भेड़ों के बाद 200 तोतों की मौत, कीटनाशक मिला दाना चुगने की आशंका.. चावल खिलाने पर लगी रोक

वन विभाग के अधिकारियों ने पुल के पास खाना खिलाने पर रोक लगा दी है और सख्ती से पालन के लिए मौके पर स्टाफ तैनात किया है. अधिकारियों ने बताया कि पक्षियों के विसरा के सैंपल आगे की जांच के लिए जबलपुर भेजे गए हैं. पिछले चार दिनों से पशु चिकित्सा और वन विभाग के साथ-साथ वन्यजीव विंग की टीमें भी इलाके की निगरानी कर रही हैं.

रिजवान नूर खान
नई दिल्ली | Updated On: 3 Jan, 2026 | 04:11 PM

लखनऊ में बीते सप्ताह फेंके गए खराब खाने को खाकर 150 से ज्यादा भेड़ों की मौत हो गई थी. यह मामला थमा नहीं था कि अब मध्य प्रदेश के खरगौन में खराब खाना खाकर करीब 20  तोतों की मौत हो गई है. मौत की वजह कीटनाशक मिला दाना चुगने और पानी पीने को भी माना जा रहा है. मामले ने तूल पकड़ लिया है और मौतों की वजह जानने के लिए जांच की जा रही है. दोनों मामलों की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है फूड प्वाइजनिंग की वजह से भेड़ों और तोतों की मौत हुई है. वन विभाग ने खरगौन ने पक्षियों को चावल खिलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

खरगोन जिले में फूड पॉइजनिंग से 200 तोतों की मौत

मध्य प्रदेश के के खरगोन जिले में अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि जिले में नर्मदा नदी के किनारे फूड पॉइजनिंग से कम से कम 200 तोतों की मौत हो गई है. उन्होंने बताया कि पिछले चार दिनों में बड़वाह इलाके में नदी किनारे एक पुल के पास तोतों के शव मिले हैं, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह बर्ड फ्लू नहीं बताई गई है.
जिला वन्यजीव वार्डन टोनी शर्मा ने कहा कि बचाव अभियान के दौरान कुछ तोते जिंदा थे, लेकिन खाने में जहर इतना ज्यादा था कि वे कुछ ही देर बाद मर गए.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बर्ड फ्लू से इनकार

बर्ड फ्लू के डर से इलाके में दहशत फैल गई, लेकिन पशु चिकित्सा जांच में संक्रमण का कोई निशान नहीं मिला. तोतों का पोस्टमॉर्टम करने वाली पशु चिकित्सक डॉ. मनीषा चौहान ने कहा कि तोतों में फूड पॉइजनिंग के लक्षण पाए गए, लेकिन बर्ड फ्लू का कोई संकेत नहीं मिला. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर अनजाने में पक्षियों को ऐसा खाना खिला देते हैं जो उनके पाचन तंत्र के लिए जानलेवा साबित होता है.

चावल और अन्य खाद्य पदार्थ खिलाने पर रोक लगी

वन विभाग के अधिकारियों ने पुल के पास खाना खिलाने पर रोक लगा दी है और सख्ती से पालन के लिए मौके पर स्टाफ तैनात किया है. अधिकारियों ने बताया कि पक्षियों के विसरा के सैंपल आगे की जांच के लिए जबलपुर भेजे गए हैं. पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फूड पॉइज़निंग और गलत खान-पान से मौतें हुई हैं. पिछले चार दिनों से पशु चिकित्सा और वन विभाग के साथ-साथ वन्यजीव विंग की टीमें भी इलाके की निगरानी कर रही हैं.

कीटनाशक मिला पानी पीने से भी मौत की आशंका

पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी डॉ. सुरेश बघेल ने बताया कि मरे हुए पक्षियों के पेट में चावल और छोटे कंकड़ मिले हैं. उन्होंने कहा कि पहली नजर में मौतें गलत खान-पान से जुड़ी लग रही हैं, और इसके पीछे छिड़काव वाले खेतों में खाना खाने और नर्मदा नदी के पानी में कीटनाशक का संपर्क भी वजह हो सकता है. अधिकारियों ने कहा कि पुल पर आने वाले लोगों द्वारा पक्षियों को पका हुआ या बचा हुआ खाना खिलाना जानलेवा साबित हो सकता है.

भोपाल और जबलपुर की लैब बताएगी मौत की असली वजह

तोतों की मौत की वजह क्या है इसका खुलासा भोपाल और जबलपुर की प्रयोगशालाओं से विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही होगा. पशु चिकित्सक रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं. एहतियात के तौर पर क्षेत्र के सभी पोल्ट्री फार्मों की जांच की गई, जहां बर्ड फ्लू का कोई लक्षण नहीं मिला. इसके अलावा पानी में कीटनाशक मिले होने की आशंका पर आसपास के किसानों और कीटनाशक विक्रेताओं से भी पूछताछ की जा रही है.

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Published: 3 Jan, 2026 | 01:39 PM

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