न खेत की जरूरत, न बड़ी पूंजी! योगी सरकार का मशरूम प्लान, कमरे से शुरू होगी किसानों की कमाई

Mushroom Farming In UP: उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए योगी सरकार मशरूम की खेती को बढ़ावा दे रही है. प्रोफेसर शालिनी सिंह बिसेन किसानों को कम लागत में घर के अंदर मशरूम उगाने की ट्रेनिंग दे रही हैं. सरकार की मदद से मशरूम सेंटर, लैब और ट्रेनिंग की सुविधा भी तैयार की जा रही है.

नोएडा | Published: 25 Aug, 2026 | 03:47 PM

Mushroom Farming: किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार लगातार खेती के नए तरीकों को बढ़ावा दे रही है. इसी कड़ी में अब मशरूम की खेती पर खास जोर दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में प्राइवेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और डायरेक्टर शालिनी सिंह बिसेन भी अहम भूमिका निभा रही हैं. वह उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किसानों को मशरूम की खेती की ट्रेनिंग देने और इसकी मार्केटिंग से जोड़ने पर काम कर रही हैं.

योगी से मिलीं शालिनी, किसानों की कमाई बढ़ाने पर चर्चा

शालिनी सिंह बिसेन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर किसानों के लिए मशरूम की खेती को बढ़ावा देने से जुड़ी पहल पर चर्चा की. उनका कहना है कि मशरूम की खेती उन किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा विकल्प बन सकती है, जिनके पास ज्यादा जमीन या बड़ी पूंजी नहीं है. इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं पड़ती. इसे घर के किसी कमरे या छोटे से बंद स्थान में भी किया जा सकता है. शुरुआती स्तर पर करीब 15 से 20 हजार रुपये की लागत से इसका सेटअप तैयार किया जा सकता है.

जमीन नहीं, कमरे में भी हो सकती है खेती

शालिनी के मुताबिक मशरूम एक तरह की ‘लैंडलेस फार्मिंग’ है. यानी किसान बिना ज्यादा जमीन के भी इसका उत्पादन कर सकता है. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों के छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह खेती खास तौर पर उपयोगी हो सकती है. उत्तर प्रदेश सरकार भी इस पहल में सहयोग कर रही है. शालिनी ने बताया कि, भारत सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 2 करोड़ 25 लाख रुपये की मदद से मशरूम सेंटर और उससे जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. इसका मकसद किसानों को खेती से लेकर बिक्री तक की पूरी जानकारी देना है.

किसानों को दी जा रही खास ट्रेनिंग

मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटी में लैब, ट्रेनिंग रूम और जरूरी सुविधाएं तैयार की गई हैं. यहां किसानों को मशरूम की खेती, उत्पादन, देखभाल और बाजार से जुड़ी जानकारी दी जाती है. इसके लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है. अब तक हरदोई, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, रायबरेली, बहराइच और प्रयागराज समेत कई जिलों के किसानों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है. कुछ किसानों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के तौर पर तैयार किया जा रहा है, ताकि वे आगे अपने गांव के दूसरे किसानों को भी इसकी जानकारी दे सकें.

मशरूम से सिर्फ बिक्री नहीं, कई प्रोडक्ट भी

शालिनी सिंह बिसेन का फोकस सिर्फ मशरूम उगाने तक सीमित नहीं है. किसानों को मशरूम से लड्डू, नमकीन, सूप और पाउडर जैसे प्रोडक्ट बनाने की जानकारी भी दी जा रही है. अगर ताजा मशरूम समय पर नहीं बिक पाता है तो उसे सुखाकर पाउडर बनाया जा सकता है. इससे उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है और किसान को नुकसान से बचने का विकल्प मिलता है. मशरूम पोषक तत्वों और प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसे रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने के साथ हेल्थ प्रोडक्ट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

कम लागत में ज्यादा कमाई का लक्ष्य

योगी सरकार का जोर ऐसे किसानों तक पहुंचने पर है, जिनके पास कम जमीन, कम पूंजी या खेती के सीमित साधन हैं. मशरूम की खेती इसी जरूरत को पूरा करने वाला विकल्प बन सकती है. इसके साथ सब्जियों जैसी दूसरी फसलों को जोड़कर इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल भी तैयार किए जा रहे हैं. शालिनी सिंह बिसेन की पहल और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से कोशिश यही है कि किसान सिर्फ पारंपरिक खेती पर निर्भर न रहें, बल्कि कम जगह और कम लागत में कमाई के नए रास्ते भी तैयार करें. अगर मशरूम की खेती को बाजार से सही तरीके से जोड़ा गया, तो यह किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक उपयोगी कदम साबित हो सकती है.

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