिति

समिति ने तोतापुरी आम की पूरी मूल्य श्रृंखला को व्यवस्थित करने के लिए केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति गठित करने की सिफारिश की है. यह समिति हर वर्ष उत्पादन, मांग, निर्यात, प्रसंस्करण क्षमता और बाजार की स्थिति का आकलन कर किसानों के लिए संकेतात्मक फार्म-गेट खरीद मूल्य और मैंगो पल्प का संदर्भ मूल्य तय करने में मदद करेगी.

पुराने बागों का होगा कायाकल्प

बैठक में बताया गया कि चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों में बड़ी संख्या में तोतापुरी के पुराने बाग हैं, जिनकी उत्पादकता घट रही है.

समिति ने टॉप-वर्किंग तकनीक अपनाने की सिफारिश की है. इसके तहत पुराने पेड़ों पर नीलम, अल्फांसो, हिम्मायत और बंगनपल्ली जैसी अधिक मूल्य वाली किस्मों की कलम लगाकर दो से तीन वर्षों में बेहतर उत्पादन लिया जा सकेगा. साथ ही गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस (GAP), प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता पर भी जोर दिया गया.

फ्रूट बैग, ज़ोनल खरीद और एफपीओ मॉडल पर जोर

समिति ने शुरुआती चरण में लगभग 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट बैग उपलब्ध कराने की सिफारिश की है, जिससे फलों की गुणवत्ता बेहतर होगी और उन्हें प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा.

इसके अलावा ज़ोनल खरीद व्यवस्था विकसित करने, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को प्रोसेसिंग से जोड़ने तथा उद्यानिकी विभाग और उद्योग के साथ मिलकर वार्षिक खरीद योजना तैयार करने की भी सिफारिश की गई है.

आंध्र प्रदेश सरकार को यह सुझाव भी दिया गया है कि सभी पंजीकृत पल्प उद्योगों के लिए हर वर्ष 15 मई से खरीद और पल्प निर्माण शुरू करना अनिवार्य किया जाए.

निर्यात बढ़ाने की भी तैयारी

बैठक में APEDA ने समुद्री मार्ग से आम और आम उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने तथा नए अंतरराष्ट्रीय बाजार विकसित करने की रणनीति प्रस्तुत की.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें, ICAR, APEDA, किसान उत्पादक संगठन और प्रसंस्करण उद्योग मिलकर तोतापुरी आम की पूरी मूल्य श्रृंखला को किसान-केंद्रित बनाएंगे. उनका कहना था कि यदि समिति की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के लाखों तोतापुरी आम उत्पादकों की आय में स्थायी वृद्धि होगी और भारतीय आम वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान बना सकेगा.

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