पैदावार में हो रही कमी तो करें वैज्ञानिक तरीके से खेती, हरी-भरी होगी फसल.. बढ़ेगी उपज
Modern Farming Tips: कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से पराली प्रबंधन, उन्नत बीजों का चयन, लाइन सोइंग, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के फोलियर स्प्रे आदि उपयोग करते हैं तो फसल उत्पादन में 20-25% तक बढ़ोतरी हासिल कर सकते हैं.
रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान गेहूं, सरसों और आलू की बुवाई की है. इस समय किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि कम लागत में ज्यादा पैदावार कैसे ली जाए. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान भाई वैज्ञानिक तरीके से पराली प्रबंधन, उन्नत बीजों का चयन, लाइन सोइंग, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के फोलियर स्प्रे आदि उपयोग करते हैं तो उत्पादन में 20 – 25% तक बढ़ोतरी कर सकते हैं.
यूरिया या डीकंपोजर से करें पराली प्रबंधन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश गेहूं, सरसों और आलू की खेती के लिए उपयुक्त इलाका है. यहां इन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है. अब खेतों को अगली फसल के लिए तैयार किया जा रहा है. ऐसे में खेतों में बची पराली का सही प्रबंधन किया जाना चाहिए. इसके लिए मिट्टी पलटने वाला हल या कल्टीवेटर इस्तेमाल करें साथ ही यूरिया या डीकंपोजर का छिड़काव करें. इससे पराली सड़कर मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ती हैं जो मिट्टी की उर्वरता के लिए बहुत जरूरी है.
गेहूं की उन्नत किस्मों से बढ़ेगी पैदावार
समय पर बुवाई और उन्नत किस्म के बीजों का चुनाव भी बहुत आवश्यक होता है. गेहूं की कुछ आधुनिक वैरायटी जैसे DBW 303, DBW 327, DBW 370, और HD 299 काफी अच्छी पैदावार देती है. किसान भाइयों को छिटकवा की जगह सीड ड्रिल से लाइन सोइंग करनी चाहिए. इससे पैदावार में 10 से 12% तक की बढ़ोतरी होती है और लाइन सोइंग से सिंचाई, निराई व कटाई भी आसान हो जाती है, जिससे खाद जड़ों तक पहुंचती है और जड़े मजबूत बनती हैं.
वैज्ञानिक तरीके से बढ़ेगा मुनाफा
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का फोलियर स्प्रे पौधों को वृद्धि करने में मदद करता है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाता. सरसों की खेती के लिए पूसा मस्टर्ड 32, 33, 34 और आरएस 749 जैसी किस्में बेहतर है. साथ ही एनपीएस या सिंगल सुपर फास्फेट के रूप में सल्फर के प्रयोग से तेल की गुणवत्ता सुधरती है. किसान भाई वैज्ञानिक तरीके अपना कर गेहूं, सरसों और आलू का उत्पादन, 20 से 25% तक बढ़ा सकते हैं. उदाहरण के लिए, अगर किसान 1000 रुपए की लागत मैं 40 क्विंटल उत्पादन लेते हैं, तो वैज्ञानिक तरीके अपना कर 60 क्विंटल तक पैदावार बढ़ा सकते हैं. आलू की फसल में नैनो डीएपी से कंद उपचार भी काफी फायदेमंद है.
इस प्रकार आधुनिक व वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकेंगे.