Home Gardening Tips: लोगों में गार्डनिंग का क्रेज दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है. लोग अब केवल फूलों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि घर की छत, आंगन और बालकनी में फलदार पौधे भी उगाने लगे हैं. इन्हीं में मौसंबी का पौधा लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है, जिसे गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है. गमले में मौसंबी की खेती कैसे करें.
दिन प्रतिदिन गार्डनिंग का शौक तेजी से बढ़ रहा है. अब लोग अपने घर की छत, आंगन और बालकनी में फूलों के साथ-साथ फलदार पौधे लगाने में भी रुचि दिखा रहे हैं. ऐसे में मौसंबी का पौधा गमले में उगाना लोगों के बीच बहुत ही लोकप्रिय विकल्प बनता जा रहा है. गार्डनिंग एक्सपर्ट के अनुसार, मौसंबी लगाने के लिए ठंड का मौसम सबसे उपयुक्त होता है. दिसंबर से मार्च के बीच यदि गमले में पौधा लगाया जाए, तो वह अच्छी तरह विकास करता है और गर्मी के मौसम में फल देना शुरू कर देता है.
सही किस्म से मिलेगी बेहतर पैदावार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गमले में मौसंबी उगाने के लिए नागपुर और कोलकाता किस्म सबसे उपयुक्त मानी जाती है. ये किस्में कम जगह में भी अच्छे से ग्रोथ करती हैं और सही देखभाल मिलने पर पौधा फलों से लद जाता हैं. ठंड में लगाया गया पौधा गर्मी में फल देना शुरू कर देता है, लेकिन बरसात के मौसम में पौधे तेजी से बढ़ते है.
गमले का सही आकार है जरूरी
मौसंबी लगाने के लिए 12 से 20 इंच आकार का गमला उपयुक्त रहता है. यदि 20 इंच का गमला चुना जाए, तो पौधे की जड़े मजबूत बनती है और उसकी ग्रोथ भी बेहतर होती है. बड़े गमले में पौधे को पोषण और नमी लंबे समय तक मिलती रहती है.
मिट्टी की सही तैयारी करें
गमले में लगाने से पहले मिट्टी की तैयारी बेहद जरूरी है. इसके लिए काली मिट्टी में वर्मीकम्पोस्ट और अच्छी सड़ी गोबर खाद मिलानी चाहिए. साथ ही सरसों की खली और नीम की खली मिलाने से पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और कीट व रोगों से भी सुरक्षा मिलती है.
काली मिट्टी में बेहतर ग्रोथ
गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार मौसंबी के लिए काली मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. नागपुर क्षेत्र में जहां मौसंबी लाल मिट्टी में उगाई जाती है, वहीं यह किस्म काली मिट्टी में भी अच्छी तरह ग्रोथ करती है। सही मिट्टी और पोषण मिलने पर पौधा तेजी से बढ़ता है और लंबे समय तक फल देता है.
देखभाल और रोग नियंत्रण
मौसंबी के पौधे पर नियमित ध्यान देना जरूरी होता है. यदि पत्तियां मुड़ने लगें, सिकुड़ने लगें या फफूंद का असर दिखाई दे, तो साफ पावडर, रोगर या सोनाटा जैसी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है. समय पर उपचार से पौधा स्वस्थ बना रहता है.
सिंचाई में रखें संतुलन
पानी देने में संतुलन बेहद जरूरी है. अत्यधिक पानी पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि कम पानी से ग्रोथ प्रभावित होती है. इसलिए दो से तीन दिन के अंतराल में हल्की सिंचाई करना सबसे बेहतर माना जाता है.
गर्मी में मिलेंगे रसीले फल
सही देखभाल मिलने पर गमले में उगा मौसंबी का पौधा 8 से 10 फीट तक ऊंचा हो सकता है और गर्मी के मौसम में ताजे व रसीले फल देने लगता है. गमले में उगी मौसंबी न केवल घर की जरूरत पूरी करती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद साबित होती है.