Agriculture News: किसानों को खाद को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. केंद्र सरकार खाद पर सब्सिडी राशि लागातार बढ़ा रही है. ऐसे में किसानों को खाद की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर परेशान नहीं होना चाहिए. इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि फसल सीजन 2005-06 में उर्वरक सब्सिडी 18,460 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 1.77 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है. मतलब 20 साल में उर्वरक सब्सिडी में लगभग 859 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यानी समय के साथ-साथ सरकार खाद सब्सिडी बढ़ा रही है, ताकि किसानों के ऊपर महंगाई का बोझ नहीं पड़े. यही वजह है कि यूरिया और डीएपी की कीमतें स्थित हैं. अभी यूरिया की एक बोरी 266 रुपये में उपलब्ध है. खास बात यह है कि सरकार की इन कोशिशों की वजह से ही आज भारत चीन का पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है. साथ ही फलों के उत्पादन में भी भारत पहले स्थार पर पहुंच गया है.
दरअसल, ये बातें आज लोकसभा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहीं. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है. उन्होंने बताया कि 2013-14 में कृषि बजट 21,933 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1,30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. यानी 12 साल में ही कृषि बजट 5 गुना से ज्यादा बढ़ गया है.
खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर 3570 लाख टन हो गया
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार कृषि उत्पादन बढ़ाने का काम कर रही है. वर्तमान में खाद्यान्न और बागवानी दोनों क्षेत्रों में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है. खाद्यान्न उत्पादन 2014-15 में 2650 लाख टन से बढ़कर 3570 लाख टन हो गया है. वहीं, बागवानी उत्पादन 2770 लाख टन से बढ़कर 3700 लाख टन हो गया है. इसके अलावा धान, गेहूं, मक्का, मूंगफली और सोयाबीन की पैदावार में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है.
कृषि बजट बढ़ने से खाद्यान्न उत्पादन में इजाफा
कृषि बजट
- 2013-14: 21,933 करोड़ रुपये
- वर्तमान: 1,30,000 करोड़ रुपये
खाद्यान्न उत्पादन
- 2014-15: 2,650 लाख टन
- वर्तमान: 3,570 लाख टन
बागवानी उत्पादन
- 2014-15: 2,770 लाख टन
- वर्तमान: 3,700 लाख टन
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत ने चाइना को पीछे छोड़ते हुए चावल उत्पादन में दुनिया में नंबर वन देश बन गया है. उन्होंने बताया कि किसानों को अच्छा दाम मिले, इसके लिए उत्पादन लागत कम करने के प्रयास किए गए हैं. पीएम-किसान योजना के बारे में उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अब तक 4 लाख 27 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में 22 किस्तों में दिए जा चुके हैं. यह योजना छोटे और सीमांत किसानों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लेकर आई है.
LIVE: Discussion on the Demands for Grants under the control of the Ministry of Agriculture and Farmers Welfare in Lok Sabha.@ChouhanShivraj https://t.co/UdJGgpPS1f
— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) March 18, 2026
उर्वरक सब्सिडी बढ़कर हुई 1.77 लाख करोड़
खाद और उर्वरक पर उन्होंने बताया कि सरकार लगातार सब्सिडी बढ़ा रही है. किसानों के हित में यूरिया और डीएपी की कीमतें स्थिर रखी गई हैं और आज यूरिया का एक बोरा 266 रुपये में उपलब्ध है. 2005-06 में उर्वरक सब्सिडी 18,460 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 1.77 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है. कृषि क्रेडिट के बारे में उन्होंने कहा कि 2014 में यह 7.30 लाख करोड़ रुपये था, जो अब 28 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया है. उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) में कई सुधार किए हैं, ताकि इसका फायदा सिर्फ खेती तक ही नहीं, बल्कि पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन सेक्टर में भी मिले.
2 करोड़ टन तक दाल की खरीदी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने उत्पादन बढ़ाने के लिए नई बीज किस्में विकसित की हैं. अब तक लगभग 3,356 नई बीज किस्में तैयार की जा चुकी हैं. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले यूपीए सरकार किसानों को उत्पादन लागत से 50 फीसदी अधिक मूल्य यानी MSP नहीं देती थी. 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार ने यह तय किया कि MSP में लागत पर 50 फीसदी मुनाफा जोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि यूपीए के समय केवल 45 करोड़ मीट्रिक टन धान खरीदा गया, जबकि NDA सरकार में 84 करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा खरीदी गई. इसी तरह, यूपीए में दाल की खरीदी 6 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि मोदी सरकार में यह लगभग 2 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच गई.