अनानास से बढ़ेगी किसानों की आय, निर्यात को मिलेगा बढ़ावा.. 236 करोड़ का मिशन शुरू करेगी सरकार
त्रिपुरा सरकार 236 करोड़ रुपये की ‘मिशन क्वीन पाइनएप्पल’ योजना के जरिए अनानास के निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दे रही है. राज्य की प्रसिद्ध क्वीन अनानास वैश्विक बाजार में पहचान बना रही है. साथ ही जूस, जैम, कैंडी और फाइबर जैसे वैल्यू-एडेड उत्पाद खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को भी नई गति दे रहे हैं.
Pineapple Farming: त्रिपुरा सरकार अनानास के निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 236 करोड़ रुपये की ‘मिशन क्वीन पाइनएप्पल’ योजना पर काम कर रही है. सरकार को उम्मीद है कि इस मिशन से अनानास उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. हालांकि, देश में पश्चिम बंगाल के बाद अनानास उत्पादन में त्रिपुरा दूसरे स्थान पर है. अब राज्य वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है.
त्रिपुरा में उगाई जाने वाली क्वीन किस्म की अनानास अपनी खास मिठास, बिना रेशे वाले गूदे, सुगंध और बेहतर गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. राज्य में करीब 12,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है और यह हजारों किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है. खास बात यह है कि अनानास उगाने वाले लगभग 75 प्रतिशत किसान आदिवासी समुदायों से आते हैं. राज्य से हर साल करीब 23,000 मीट्रिक टन क्वीन अनानास बाजारों में भेजा जाता है.
हर साल करीब 1.7 से 1.8 लाख टन अनानास का उत्पादन होता है
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया के शीर्ष पांच अनानास उत्पादक देशों में शामिल है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है. वर्ष 2025-26 में देश में करीब 11.04 लाख टन अनानास का उत्पादन हुआ. पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में इसकी सबसे अधिक खेती होती है. इनमें त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा अनानास उत्पादक राज्य है, जहां हर साल करीब 1.7 से 1.8 लाख टन अनानास का उत्पादन होता है.
तीन दिवसीय महोत्सव में 25 प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए
दरअसल, राज्य सरकार द्वारा आयोजित तीन दिवसीय पाइनएप्पल महोत्सव के उद्घाटन के दौरान पूत्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा है कि राज्य की क्वीन अनानास हमेशा से अपनी खास गुणवत्ता के लिए जानी जाती रही है और पीढ़ियों से किसान इसकी खेती करते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस पाइनएप्पल महोत्सव के जरिए त्रिपुरा की क्वीन अनानास को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने के साथ-साथ किसानों के लिए नए और स्थायी अवसर पैदा किए जा रहे हैं. इस तीन दिवसीय महोत्सव में 25 प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए हैं, जहां ताजा अनानास, अनानास से बने प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प और त्रिपुरा के अन्य स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है.
अनानास से तैयार होते हैं कई उत्पाद
ताजा अनानास की बिक्री के अलावा इससे बनने वाले वैल्यू-एडेड उत्पाद भी तेजी से महत्व हासिल कर रहे हैं. अनानास से जूस, जैम, कैंडी, सूखे स्लाइस, सॉस और सिरका जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. वहीं, अनानास से मिलने वाले ब्रोमेलिन का उपयोग दवा उद्योग में किया जाता है. इसके अलावा अनानास की पत्तियों से निकलने वाले रेशे का इस्तेमाल प्रीमियम फैशन उत्पादों, होम डेकोर और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग बनाने में हो रहा है. इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिल रहा है और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंच रहा है.
200 करोड़ रुपये तक को होगा कारोबार
वहीं, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा है कि इस मिशन का लक्ष्य 2028 तक अनानास से होने वाले आर्थिक कारोबार को 35 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि योजना के तहत किसानों की आय बढ़ाने, निर्यात ढांचे को मजबूत करने और अनानास उत्पादकों के लिए एक टिकाऊ मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.